Fikr Aapki: ISIS खुरासान की मदद कर पाकिस्तान बना रहा उसे ताकतवर, तालिबानी हुकूमत के बाद अफगानिस्तान की जेलों से आतंकी रिहा

तालिबान में ज्यादातर लड़ाके पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकों से होते हैं, लेकिन इन्हें सपोर्ट पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से...
Isis K 1

तालिबान में ज्यादातर लड़ाके पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा से सटे इलाकों से होते हैं, लेकिन इन्हें सपोर्ट पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से भी होता है. पर्दे के पीछे से ये सपोर्ट पाकिस्तान की हुकूमत और फौज देती है, लेकिन उसी इस्लामाबाद की मस्जिदों में तालिबान, अलकायदा और ISIS जैसे संगठनों को खुलेआम सपोर्ट किया जाता है. तालिबान हो या ISIS दोनों को पाकिस्तान से सलाह मिलती है. ये बात खुद इस्लामाबाद की लाल मस्जिद के मौलवी मौलाना अब्दुल अजीज ने कही है, जिन्होंने पाकिस्तानी मीडिया में खुलेआम बयान दिया है और कुबूल किया है कि जब तालिबान और ISIS को उनकी गलतियों पर समझाया जाता है कि दोनों एक दूसरे के खिलाफ ना बोलें.

लाल मस्जिद के मौलवी ने मजहब की आड़ में आतंकवादियों को बचाव किया है. उन्होंने आतंकवादियों के समर्थन में खुलकर बयान दिया है. मौलाना अब्दुल अजीज ने कहा है कि कुरान तो खुद आतंकवादी बनने के लिए कहता है. उन्होंने कहा है कि कुरान का हुक्म है अल्लाह के दुश्मनों के खिलाफ आतंकवादी बनो. ये सिर्फ पाकिस्तान के एक बड़े मौलाना की सोच नहीं है बल्कि सरहद पार बैठे हर धर्म गुरु, हर नेता और हर फौजी जनरल की सोच है. इसी सोच के चलते पाकिस्तान आतंक के आकाओं और उनके संपोलों को पालता-पोसता है और यही वजह है कि कहीं भी आतंकवादी हमला हो, उसमें पाकिस्तान का किसी न किसी तरह से हाथ जरूर होता है.

काबुल एयरपोर्ट पर फिदायीन हमले की जड़ भी पाकिस्तान में ही मिली है. ISIS-K का चीफ असलम फारूकी उर्फ मावलावी अब्दुल्ला है, जो एक पाकिस्तानी नागरिक है और वो खैबरपख्तूनख्वा प्रांत के ओराकजई का रहने वाला है. वो आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के लिए भी काम कर चुका है. साथ ही वो तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान में भी था. उसे पिछले साल उसे चार साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था. पूछताछ में उसने कबूल किया था कि ISIS-K की जड़ें पाकिस्तान के रावलपिंडी में ही हैं.

तालिबानी हुकूमत होने के बाद सभी जेलों से आतंकी रिहा

फारूकी को बगराम जेल में कैद करके रखा गया था, लेकिन अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत होने के बाद सभी जेलों से आतंकियों को रिहा कर दिया गया और उनमें असलम फारूकी भी शामिल था. बताया जा रहा है कि रिहाई के बाद फारूकी के इशारे पर उसकी देखरेख में काबुल एयरपोर्ट पर अटैक किया गया. ISIS-K चीफ असलम फारूकी ये भी कबूल कर चुका है कि आतंकी साजिशों को काबुल और जलालाबाद में हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर अंजाम दिया जाता है. वो हक्कानी नेटवर्क, जिसके पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI का दिमाग और पैसा लगा है. इससे साफ हो जाता है कि काबुल में हुए आत्मघाती धमाके में पाकिस्तान का हाथ है.

यही बात अफगानिस्तान के उप-राष्ट्रपति रहे अमरुल्ला सालेह ने भी कही है. उन्होंने दुनिया के सामने दुश्मन दिखने वाले तालिबान और ISIS पर उन्होंने मिलीभगत का भी आरोप लगाया. सालेह ने ट्वीट में लिखा कि हमारे पास अभी जो भी सबूत हैं, उनसे पता चलता है कि ISIS-K की जड़ें तालिबान और खासतौर पर हक्कानी नेटवर्क से जुड़ी हैं, जो अभी काबुल में सक्रिय हैं. तालिबानी ISIS के साथ अपने संबंधों को खारिज करते हैं, लेकिन ये कुछ उसी तरह है, जैसे पाकिस्तान आतंकी संगठन क्वेटा शूरा के लिए करता है. तालिबान ने अपने मालिक (पाकिस्तान) से बहुत कुछ सीख लिया है. ये सब कुछ दुनिया देख रही है, जान रही है और हर बार की तरह पाकिस्तान अपनी पाली पोसी आतंकी जमातों के खूनी करतूतों को घड़ियाली आंसुओं से धोने में जुट गया है. एक ओर अफगानिस्तान में आतंक के हाथ मजबूत कर रहा है, तो दूसरी ओर गृह युद्ध की चिंता जता रहा है.

ISIS खुरासान की मदद कर उसे ताकतवर बना रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान के पाखंड और षडयंत्रों को पूरी दुनिया जानती है और उन्हीं षडयंत्रों में से एक है ISIS खुरासान की मदद करना और उसे ताकतवर बनाना. साथ ही उसके पीछे एक बड़ी वजह है कश्मीर. दरअसल खुरासान प्राचीन समय में मध्य एशिया का ऐतिहासिक क्षेत्र था, जिसमें आज का ईरान, उज्बेकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आता था, लेकिन ISIS ने अपने आतंकी मंसूबों को आगे बढ़ाते हुए हिंदुस्तान को भी टारगेट कर लिया और इसमें भी जम्मू कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के इलाके हैं.

पाकिस्तान भले ही अफगानिस्तान को लेकर चिंता जता रहा हो, लेकिन हकीकत ये है कि ये सब कुछ पाकिस्तान के पाखंड और षडयंत्रों का नतीजा है, जिसकी वजह से अफगानिस्तान लहूलुहान हो रहा है. काबुल ब्लास्ट के बाद जो तस्वीरें आई, वो खौफ भर देने वाली थी. एयरपोर्ट पर चारों तरफ सिर्फ खून ही खून था. चीख-पुकार, मौत और मातम का ही आलम था. ब्लास्ट के बाद खून से लाल काबुल में इंसानियत तड़पती रही. काबुल मौत का दरिया बन गया. एक तरफ ISIS के आत्मघाती धमाके तो दूसरी तरफ तालिबानी आतंकियों की बरसती गोलियां. खौफ की इन खाइयों के बीच फंसे काबुल के लोग जान बचाकर भागते रहे और ये भागमभाग पूरी रात चलती रही. काबुल की ये रात डर की रात थी. कैसी थी ये रात और कैसा था वो बारूदी मंजर, हम आपको तस्वीरों और चश्मदीदों की जुबानी सुनाते हैं.

काबुल एयरपोर्ट के पास का कैनाल खून से हुआ लाल 

24 घंटे पहले काबुल से आने वाली तस्वीरें दहला देने वाली थीं. एक के बाद एक 7 आत्मघाती धमाकों से काबुल थर्रा उठा. देखते ही देखते सब उजड़ गया. आत्मघाती धमाकों से दर्दनाक चीखें निकल पड़ी. उस वक्त चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ बदहवासी थी. इंसानियत के दुश्मनों ने काबुल को श्मशान बना दिया. चारों तरफ मौत की निशानियां बिखर गईं. सीरियल आतंकी हमलों के बाद काबुल एयरपोर्ट के पास का कैनाल खून से लाल हो गया. इंसानियत के दुश्मनों ने इस नाले में लाशों का ढेर लगा दिया. कितनी मांओं की कोख उजाड़ दी, कितने कितने बच्चों को अनाथ कर दिया, कितने पिताओं से उनके परिवार छीन लिए, जो बच गए वो एक दूसरे का सहारा लेकर जाते दिखे. काबुल के अस्पतालों के बाहर घायलों की भीड़ लग गई. अस्पतालों में खून की कमी पड़ गई.

कई चश्मदीदों ने वो बारूदी मंजर देखा. आप उन चश्मदीदों की आंखों देखी गवाही सुनकर सिहर जाएंगे. एक ने कहा कि मैं उन्हीं हजारों लोगों के बीच खड़ा था जो एयरपोर्ट गेट के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. शाम 5 बजे एक बहुत तेज धमाका हुआ. मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे नीचे से जमीन खींच ली हो, एक पल को ऐसा लगा जैसे मेरे कान के पर्दे फट गए हों, मैं कुछ समय के लिए सुनने की क्षमता खो चुका था. मैंने कई शरीरों को हवा में उड़ते देखा, शरीर के टुकड़ों को हवा में उड़ते देखा. जैसे तूफान में पॉलीबैग या कागज का टुकड़ा उड़ता है. मैंने वहीं डेड बॉडीज देखीं, शरीर के चीथड़े, बच्चे, महिलाएं, बुजुर्गों के शव बिखरे पड़े थे. जिंदगी में कयामत का दिन देखना असंभव है, लेकिन आज मैंने अपनी आंखों से कयामत देखी.

काबुल एयरपोर्ट पर हुए धमाके में सैकड़ों परिवार खत्म 

एयरपोर्ट पर हुए धमाके में सैकड़ों परिवार खत्म हो गए, इन्हीं में से एक है डॉक्टर खालिद रहीम का परिवार. एयरपोर्ट पर अब्बे गेट के पास हुए ब्लास्ट में तीनों की मौत हो गई. धमाके के बाद काबुल एयरपोर्ट पर मौत की ऐसी दहशत दिखी की हजारों लोग जान बचाने के लिए बेतहाशा भागने लगे. साथ में छोटे-छोटे बच्चे थे. गोद में दुधमुंहे मासूम थे. उनके मां-बाप को सबसे ज्यादा चिंता अपने बच्चों की सलामती की थी. ये लोग अपनी सलामती के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे, लेकिन धमाके ने बदहवास कर दिया और ये बदहवासी पूरी रात दिखी. रात का डर लोगों के दिलों दिमाग पर छाया था. जिस कैनाल का रंग खून से लाल हो गया, जहां लाशें पटी थी उसी कैनाल में लोग जान बचाने के लिए रात के अंधेरे में उतरे. अमेरिका और NATO के फौजियों ने एयरपोर्ट पर इमरजेंसी का अलार्म बजा दिया था. लिहाजा खुद को बचाने के लिए अफगानी हर हद पार करने को तैयार थे.

इस भगदड़ की वजह से कई मासूम लापता हो गए, जिनका कोई अता-पता नहीं है. मीना और मसीद उन्हीं लापता बच्चों में हैं. किसी को नहीं पता कि अब ये जिंदा हैं भी या नहीं. इन बच्चों के परिवार वाले फौज से मदद की गुहार लगा रहे हैं. गिड़गिड़ा रहे हैं कि मीना और मसीद की जानकारी मिले तो बताएं. धमाके के शिकार हुए ऐसे सैकड़ों बदनसीब परिवार हैं, जिनके अपने कहां है उन्हें नहीं पता हैं. पिछले 24 घंटे में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल यहां के लोगों के लिए अभिशाप बन गई है. यहां ना तो जिंदगी अलग है, ना मौत. जिंदा रहना भी मौत के समान है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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