कोविड प्रबंधन पर न्यायालय कार्यपालिका के क्षेत्र में किस हद तक कर सकती हैं हस्तक्षेप, सुप्रीम कोर्ट करेगा समीक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह समीक्षा करेगा कि कार्यपालिका के दायरे में आने वाले कोविड-19 प्रबंधन से जुड़े मुद्दों में संवैधानिक अदा...
Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह समीक्षा करेगा कि कार्यपालिका के दायरे में आने वाले कोविड-19 प्रबंधन से जुड़े मुद्दों में संवैधानिक अदालतें किस सीमा तक हस्तक्षेप कर सकती है. कोर्ट ने कहा कि अदालतों को भारत के संविधान में किए गए अधिकारों के बंटवारे का सम्मान करना जरूरी है, भले ही इसका उद्देश्य सभी के लिए निष्पक्षता से जुड़ा हुआ ही क्यों ना हो.

कोर्ट ने कहा कि वह इस पहलू पर भी गौर करेगा कि क्या इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले में कूदने की जरुरत थी भी या नहीं और उसकी ‘राम भरोसे’ वाली टिप्पणी न्यायसंगत है या नहीं. जस्टिस विनित सरन और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने उत्तर प्रदेश में कोविड-19 प्रबंधन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों/कस्बों और गांवों में पूरी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली ‘राम भरोसे’ है.

बेंच ने कहा, ‘‘हम यह प्रतिपादित करना चाहते हैं कि कोई संवैधानिक अदालत इस तरह के मुद्दों पर किस हद तक हस्तक्षेप कर सकती है. क्या हाई कोर्ट को इस मुद्दे के बीच में कूदने की जरुरत थी भी? सभी के लिए निष्पक्षता का उद्देश्य होने के बावजूद हमें अधिकारों के बंटवारे का सम्मान करना होगा. ‘राम भरोसे’ वाली टिप्पणी किस हद तक न्यायसंगत है.’’

संकट के समय सभी को संयम बरतना होगा- जस्टिस माहेश्वरी

जस्टिस सरन ने कहा, ‘‘ऐसे सवाल हैं, जैसे कितनी एम्बुलेंस हैं, कितने ऑक्सीजन युक्त बिस्तर हैं. हम इन सवालों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि आप सलाह नहीं दे सकते, लेकिन आप स्थानीय कंपनियों से वैक्सीन का फॉर्मूला लेकर उसका उत्पादन करने को कैसे कह सकते हैं? ऐसे निर्देश कैसे दिए जा सकते हैं?’’

जस्टिस माहेश्वरी ने भी कहा कि कुछ मुद्दे कार्यपालिका की जद में आते हैं और ऐसे संकट के समय में सभी को संयम बरतना होगा और यह ध्यान रखना होगा कि किसे क्या काम करना है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास देने के लिए 110 सलाह हो सकती हैं, लेकिन क्या हम उन्हें अपने आदेश का हिस्सा बना सकते हैं? हमें याद रखना होगा कि हम संवैधानिक अदालतें हैं. संकट के समय सबके एकजुट प्रयास की आवश्यकता है, लेकिन सिर्फ मंशा अच्छी होने से किसी को भी दूसरे के अधिकार क्षेत्र में कूदने का हक नहीं मिल जाता है.”

मामले की सुनवाई शुरू होते ही बेंच ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से इस प्रकरण की स्थिति के बारे मे पूछा तो उन्होंने जवाब दिया कि हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है. मेहता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह आदेश निरस्त कर सकती है.

12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

बेंच ने कहा कि उसने अपने पहले के आदेश में स्पष्ट कर दिया था कि हाई कोर्ट के निर्देशों को सुझाव माना जाए और इसलिए इसे निरस्त करने के लिए किसी औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं है. इस मामले में न्याय मित्र की भूमिका निभा रहे सीनियर वकील निदेश गुप्ता ने कहा कि हाई कोर्ट ने कहा है कि उसके निर्देशों की व्यावहारिकता को राज्य को देखना होगा. उन्होंने कहा कि कोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार से पूछ सकती है कि कोविड की तीसरी लहर से पहले क्या करने का उसका प्रस्ताव है क्योंकि इस समय तूफान से पहले की खामोशी है.

बेंच ने कहा कि वह 12 अगस्त को इस मामले की आगे सुनवाई करेगी. इस बीच, हाई कोर्ट अपनी सुनवाई जारी रख सकता है. राज्य सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि उसके पास कुल 2,200 बुनियादी जीवन रक्षक से लैस एम्बुलेंस हैं. इनके अलावा 250 उन्नत जीवन रक्षक प्रणाली से लैस एम्बुलेंस हैं. सरकार ने यह भी कहा है कि राज्य में 298 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र हैं और 273 ऐसे केन्द्रों को 177 आक्सिजन कंसेन्ट्रेटर उपलब्ध कराए गए हैं और वह 20,000 से ज्यादा आक्सीजन कंसेन्ट्रेटर खरीद रही है.

ये भी पढ़ें- ‘IT एक्ट की धारा 66A के तहत दर्ज केस वापस लें, आगे नहीं हो इस्तेमाल’- केंद्र सरकार का राज्यों को निर्देश

ये भी पढ़ें- LAC पर समझौते का पालन करे ड्रैगन, मौजूदा स्थिति को लंबा खींचना किसी के हित में नहीं- चीन से बोले विदेश मंत्री जयशंकर

देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
यह भी पढ़ें

$ho=https://www.asenews.in$type=list$m=0$cate=0$c=50$va=0

Name

General knowledge,2,Latest news update,46,National News,988,राष्ट्रीय समाचार,988,
ltr
item
राष्ट्रीय समाचार: कोविड प्रबंधन पर न्यायालय कार्यपालिका के क्षेत्र में किस हद तक कर सकती हैं हस्तक्षेप, सुप्रीम कोर्ट करेगा समीक्षा
कोविड प्रबंधन पर न्यायालय कार्यपालिका के क्षेत्र में किस हद तक कर सकती हैं हस्तक्षेप, सुप्रीम कोर्ट करेगा समीक्षा
https://cdn1.tv9hindi.com/wp-content/uploads/2021/01/Supreme-court-1.jpg
राष्ट्रीय समाचार
https://www.nishpakshmat.page/2021/07/blog-post_423.html
https://www.nishpakshmat.page/
https://www.nishpakshmat.page/
https://www.nishpakshmat.page/2021/07/blog-post_423.html
true
6650069552400265689
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content