ड्रोन सिस्टम को लेकर बनाए जा सकते हैं और भी सख्त नियम, वायुसेना स्टेशन पर हमले को देखते हुए लिया गया फैसला

रविवार को जम्मू में भारतीय वायु सेना के अड्डे पर हुए ड्रोन हमले के बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है. सूत्रों के मुताबिक, रविवार को वायुसे...
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रविवार को जम्मू में भारतीय वायु सेना के अड्डे पर हुए ड्रोन हमले के बाद केंद्र सरकार एक्शन में आ गई है. सूत्रों के मुताबिक, रविवार को वायुसेना स्टेशन पर हुए ड्रोन हमले को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ‘मानव रहित विमान सिस्टम’ या ड्रोन सिस्टम के मौजूदा नियमों को और भी ज्यादा सख्त बनाने पर विचार कर सकता है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि हालांकि, ड्रोन से जुड़े मौजूदा नियमों के आधार पर, ड्रोन को बनाने वाले से लेकर उसका इस्तेमाल करने वाले तक, ड्रोन के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकती है, लेकिन अवैध रूप से आने वाले ड्रोन इन नियमों का पालन नहीं करते हैं, इसलिए अब और भी ज्यादा सख्त नियमों को लाने की जरूरत हो गई है.

मालूम हो कि जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले हवाई अड्डा परिसर में स्थित वायुसेना स्टेशन में रविवार सुबह विस्फोटक से लदे दो ड्रोन गिरे, जिनसे धमाका हुआ. जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकवादियों ने पहली बार ड्रोन के जरिए हमला किया है. अधिकारियों ने बताया कि पहला विस्फोट रात 1 बजकर 40 मिनट के आसपास हुआ, जिससे हवाई प्रतिष्ठान के टेक्निकल एरिया में एक इमारत की छत ढह गई. इस स्थान की देखरेख का जिम्मा वायुसेना उठाती है और वहीं, दूसरा विस्फोट छह मिनट बाद जमीन पर हुआ. विस्फोट में वायुसेना के दो कर्मी घायल हो गए.

सऊदी अरब में ड्रोन हमलों के बाद भारतीय दिशानिर्देश

साल 2019 में सऊदी अरब के दो प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों के बाद भारत सरकार ने अवैध ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए दिशानिर्देशों में तेजी लाई थी. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की तरफ से लाए गए ये दिशानिर्देश नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के महानिदेशक की अध्यक्षता में बनाई गई एक कमेटी के जरिए लाए गए थे. इस कमेटी में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), खुफिया ब्यूरो, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड शामिल हैं.

कमेटी की रिपोर्ट में दिए गए थे ये सुझाव

इस कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था सैन्य क्षेत्रों में छोटे ड्रोन एक ऐसी दर से बढ़ रहे हैं, जिसने युद्धक्षेत्र कमांडरों और योजना-नियम बनाने वालों, सभी को चिंता में डाल दिया है. कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि छोटे ड्रोन भी विस्फोटक सामानों से लैस हो सकते हैं और इस तरह उन्हें एक घातक मिसाइलों में बदला जा सकता है. इस कमेटी ने अपने दिशानिर्देशों में संपत्ति और जीवन की सुरक्षा के आधार पर ऐसे अवैध ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए कई उपाय सुझाए थे, जिनके तहत राष्ट्रीय महत्व के स्थानों के लिए नियमों के एक ऐसे मॉडल को तैयार करने जरूरत बताई गई थी, जिनमें रडार, रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) डिटेक्टर, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड कैमरे जैसे साधन शामिल हैं.

इसके अलावा, RF जैमर, GPS स्पूफर, लेजर और ड्रोन कैचिंग नेट जैसे सॉफ्ट किल और हार्ड किल जैसे साधन भी लगाए जाने का सुझाव दिया गया था. अब एक रिपोर्ट में कहा गया है कि आने वाले समय के लिए ऐसे अवैध ड्रोनों से निपटने को लेकर भारतीय वायु सेना के एक प्रतिनिधि की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें NSG, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), DCGA, AAI, राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन, IB, DRDO और राज्य पुलिस विभागों के प्रतिनिधि शामिल हैं.

अवैध ड्रोनों से निपटने के लिए क्या हैं मौजूदा नियम?

हालांकि, ऐसे अवैध ड्रोनों से निपटने के लिए इन तय उपायों के अलावा, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पास ड्रोनों को चलाए जाने को लेकर पहले से ही नियम मौजूद हैं. DGCA के अनुसार, एनपीएनटी या ‘नो परमिशन- नो टेक-ऑफ’ के तहत, हर एक रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (नैनो को छोड़कर) को भारत में चलाए जाने से पहले डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म के जरिए वैध अनुमति लेना जरूरी है. इस नियम के तहत ड्रोन का इस्तेमाल करने वालों को ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है. ‘ग्रीन-जोन’ में उड़ान भरने के लिए केवल डिजिटल स्काई पोर्टल या ऐप के जरिए उड़ानों के समय और स्थान की सूचना देनी जरूरी है.

देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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ड्रोन सिस्टम को लेकर बनाए जा सकते हैं और भी सख्त नियम, वायुसेना स्टेशन पर हमले को देखते हुए लिया गया फैसला
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