Covid-19: लोगों की लापरवाही से तेज होती तीसरी लहर की आहट! देश में वैक्सीन की कमी का पूरा विश्लेषण

देश के कई हिस्सों में कोरोना से जुड़े नियमों को ताक पर रख दिया गया है. हिल स्टेशन से लेकर बाजारों तक में भारी भीड़ उमड़ रही है. लापरवाही की...
Shimla Tourists (1)

देश के कई हिस्सों में कोरोना से जुड़े नियमों को ताक पर रख दिया गया है. हिल स्टेशन से लेकर बाजारों तक में भारी भीड़ उमड़ रही है. लापरवाही की हदें लांघी जा रही हैं. जिसको लेकर प्रधानमंत्री तक को बोलने पर बाध्य होना पड़ा. एक शीर्ष वैज्ञानिक ने तो यहां तक कह दिया कि भारत में तीसरी लहर की शुरुआत 4 जुलाई से ही हो चुकी है. हालांकि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA का कहना है कि तीसरी लहर आई नहीं है, लेकिन बहुत करीब आ चुकी है.

अब कोरोना को लेकर जो आकड़ें आ रहे हैं..वो वाकई डराने लगे हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय से आज सुबह जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में कोरोना के 41,806 नए मामले दर्ज किए गए हैं और 581 मरीजों ने पिछले 24 घंटे में दम तोड़ दिया है. पांच राज्यों के आंकड़े ज्यादा फिक्र बढ़ाने वाले हैं. 5 राज्यों में कोरोना के 75% नए केस आ रहे हैं. केरल में सबसे ज्यादा 37.4 फीसदी नए केस आए हैं. इसके बाद महाराष्ट्र में 8,602 मामले, आंध्र प्रदेश में 2,591 मामले, तमिलनाडु में 2,458 मामले और ओडिशा में 2,074 मामले दर्ज किए गए हैं.

इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्यों में संक्रमण जोर पकड़ता जा रहा है, जो इस बात की ओर संकेत दे रहा है कि देश में तीसरी लहर जल्द ही आने वाली है. पूर्वोत्तर के चार राज्यों की बात करें तो यहां संक्रमण की स्थिति नियंत्रण से बाहर नजर आ रही है. सिक्किम में पॉजिटिविटी रेट 19.5 फीसदी, मणिपुर में 15 फीसदी, मेघालय में 9.4% और मिजोरम में 11.8% है. इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में 7.4%, नागालैंड में 6% और त्रिपुरा में भी संक्रमण दर पांच प्रतिशत से ज्यादा दिख रही है, जो चिंता की बात है.

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर आज AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी के समर्थक कोरोना नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखे. अपने नेता के स्वागत में उमड़े ये लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए. मास्क को भी जरूरी नहीं समझा और जाम भी लगा दिया. दरअसल, गाजियाबाद के डासना इलाके में आज ओवैसी पार्टी ऑफिस का उद्घाटन करने पहुंचे. इस कार्यक्रम में भी उनके ज्यादातर समर्थकों ने फेस मास्क नहीं पहना था. हमने ये इसलिए बताई क्योंकि देश अभी कोरोना की तीसरी लहर के मुहाने पर खड़ा है, आंकड़े डरा रहे हैं और सबसे ज्यादा डरा रही हैं हिल स्टेशन्स से आती तस्वीरें.

कोरोना काल में एक और एक का जोड़ दो नहीं बल्कि 11 से भी सैकड़ों हजारों गुणा ज्यादा होता है और ये बात पहाड़ों में भीड़ लगाकर मौज मस्ती करते लोगों को समझने की जरूररत है. क्योंकि कोरोना की तीसरी लहर की आहट 130 करोड़ देशवासियों को डरा रही है. डॉक्टरों और वैज्ञानिकों को सावधान कर रही है. और देश के प्रधान तक की फिक्र बढ़ा रही हैं. कोरोना की एक लहर के बाद दूसरी लहर और अब तीसरी लहर का डर, लेकिन इकोनॉमी को पटरी पर लाने और कमाने-खाने के लिए टूरिज्म खोलना भी जरूरी है. लेकिन उसका ये मतलब नहीं कि मौका मिला नहीं कि लापरवाही की हदें लांघ दीं.

लापरवाही ना बन जाए तीसरी लहर की वजह

टीवी9 भारतवर्ष आपको लगातार आगाह कर रहा है. पहाड़ों पर लापरवाही की तस्वीरें दिखा रहा है और इन सबके कारण यहां पुलिस की सख्ती बढ़ी है. हम बार-बार आपको पहाड़ों की तस्वीरें इसलिए दिखा रहे हैं, क्योंकि एक तरफ वैज्ञानिक देश में तीसरी लहर पहुंचने का दावा कर रहे हैं. दूसरी ओर कुछ लोग हद से ज्यादा लापरवाह दिख रहे हैं. पहाड़ों पर बेफिक्री से मौज मस्ती कर रहे हैं. बहुत मुमकिन है कि तीसरी लहर की वजह यही लोग बने हों.

पहाडों पर सावधानी क्यों जरूरी है. इसको आंकड़े के जरिए भी समझिए. हिमाचल प्रदेश में अभी 1,191 एक्टिव केस हैं. जिनमें से 159 केस अकेले शिमला से हैं. उत्तराखंड में सैलानियों की बाढ़ आई हुई है और आए भी क्यों ना? ऐसी वादियों में आनंद से इनकार भला कौन करेगा? लेकिन अभी महामारी का ख्याल सबसे जरूरी है. हालांकि अभी सब पर लापरवाही भारी है. नैनीताल, रानीखेत, कौसानी, भीमताल, बागेश्वर, पिथौरागढ, मसूरी सहित दर्जन भर से ज्यादा पर्यटक स्थलों पर भीड़ उमड़ रही है. अकेले यूपी से बस सेवा शुरू हो जाने से प्रतिदिन 14 हजार सैलानी उत्तराखंड जा रहे हैं.

आगे वीकेंड और बकरीद है. लिहाजा भीड़ और उमड़ने की उम्मीद है, इसलिए सख्ती बढ़ाई जा रही है. बॉर्डर पर RT-PCR टेस्ट की रिपोर्ट मांगी जा रही है. बावजूद इसके लोग फर्जी RTPCR टेस्ट रिपोर्ट के जरिए बॉर्डर पार कर रहे हैं. देहरादून-मसूरी में पुलिस ने ऐसे ही 13 लोगों को पकड़ा. अब तक इस मामले में करीब सौ लोग पकड़े जा चुके हैं. मतलब मौज मस्ती के लिए फर्जीवाड़ा भी जारी है और लापरवाही भी. लेकिन अभी समय संयम का है, क्योंकि अगर हमारा और आपका अनुशासन टूटेगा तो कोरोना का विस्फोट फिर से होगा और तीसरी लहर एक बार फिर कहर बरपा सकती है.

“तीसरी लहर का खतरा वास्तविक है”

देश में डेल्टा वेरिएंट के बढ़ते आंकड़े और कोरोना के बदलते स्वरूप के बीच एक रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि तीसरी लहर का खतरा अब वास्तविक लग रहा है. ये जानकारी एक विदेशी ब्रोकरेज कंपनी ने दी है. UBS सिक्योरिटीज इंडिया की मुख्य अर्थशास्त्री तन्वी गुप्ता जैन ने कहा है कि खतरा असली है और बढ़ रहा है. क्योंकि पहले रोजाना दी जा रही वैक्सीन की 40 लाख खुराक से इस समय ये संख्या घटकर 34 लाख हो गई है. करीब 45 प्रतिशत संक्रमण के मामले ग्रामीण इलाकों में दर्ज किए जा रहे हैं.

एक बार फिर बढ़ते आकंड़े और लोगों की लापरवाही के चलते कोरोना का दायरा बढ़ने लगा है. लेकिन अब हम आपको बताते हैं कि महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में कोरोना केस क्यों बढ़ रहे हैं. दरअसल केरल में कोरोना के अलग-अलग वेरिएंट पाए गए हैं. 24 जून तक 2,390 सैंपल के हुए जीनोम सीक्वेंसिंग के मुताबिक, डेल्टा वेरिएंट के 1482 केस, अल्फा के 642, कप्पा के 197 और बीटा के 65 नये केस मिले. महाराष्ट्र में ज्यादा केस आने का कारण डेल्टा वेरिएंट का अब गांवों में पहुंच जाना है.

नार्थ-ईस्ट में ज्यादा केस आने का कारण, डेल्टा वेरिएंट का वहां देश के दूसरे हिस्सों की तुलना में देर से पहुंचना है जो अब सक्रिय है. नॉर्थ-ईस्ट की हालत लगभग यूरोप की तरह है. जैसे यूरोप में डेल्टा वेरिएंट देर से पहुंचा और अब वहां से ज्यादा केस आ रहे हैं. देश में कोरोना के बढ़ते केस और तीसरी लहर की आहट के बीच. एक और फिक्र बड़ी होती जा रही है, वो है वैक्सीन संकट. देश के कई राज्यों का दावा है कि उसके पास वैक्सीन नहीं है, जिसके कारण टीकाकरण बंद है. वहीं आंकड़े भी बता रहे हैं. कि देश में फिर वैक्सीन की किल्लत हो गई है.

जुलाई में वैक्सीनेशन में आई कमी

21 जून को देश में वायरस पर वैक्सीन के वॉर का नया राउंड शुरू हुआ, तो शाम होते-होते वर्ल्ड रिकॉर्ड बन गया. 85 लाख से ज्यादा लोगों को टीके लगे. तो ऐसा लगा कि भारत की बड़ी आबादी जल्द वैक्सीनेट हो जाएगी और कोरोना कमजोर पड़ जाएगा. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जुलाई के महीने में टीकाकरण की दर में करीब एक तिहाई की कमी आई है. 21-30 जून के बीच वैक्सीनेशन का औसत था- 54.88 लाख प्रतिदिन, जबकि 01-14 जुलाई के बीच का औसत है- 37.63 लाख वैक्सीनेशन रोजाना. मतलब जुलाई में टीकाकरण में 31.43% की कमी आई है.

अब आपको केंद्र सरकार के दावे और वैक्सीन की कमी का खेल समझाते हैं. दरअसल, केंद्र सरकार ने इस साल दिसंबर तक वैक्सीन की 225 करोड़ डोज मिलने का दावा किया था. एक खाका तैयार करके बताया था कि किस महीने किस वैक्सीन की कितनी डोज मिलेंगी. 14 मई को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कोवैक्सीन का जुलाई में उत्पादन 2 करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ डोज़ हो जाएगा. कोविशील्ड के 7.5 करोड़ और स्पुतनिक के 2.08 करोड़ डोज मिलेंगे यानी कुल 17.08 करोड़ खुराक जुलाई में मिलेंगी. लेकिन 26 जून को सुप्रीम कोर्ट में ही सौंपे पूरक हलफनामे में सरकार ने बताया कि जुलाई में कोवैक्सीन की 2 करोड़ डोज ही मिल सकेंगी यानी मई के अनुमान से 5.5 लाख डोज कम.

कोविशील्ड की 2.5 करोड़ डोज ज्यादा यानी कुल 10 करोड़ डोज मिलेंगी. वहीं स्पुतनिक की उपलब्धता नए हलफनामे में स्पष्ट नहीं की गई है. यानी अगर, जुलाई में कोवैक्सीन और कोविशील्ड के प्रोडक्शन को जोड़ दें तो आंकड़ा 12 करोड़ तक पहुंचता है. यानी उत्पादन के लक्ष्य से 5 करोड़ 8 लाख कम. अब यहां गौर करने वाली बात ये है कि स्वास्थ्य मंत्री बदलते ही टीके की उपलब्धता के आंकड़े भी बदल गए. क्योंकि अभी हमने आपको बताया कि 14 मई को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को जुलाई का टारगेट- 17 करोड़ 8 लाख बताया. 23 जून को केंद्र ने कहा कि जुलाई में राज्यों को 22 करोड़ खुराक मिलेंगी. और 14 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा- जुलाई में राज्यों को 13.50 करोड़ डोज ही मिलेंगी.

जुलाई वैक्सीनेशन के लक्ष्य को बदला गया

अब जो जुलाई में वैक्सीनेशन के नये लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, उसका भी गणित समझ लीजिए. 14 जुलाई तक राज्यों को 6.65 करोड़ डोज़ की सप्लाई हो चुकी है. 14 जुलाई तक लोगों को 5.26 करोड़ डोज़ दी जा चुकी है. यानी राज्यों और प्राइवेट अस्पतालों को पास अब सिर्फ 1 करोड़ 40 लाख वैक्सीन बची है. वैक्सीन की कमी के कारण फिर से वैक्सीनेशन सेंटर्स बंद होने लगे हैं. दिल्ली में 14 जुलाई को 500 से ज्यादा वैक्सीनेशन सेंटर बंद कर दिए गए. जिसकी वजह से टीकाकरण में 50 फीसदी कमी आ गई.

आंध्र प्रदेश में पर्याप्त स्टाफ की कमी के कारण अब केवल 45 वर्ष से अधिक आयु के लोग, 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की माताओं और विदेश यात्रा पर जा रहे लोगों के लिए वैक्सीनेशन को प्राथमिकता दी जा रही है. महाराष्ट्र में भी वैक्सीन की कमी का दावा किया जा रहा है. राज्य सरकार ने केंद्र से अगले 3 महीने में प्रतिमाह 3 करोड़ डोज की मांग की है. इनके अलावा, मध्यप्रदेश, झारखंड, राजस्थान, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक सहित कई और राज्यों में से भी वैक्सीन की कमी की खबरें आ रही हैं.

हालांकि स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने ट्विटर के जरिए वैक्सीन संकट और राज्यों से खटपट को संभालने की कोशिश की. राज्यों को सही तरीके से प्लानिंग की नसीहतें दीं. लेकिन कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच जरूरत नसीहतें और सहानुभूति की नहीं बल्कि वैक्सीन प्रोडक्शन बढ़ाने की है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका देकर जल्द से जल्द हर्ड इम्युनिटी तैयार की जा सके और कोरोना को मात दी जा सके. तो आंकड़ों के मुताबिक, अभी देश में वैक्सीन संकट की स्थिति है और तीसरी लहर पर वैज्ञानिकों के बीच बहस जारी है. इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने कोरोना के डेल्टा वेरिएंट को खतरनाक माना है और ये भी कह दिया है कि विश्व में तीसरी लहर शुरुआती दौर में है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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