RSS प्रमुख मोहन भागवत के DNA वाले बयान पर सियासी घमासान, हिंदू-मुस्लिम एकता की बात विपक्ष को क्यों चुभी?

हमारे संविधान की प्रस्तावना में पांच अहम शब्द हैं, जो सत्तर साल से हमें एकता के सूत्र पिरोए हुए हैं. वो हैं- हम, भारत के लोग, भारत को एक सं...
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हमारे संविधान की प्रस्तावना में पांच अहम शब्द हैं, जो सत्तर साल से हमें एकता के सूत्र पिरोए हुए हैं. वो हैं- हम, भारत के लोग, भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न, समाजवादी और पंथनिरपेक्ष और आगे सामाजिक, आर्थिक न्याय बंधुता जैसी तमाम बातें लिखी हैं. कहने का मतलब ये है कि हजारों साल से हम भारत में गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं. भारत और भारतीयता की बात करते हैं. लेकिन जब इसी बात को देश के किसी महत्वपूर्ण पद पर बैठा आदमी बोलता है, तो सियासी नूरा-कुश्ती शुरू हो जाती है.

संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद भी ऐसा ही देखा जा रहा है. आरएसएस प्रमुख ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा था, “हम समान पूर्वजों के वंशज हैं और ये विज्ञान से भी सिद्ध हो चुका है. 40 हजार साल से एक साथ हैं, DNA समान है.” भारतीय कौन हैं, हिंदू कौन हैं, भारतीयता क्या है? इन सवालों पर संघ प्रमुख पहले भी अपना मत साफ कर चुके हैं. पहले भी मोहन भागवत के बयानों पर विवाद हो चुका है, लेकिन जब भी भारतीयता की बात होती है भागवत विवादों की अनदेखी कर अपना मत जरूर रखते हैं.

भारतीय कौन हैं. इस सवाल पर भागवत का ताजा बयान RSS की सोच को और साफ करता है. भागवत का बयान उस दकियानूसी सोच को आईना दिखाता है जो भारतीयता को धर्म और जन्म के खांचे में बांटकर देखती है. भागवत वैज्ञानिक साक्ष्य और ऐतिहासिक तथ्यों के हवाले से बता रहे हैं कि आखिर भारतीय कौन हैं.

वे कहते हैं, “हिंदू-मुसलमान एकता… हमारा तो विचार ऐसा है कि ये शब्द ही बड़ा भ्रामक है. ये दो हैं ही नहीं, एकता की बात क्या है. इनको जोड़ना क्या है, ये जुड़े हुए हैं. हम समान पूर्वजों के वंशज हैं और ये विज्ञान से भी सिद्ध हो चुका है. 40 हजार साल पूर्व से हम भारत के सब लोगों का DNA समान है.”

बाबरी गिराने वालों का डीएनए क्या था- ओवैसी

इसके आगे संघ प्रमुख ने लिंचिंग को लेकर कहा कि इसमें शामिल लोग हिंदुत्व के खिलाफ हैं और लोकतंत्र में हिंदुओं या मुसलमानों का प्रभुत्व नहीं हो सकता है. इस बयान को लेकर AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर निशाना साधा.

ओवैसी ने ट्विटर पर लिखा, “आरएसएस के भागवत ने कहा कि लिंचिंग करने वाले हिंदुत्व विरोधी..इन अपराधियों को गाय और भैंस में फर्क नहीं पता होगा. लेकिन कत्ल करने के लिए जुनैद, अखलाक, पहलू, रकबर, अलीमुद्दीन के नाम ही काफी थे. ये नफरत हिंदुत्व की देन है. इन मुजरिमों को हिंदुत्ववादी सरकार की पुश्त पनाही हासिल है.”

टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में ओवैसी ने भागवत के हिंदू मुस्लिम एका और DNA वाले बयान पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, “6 दिसंबर (1992) को जिन्होंने बाबरी मस्जिद गिराया, क्या डीएनए था उनका. दिल्ली की सड़कों पर सिखों का कत्लेआम किया गया, उनका क्या डीएनए था. आप किसकी आंखों में धूल झोंक रहे हैं. उनके बयान का मकसद तो मैं समझता हूं.”

नवाब मलिक ने बयान का किया स्वागत

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी भागवत के बयान पर पलटवार किया. पहले ट्विटर पर संघ प्रमुख को नसीहतें दीं. फिर मीडिया में भी उनका बयान आया. हालांकि एनसीपी नेता नवाब मलिक ने मोहन भागवत के बयान का स्वागत किया. यानी, भागवत के हिंदू मुस्लिम एकता और DNA वाले बयान को सियासी दल नफा-नुकसान के हिसाब से अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं. लेकिन धर्म और वर्ण के आवरण से अलग संघ प्रमुख वो बात कर रहे हैं जो इतिहास का हिस्सा है. ये मिथ नहीं अतीत का वो सच है जो दस्तावेजों में दर्ज है.

संप्रदाय और धर्म के चश्मे को एक तरफ रखकर जिसने भी भागवत के बयान को परखा उसे यही लगा कि भागवत का बयान ऐतिहासक सच का ही हिस्सा है. यानी, बंद दिमाग और तंग दिल से ना तो बड़ी बातें कही जाती हैं और ना ही उसे समझा जा सकता है. इसलिए जो तथ्य इतिहास में दर्ज है उसे भी कहने और समझने के लिए बड़ा नजरिया और बड़ा दिल होना चाहिए. जब-जब हिंदू और हिंदुत्व का जिक्र हुआ है, RSS ने इसे भारत और भारतीयता के रूप में व्यापक और सर्वमान्य रूप देने की कोशिश की है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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राष्ट्रीय समाचार: RSS प्रमुख मोहन भागवत के DNA वाले बयान पर सियासी घमासान, हिंदू-मुस्लिम एकता की बात विपक्ष को क्यों चुभी?
RSS प्रमुख मोहन भागवत के DNA वाले बयान पर सियासी घमासान, हिंदू-मुस्लिम एकता की बात विपक्ष को क्यों चुभी?
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