Covid-19: कोरोना का शिकार बने लोगों के परिवारों के लिए आगे बढ़ना हुआ मुश्किल, देखिए रिपोर्ट

आज हम आपको दिखाएंगे कि कोरोना वायरस से जिन लोगों को अपना शिकार बनाया उनके परिवार के लिए जीवन को आगे बढ़ाना कितना बड़ा संकट बन गया है. मध्य...
Corona Update

आज हम आपको दिखाएंगे कि कोरोना वायरस से जिन लोगों को अपना शिकार बनाया उनके परिवार के लिए जीवन को आगे बढ़ाना कितना बड़ा संकट बन गया है.

मध्य प्रदेश के शिवपुरी में मां की मौत के बाद ये तीन बच्चे अनाथ हो गए. पिता की पहले ही मौत हो चुकी थी.अब बच्चे अपनी बुज़ुर्ग रिश्तेदार के सहारे हैं. लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है. ज़िला प्रशासन ने दो बार- दो-दो हज़ार रुपये दिए. लेकिन अभी तो इन बच्चों का पूरा भविष्य खड़ा है.

वही सरकार जो दावे कर रही है, उन दावों में अनाथ बच्चों के 2000- 2000 की मदद दो बार ही मिली है,बच्चें अभी छोटे हैं. उनका आगे अभी भविष्य भी है. वह पढ़ना चाहते है, बड़ी बिटिया की उम्र अभी महज 11 साल तो बेटे की उम्र 9 साल तो वही छोटी बेटी 7 साल की है.

बरेली के राकेश वर्मा और उनकी पत्नी सीमा वर्मा को कोरोना ने 4 घंटे के अंतराल पर अपना शिकार बना लिया. अब इस घर में सिर्फ दो सदस्य रह गए हैं…संजू और उनके भाई रोहन.माता-पिता के जाने के बाद भाई-बहन के सामने बड़ा सवाल ये है कि अब घर कैसे चलेगा?

इसी तरह यूपी के इटावा में 35 वर्ष के अरुण शर्मा की कोरोना से मौत के बाद. दो छोटे बच्चों ऋषि और अंजली के भरण पोषण की दिक्कत सामने आ गई है. घर में अरुण की पत्नी और मां हैं. लेकिन आय का कोई साधन नहीं बचा है. पड़ोसियों ने कुछ दिनों तक मदद की लेकिन उसकी भी एक सीमा है. सरकार ने भी कोई सहायता नहीं की.

अब मध्य प्रदेश के बालाघाट में कोरोना की वजह से इस परिवार में 15 दिनों के अंदर 5 लोगों की जान चली गई.दो भाइयों का परिवार एक साथ रहता था.अप्रैल के आखिरी हफ्ते और मई के पहले हफ्ते के बीच एक एक करके दोनों भाइयों और उनकी पत्नियों की मौत हो गई.अब घर में 5 बच्चे रह गए हैंऔर एक महिला.दिक्कत ये है कि आजीविका का कोई साधन नहीं बचा है.परेशानी ये भी है कि इस परिवार में जिन लोगों की मौत हुई है, उन्हें कोरोना का संदिग्ध मरीज़ माना गया है.यानी अभी तक मदद की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है.

इसी तरह चित्रकूट के सतानंद पाण्डेय की 25 अप्रैल को मौत हुई. सतानंद के बुज़ुर्ग मां-बाप, पत्नी, 2 बेटियों और 1 बेटे के लिए अब ज़िंदगी की गाड़ी को आगे बढ़ाना बड़ा सवाल है. ज़ाहिर है इन परिवारों को बहुत बड़ी मदद की दरकार है. लेकिन अभी भी ये तय नहीं है कि सरकार इन्हें किस तरह की मदद करने जा रही है और वो इनके लिए कितनी मददगार साबित होगी.


सुप्रीम कोर्ट के फैसले की बड़ी बातें

सबसे पहले आपको बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या बड़ी बातें कही हैं.

1.NDMA यानी National Disaster Management Authority 6 हफ़्ते के भीतर पीड़ित परिवारों को भुगतान की जाने वाली राशि का निर्धारण करे.

2. किसी विशेष राशि का भुगतान करने के लिए सरकार को निर्देशित करना उचित नहीं है

3. DMA की धारा 12 के तहत दिशानिर्देशों का पालन ना करके NDMA अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम रहा है.

याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि कोरोना के संक्रमण और संक्रमण के बाद की बीमारी से जान गंवाने वाले परिवारों को 4 लाख रुपये मुआवज़ा दिया जाए. मुआवजे को लेकर कोर्ट ने केंद्र से हलफनामा मांगा था. केंद्र की ओर से 19 जून को पहला हलफनामा दाखिल किया गया था, जिसके बाद कोर्ट ने दूसरा हलफनामा दाखिल करने को कहा. इस पर केंद्र ने शनिवार को दोबारा हलफनामा दाखिल किया. कोरोना मरीज की मौत को कब नहीं माना जाएगा कोविड डेथ, सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने बताया.

केंद्र ने 11 जून को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोविड से मौत पर 4 लाख रुपये के मुआवजे की मांग वाजिब है और सरकार इस पर विचार कर रही है. अगर इसी आधार पर हिसाब लगाया जाए तो देश में कोरोना से अभी तक करीब 4 लाख लोगों की मौत हो चुकी है. मान लिया जाए कि सरकार पीड़ित परिवारों को 4-4 लाख रुपये का मुआवज़ा देती है, तो कुल मिलाकर ये मदद राशि 16 हज़ार करोड़ रुपये हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने आज ये आदेश भी दिया कि अगर किसी की कोरोना की वजह से…या कोरोना के चलते हुई किसी बीमारी की वजह से मौत हो जाती है तो उसके डेथ सर्टिफिकेट पर लिखा होना चाहिए कि मौत की वजह कोरोना है. कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर किसी परिवार को डेथ सर्टिफिकेट पर आपत्ति है तो इसपर दोबारा विचार किया जाए.

अब बात देश में कोरोना के कम होते कहर की

मंगलवार को देश में 45 हजार 951 नए मामले सामने आए हैं हालांकि ये आंकड़ा सोमवार से करीब 9 हजार ज्यादा है. लेकिन राहत की बात ये है कि रिकवरी रेट बढ़कर करीब 97 प्रतिशत हो गया है. मंगलवार को भी नए मरीजों से ज्यादा मरीज ठीक हुए.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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