ग्लेशियर पिघलने से 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में, जानिए भारत पर कैसे पड़ रहा असर?

जलवायु परिवर्तन का असर ग्लेशियर पर हो रहा है और बताया जा रहा है कि इससे 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में है. लेकिन इससे पहले बात दिल्ली क...
Siachen Glacier

जलवायु परिवर्तन का असर ग्लेशियर पर हो रहा है और बताया जा रहा है कि इससे 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में है. लेकिन इससे पहले बात दिल्ली की. दिल्ली में आज मानसून की बारिश से तापमान गिरा है और मौसम सुहाना हुआ. वहीं दिल्ली समेत देश के बाकी हिस्सों में भी आज जबरदस्त बारिश हुई.

दिल्ली, नोएडा, मंगलुरु, धर्मशाला और कोच्ची में जोरदार बारिश हुई. यहां कई इलाकों में पानी भर गया तो कई जगहों पर बारिश की वजह से लोगों की परेशानी बढ़ गई. इसके साथ ही मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में अलर्ट जारी किया है. ताकी मौसम बिगड़ने के बाद किसी भी हादसे से बचा जा सके.

स्टडी में बड़ा दावा

ऐसा ही एक और अलर्ट भारत और नेपाल के शोधकर्ताओं की स्टडी में सामने आया है. स्टडी में दावा किया गया है कि ग्लेशियर पिघलने से 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में है. स्टडी के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग की वजह से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी घाटी में रह रही एक अरब आबादी का जीवन और आजीविका खतरे में है.

इससे भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि ग्लेशियर के पिघलने से नदियां उफन रहीं हैं और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति बन रही है.

हिमाचल प्रदेश में तबाही का खौफनाक मंजर

हालांकि इसका असर पहाड़ों पर भी लगातार दिख रहा है. हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला, कांगड़ा और आस पास के इलाकों में तबाही का खौफनाक मंज़र दिखने लगा है. बादल फटने के 72 घंटे बाद भी रेस्क्यू और राहत काम चल रहा है.

पिछले दो-तीन दिनों में कई बार पहाड़ी नदियां समंदर की तरह उफान मारती आई और तबाही बरपा कर आगे निकल गई. फिलहाल ये नदियां शांत हैं लेकिन तबाही के निशान अभी भी मौजूद हैं और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है.

धर्मशाला में बादल फटने के दो दिन बाद चेतरू गांव में ये मंजर है तबाही का. नदी का जलस्तर भले ही सामान्य हो गया है लेकिन 48 घंटे पहले इसी मांझी नदी ने जो रौद्र रूप पकड़ा था. अभी भी उसके निशान यहां साफ नज़र आ रहे हैं. मकानों के इस मलबे में आशियाने के बह जाने का गम दफ्न है. जहां पहले खुशियां थी वहां आज गमजदां लोगों के आंसू बह रहे हैं.

सीएम जयराम ठाकुर ने किया एरियल सर्वे

सूबे के सीएम जयराम ठाकुर ने इन इलाकों का एरियल सर्वे भी किया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लिया है और ग्राउंड जीरो पर जाकर बाढ़ पीड़ितों से बात कर दर्द बांटने की कोशिश की है. टीवी9 भारतवर्ष की टीम भी लगातार इन इलाकों में मौजूद है और चप्पे चप्पे के हालत को अपने कैमरे में कैद कर रही है. कुदरती आफत में यहां कई घर टूट गए हैं. जमींदोज हो चुके मकानों के मलबे को हटाया जा रहा है. घायलों को पीठ पर लादकर रेस्क्यू किया जा रहा है. जो जिंदा बचे हैं उन्हें अस्पातल पहुंचाया गया है.जो लापता हैउनकी तलाश जारी है.

कांगड़ा इलाके में तो बारिश और बादल फटने से भारी तबाही हुई है. कांगड़ा के घेरा और खड़ी बोई इलाकों की और जाने वाली सड़क का करीब 100 मीटर का हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह चुका है. कई गांवों का संपर्क पूरे प्रदेश से टूट गया है. पहाड़ी के ऊपरी इलाकों में करीब 6 गांवों में लोग फंसे हुए हैं जिनके पास ना तो बिजली है और ना ही पानी. इन गांवों में प्रशासन की टीम के पहुंचने से पहले टीवी 9 भारतवर्ष की टीम पहुंच गई है…

यहां कारेरी लेक इलाके से कई शवों को बरामद किया गया है. इनमें पंजाब के सूफी सिंगर मनमीत सिंह का शव भी शामिल है. पैर फिसलने की वजह से सिंगर मनमीत सिंह सैलाब में बह गए.रेस्क्यू टीम को यहां पर कुल 6 शव बरामद हुए हैं, जिनमें एक महिला, एक बच्चे का शव भी शामिल है.

पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश

यहां पहाड़ों के कई बरसाती नाले और झीलें भारी बारिश की वजह से डायवर्ट होकर रिहायशी इलाकों की तरफ मुड़ गए हैं और नदी के तेज बहाव की वजह से मकान के नीचे की मिट्टी बह गई है. मकान सिर्फ पत्थरों पर टिका है जो कभी भी भरभरा कर गिर सकता है.

ना सिर्फ कांगड़ा और धर्मशाला, बल्कि हिमाचल और उत्तराखंड समेत पूरे पहाड़ों में अभी भी लगातार बारिश हो रही है.आसमानी आफत रुकने का नाम नहीं ले रही.आसमान में काले बादल छाए है. ऐसे में आसमान से आने वाली आफत से अभी आगे भी अलर्ट रहने की जरूरत है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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राष्ट्रीय समाचार: ग्लेशियर पिघलने से 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में, जानिए भारत पर कैसे पड़ रहा असर?
ग्लेशियर पिघलने से 100 करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में, जानिए भारत पर कैसे पड़ रहा असर?
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