साइबर ठगों का कमाल: बाहर ‘Trekknow’ ट्रेवल कंपनी का बोर्ड, अंदर अमेरिकी कस्टम्स का फर्जी दफ्तर, करोड़ों की ठगी का भंडाफोड़

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ज्यों-ज्यों पुलिस पकड़ने के रास्ते तलाशती है त्यों-त्यों साइबर अपराधों के मास्टरमाइंड बचने के फॉर्मूले खोज लाते हैं. उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फिलहाल ऑनलाइन ठगों के एक ऐसे गैंग का भंडाफोड़ किया है जिसके निशाने पर सिर्फ विदेशी होते थे. इस गैंग के मास्टरमाइंड ने ऑनलाइन ठगी के इस बड़े अड्डे के बाहर बोर्ड ‘Trekknow Travel’ के नाम का लगा रखा था. ताकि पुलिस को किसी भी तरह से शक ही न हो. जबकि अंदर अड्डा विदेशियों को ठगने का चल रहा था.

इस अड्डे का खुलासा करने वाली एसटीएफ टीम की मानी जाए तो ऑनलाइन साइबर क्राइम के इस अड्डे के निशाने पर अधिकांश विदेशी ही होते थे. गैंग के ठग खुद को अमेरिकी Customs and Border Protection Office का अधिकारी/प्रतिनिधि बताते थे. ऑनलाइन ठगी का यह अड्डा बीते तीन महीने से उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सहत्रधारा रोड स्थित, आईटी पार्क में एक किराए की इमारत में चल रहा था.

गैंग में 15-16 ठग शामिल

साइबर क्राइम के इस अड्डे का सरगना दिल्ली का गौरव उर्फ गुलशन है. जबकि सीधे तौर पर इस अड्डे के संचालन का कामकाज मैनेजर के रूप में दिल्ली का ही मास्टरमाइंड ठग विजय कर रहा था. इस गैंग में 15-16 ठगों के शामिल होने की बात फिलहाल पता चली है. गैंग लीडर गौरव फिलहाल उत्तराखंड पुलिस की STF के छापे की भनक लगते ही फरार हो गया. उसकी तलाश में राज्य पुलिस की टीमें दिल्ली में भी डेरा डाले हुए हैं. हाल-फिलहाल चार ठगों को मौके से गिरफ्तार किया गया है.

खुद को अमेरिका के कस्टम कर्मचारी बताते  थे ठग

ठग कंपनी के गिरफ्तार जालसाजों का नाम दीपक (ठग कंपनी का आईटी हेड, निवासी उत्तम नगर दिल्ली), 19 हजार रुपए महीने पर नौकरी करने वाला सीमौन (निवासी पालम विहार, दिल्ली), मोनू, महेंद्र नगर, नेपाल  का मूल निवासी और इस ठग कंपनी में 17 हजार रुपए महीने की पगार पर नौकरी करने वाला गगन है. STF के पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ऊपर उल्लिखित तमाम तथ्यों की पुष्टि करते हैं. उत्तराखंड एसपी एसटीएफ के मुताबिक,”यह गैंग खुद को अमेरिका के कस्टम्स और बार्डर प्रोटक्शन डिपार्टमेंट का अफसर/कर्मचारी बताता था.

ठगी के लिए बनाई गई थी दो टीमें

शिकार को जाल में फांसने के लिए लिए गैंग के ठग अमेरिकियों को बताते थे कि उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट आया हुआ है. इससे अमेरिकी घबरा जाता. हड़बड़ाया हुआ अमेरिकी नागरिक जब इन ठगों से बचाव का रास्ता पूछता तो वे, कानूनी सलाहकार उपब्ध कराने के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते थे. यह रकम ऑनलाइन बैंक खातों में ही जमा कराई जाती थी.” एसपी STF कहते हैं कि, “शिकार फांसने का काम गैंग की अलग टीम करती थी. जब शिकार इनकी पहली टीम के झांसे में आ जाता था, तब उससे रकम ऐंठ कर अपने खातों में मंगवाने का धंधा टीम-बी करती थी. ऐसा इसलिए किया जाता था कि, डील के दौरान कहीं पुरानी यानी पहले वाली टीम-ए कोई गल्ती न कर बैठे. जिसके चलते बाद में पता चले कि डील ही फुल-फिल नहीं हो सकी.”

20 लैपटॉप, डेस्कटॉप, मोबाइल और कार हुए बरामद

इस गैंग ने खुद को पुलिस की नजरों से बचाकर रखने के लिए एक ही जगह पर छिपकर रहने का इंतजाम भी किया हुआ था. अधिकांश गैंग मेंबर भाड़े पर लिए गए 11 कमरों में ही रहते थे. यह ठग आम लोगों या फिर पुलिस की नजरों में न आएं, इसके लिए गैंग मेंबर किराए के इन कमरों और ठग कंपनी के अड्डे की बिल्डिंग से बाहर नहीं निकलने दिए जाते थे. स्पेशल टास्क फोर्स के छापे के दौरान इन गिरफ्तार ठगों की निशानदेही पर पुलिस को 20 लैपटॉप, 2 डेस्कटॉप, 3 मोबाइल फोन और एक I-20 कार भी मिली है.

आईटी हेड टीम के पते से रहता था अलग

पता चला है कि ठग कंपनी का आईटी हेड सिमन, दीपक देहरादून के DIT कॉलेज के पास स्थित इंपीरियल हाईट में रह रहे थे. जबकि गिरोह का सरगना गौरव उर्फ गुलशन खुद को गैंग के बाकी ठगों से एकदम अलग पैसिफिक हिल स्थित फ्लैट में रखता था. ताकि पुलिस रेड के दौरान वो बाकी ठग साथियों के साथ न पकड़ा जा सके. हुआ भी वही कि पुलिस छापे में गौरव इस बार साफ बच निकलने में कामयाब रहा.

अमेरिकी ठग भी मिले हुए हैं

STF के अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार ठगों ने अमेरिकियों को ठगने के और भी कई फार्मूलों के बारे में खुलासा किया है. मसलन, इन गिरोह के ठगों को जिस अमेरिकी नागरिक को भी शिकार बनाना होता था, उससे वे कॉल करके यह भी कहते थे कि, वो ड्रग्स और व अन्य गैर-कानूनी यानी प्रतिबंधित सामानों की डिलीवरी में भी लिप्त पाया गया है. इससे भी फोन लाइन पर दूसरी ओर मौजूद शिकार बहुत जल्दी हड़बड़ा जाता था. लिहाजा अमेरिकी नागरिक के हड़बड़ाने की गति से यह जालसाज अंदाजा लगा लेते थे कि, वो इनके जाल में फंसेगा या नहीं. एसपी एसटीएफ अजय सिंह आगे कहते हैं कि, अमेरिका में मौजूद वहां के कुछ साइबर फ्रॉडेस्टर्स, इन ऑनलाइन साइबर अपराधियों को शिकार की गोपनीय जानकारियां उपलब्ध करवाते थे. इसके बदले में यह ठग कंपनी उन्हें मोटा कमीशन देती थी.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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