LAC Tention: शांति काल में भी हरकतों से बाज नहीं आया चीन, भारत के खिलाफ तिब्बत की धरती का इस्तेमाल कर रहा ड्रैगन

पूर्वी लद्दाख में फिलहाल शांति है और तीन महीने बाद एक बार फिर भारत और चीन बातचीत की मेज पर बैठने वाले हैं. लेकिन इस शांति काल में भी चीन की...
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पूर्वी लद्दाख में फिलहाल शांति है और तीन महीने बाद एक बार फिर भारत और चीन बातचीत की मेज पर बैठने वाले हैं. लेकिन इस शांति काल में भी चीन की साजिशें रुकी नहीं हैं. कभी वो युद्ध अभ्यास कर रहा है तो कभी पूर्वी सीमाओं पर सेना की तैनाती बढ़ा रहा है. अब तो ड्रैगन ने भारत के खिलाफ एक और बड़े घात की तैयारी कर ली है. ये तैयारी LAC के पार तिब्बत में की गई है. उसी तिब्बत में जिसके बारे में जिनपिंग के सुपर गुरु रहे चीनी शासक माओ ने 1949 में बेहद अहम बयान दिया था. माओ ने कहा था कि तिब्बत हमारी हथेली है और लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान और नेफा यानी अरुणाचल प्रदेश हमारी उंगलियां हैं. 71 वर्षों से माओ की ये घोषणा चीन के एजेंडे का आधार बनी हुई है. चीन अपने ऐजेंडे के लिए ना सिर्फ तिब्बत की जमीन बल्कि वहां के युवाओं को भी इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन यहां ये बात समझनी पड़ेगी की तिब्बत जब तक बफर स्टेट के रूप में भारत और चीन के बीच एक आजाद मुल्क था तब तक भारत के साथ चीन का सीमा विवाद न के बराबर था, लेकिन जब से चीन ने तिब्बत जैसे शांति प्रिय देश को हड़प लिया. तब से वो भारत की सीमाओं में साजिशें रचने लगा.

माओ की इसी सोच को जिनपिंग भी आगे बढ़ा रहे हैं. शी जिनपिंग दूसरा माओ बनना चाहते हैं. भारत के खिलाफ तिब्बत की धरती और वहां के युवाओं का इस्तेमाल युद्द की तैयारी के लिए कर रहे हैं. कैसे ये हम आपको आगे बताएंगे लेकिन पहले ये जान लीजिए कि चीन-पाकिस्तान सीमा पर मौजूदा हालात और भविष्य की चुनौतियों को लेकर भारतीय सेना खुद को और मजबूत बनाने में जुटी हुई है. इसके लिए सेना की तरफ से 1750 Futuristic Infantry Combat Vehicles यानी FICV खरीदने के लिए शुरुआती टेंडर जारी कर दिया गया है. 1750 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल में से 55% वाहनों को भारी बंदूकों से लैस किया जाएगा जबकि बाकी वाहनों को जल, जमीन, आसमान से लेकर पहाड़ों तक के लिए तैयार किया जाएगा. ये तैयारी इसलिए भी की जा रही है ताकि चीन को किसी भी वक्त जवाब दिया जा सके. क्योंकि चीन ने भारत की नकल करते हुए भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स की तर्ज पर एक खास फोर्स तैयार की है. जिसमें सिर्फ लद्दाख के युवा हैं. इसे लद्दाख के पास ही तैनात किया गया है.

LAC के पास चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा. रेड आर्मी की नापाक नजर फिर भारत की ओर है. फिर से बातचीत की शुरुआत के बीच चीन अपनी नई साजिश से अड़ंगा डाल रहा है. अपनी ताकत की डिंगें हांकने वाला ड्रैगन धोखेबाजी का डंक मारने की तैयारी कर रहा है. खबर पक्की है जिनपिंग की सेना भारत के खिलाफ पहाड़ों में जंगी फितूर को आगे बढ़ा रही है. LAC पार चीन की इस करतूत को लेकर ये दावा यूं ही नहीं है. एक रिपोर्ट से लद्दाख सीमा के पार तिब्बत में चीन की चतुर चाल का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. चीन ने सिक्किम और भूटान के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चुंबी घाटी में PLA के जवानों को तैनात किया है. ये तैनाती तिब्बत यूनिट के पास किया गया है. ये तैनाती रूटीन नहीं हैं. ना ही इसके जवान PLA के आम जवानों की तरह हैं. ये भारत के खिलाफ चीन की सबसे बड़ी तैयारी है. जिसकी रणनीति बीजिंग में बैठे जिनपिंग के कमांडरों ने बनाई है. जिसे जमीन पर उतारने के लिए लद्दाख रीजन के करीब तिब्बत के इलाके को चुना गया है.

चीन की मिलिट्री ने भारत की स्पेशल फ्रंटियर फोर्स की तर्ज पर एक खास फोर्स तैयार की है. चीन ने तिब्बत के युवाओं वाली एक नई स्पेशल मिलिट्री विंग बनाई है. जिसे Special Tibetan Army Unit कहा जा रहा है. जिसे मिमांग चीटों यानी एमसी के रूप में भी जाना जाता है. ये पीएलए की मिलिशिया का एक नया स्पेशल सेट है जिसे लद्दाख के करीब चुंबी वैली में मोर्चे पर लगाया गया है. यही नहीं चीन ने लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर भारत पर दबाव बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा तिब्बती युवाओं की भर्ती शुरू कर दी है. टीवी9 भारतवर्ष के सूत्रों का दावा है कि Special Tibetan Army Unit में तिब्बती युवाओं वाले दो बैच अब तक भर्ती किए जा चुके हैं. हर बैच में 100 युवा हैं और इन्हें पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के साथ ही ट्रेनिंग दी गई है. चुंबी वैली जिसमें युतुंग, चीमा, रिनचेनगेंग, पीबी थांग और फारी के इलाके शामिल हैं. इन जगहों पर पहले बैच के तिब्बती युवाओं को तैनात किया गया है. दूसरे बैच की तैयारी फारी में जारी है. पहले बैच को अरुणाचल की ओर 11,000 फीट और लद्दाख में काराकोरम के करीब 18,000 फीट की ऊंचाई पर लगाया गया है. हालांकि इन जवानों को रैंक और पद नहीं मिले हैं.

Special Tibetan Army Unit के सैनिकों को ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों में तैनात किया गया है ताकी PLA स्थानीय लोगों की इलाके के बारे में जानकारी का फायदा उठा सके. ये चीन का काउंटर अटैक प्लान है. क्योंकि भारत ने बहुत पहले से ही तिब्बत के उन युवाओं को मिलाकर स्पेशल फोर्स तैयार की हुई है. जो चीन की वजह से लद्दाख में रहने को मजबूर हैं. पिछले साल इन्हीं युवाओं से लैस स्पेशल फोर्स ने चुशुल में चीन को धूल चटाई थी. पैंगोंग के दक्षिण में चोटियों पर चीन के जवानों की हेकड़ी निकाल दी थी. अब जरा सोचिए. अगर युद्द के मैदान में दोनों तरफ से तिब्बती होंगे तो क्या वो आपस में खून बहाएंगे. .क्या तिब्बती जो कई दशकों से चीन के जबरन कब्जे से त्रस्त है, शोषित है. अपनी पवित्र धरती से पलायन के लिए मजबूर है. वो तिब्बती युवा ड्रैगन का साथ देगा, यकीनन नहीं. लेकिन चीन है कि अपनी साजिशों और हरकतों से बाच नहीं आर रहा. कभी पूर्वी लद्दाख में युद्धाभ्यास करता है. जब युद्धाभ्यास की टाइमिंग पर सवाल उठाता है तो हिंदुस्तान के खिलाफ तिब्बती युवाओं का इस्तेमाल करने लगता है. लेकिन धूर्त चीन की ये चाल फिर बेनकाब होगी. .

भारत ने 6 दशक पहले ही तिब्बती युवाओं से लैस स्पेशल फोर्स तैयार की उसे 7 विकास बटालियन के तौर पर जाना जात है. इस बटालियन का कोड 22 है और कभी-कभी इसे इस्टैब्लिशमेट टू-टू भी कहते हैं. इस स्पेशल फोर्स में सिर्फ तिब्बत के निर्वासित नागरिकों को ही तरजीह दी जाती है. ये बटालियन एक स्पेशल फ्रंटियर फोर्स यानी एसएफएफ है. नवंबर 1962 में चीन के साथ पहली जंग खत्म होने के बाद ही स्पेशल फोर्स बन गई थी. 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग और करगिल वॉर में भी स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स ने दुश्मनों के छक्के छुड़ाए. .पिछले साल इस फोर्स का प्रयोग चीन को जवाब देने में किया गया था. और इन तिब्बती जाबाजों ने चीन के इरादे मिट्टी मिला दिए थे. ये जवान ऐसा ही करारा जवाब आगे भी देंगे.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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