यूनिफॉर्म सिविल कोड की मांग वाले निजी सदस्य के विधेयक का लेफ्ट सांसदों ने किया विरोध, कहा- यह देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता के लिए विनाशकारी

लेफ्ट पार्टी (Left Party) के तीन सांसदों ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर एक निजी सदस्य के विधेयक को पेश करने पर आपत्ति जताते ...
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लेफ्ट पार्टी (Left Party) के तीन सांसदों ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर एक निजी सदस्य के विधेयक को पेश करने पर आपत्ति जताते हुए राज्यसभा में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि इस तरह के कानून से सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान होगा. राज्यसभा में बीजेपी सांसद किरोड़ी लाल मीणा (Kirodi Lal Meena) ने विधेयक का प्रस्ताव रखा.

CPI(M) के तीन राज्यसभा सांसद- एलाराम करीम, डॉ वी शिवदासन और बिनॉय विश्वम ने निजी सदस्य के विधेयक ‘भारत में समान नागरिक संहिता’ को पेश करने का विरोध करते हुए नियम 67 के तहत नोटिस दिया. किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार को विधेयक पेश करने वाले थे, लेकिन बार-बार व्यवधान के बाद सदन स्थगित होने के कारण ऐसा नहीं हो सका.

CPI के राज्यसभा सदस्य बिनॉय विश्वम ने कहा, “इस तरह के कदम को पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि समान नागरिक संहिता को बहुत आलोचना का सामना करना पड़ा है और केंद्र इसे एक निर्दोष बिल के रूप में कह सकता है लेकिन यह इतना निर्दोष बिल नहीं है क्योंकि इस बिल के पीछे एक एजेंडा है. समान नागरिक संहिता को लागू करना आरएसएस का एजेंडा है.” उन्होंने कहा, “समान नागरिक संहिता के लिए बहुत तैयारी की जरूरत है.”

‘जमीनी स्तर पर बहुत तैयारी की जरूरत’

बिनॉय विश्वम ने कहा, “अगर कोई सरकार समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश करती है, तो यह देश की एकता और धर्मनिरपेक्षता के लिए विनाशकारी होगा. नियम 67 के तहत, हम एक प्रस्ताव लागू करते हैं. दुर्भाग्य से, मेरा मानना ​​​​है कि इस बिल को नहीं लिया जाना चाहिए. हम इस पर अपना आकलन आगे नहीं बढ़ा सकते. साथ ही, जब भी सरकार की ओर से ऐसा कदम उठता है, हम विपक्ष के रूप में भारत की धर्मनिरपेक्ष नींव के लिए प्रतिबद्ध रहते हैं. हम इस कदम का विरोध करने के लिए नियम 67 के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करेंगे.”

विश्वम ने कहा, “समान नागरिक संहिता का अभियान वास्तव में एक कठिन कार्य है क्योंकि भारत में यह चर्चा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शुरू हुई थी. भारत जैसे देश में समान नागरिक संहिता का उपयोग करना जहां कई धर्मों, विश्वासों और रीति-रिवाजों और प्रथाओं को मानने वाले लोग रहते हैं. ऐसे में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर आशंकाएं पैदा हो सकती हैं. इसलिए, हमारा मानना ​​​​है कि इसके लिए जमीनी स्तर पर बहुत तैयारी की जरूरत है.”

विश्वम ने कहा, “सीएए, एनआरसी, अनुच्छेद 370 के बाद भारत में अल्पसंख्यक महसूस कर रहे हैं कि वे इस देश में सुरक्षित नहीं हैं. इस देश में उनके अधिकार सुरक्षित नहीं हैं. अगर सरकार इसे लागू करने की कोशिश करती है, तो शायद प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए इस देश में अल्पसंख्यक असुरक्षित महसूस करेंगे. इसलिए एक समझदार सरकार और एक जिम्मेदार राजनीतिक दल को इस राजनीति में नहीं जाना चाहिए.”

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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