जानिए आखिर क्‍यों 15000 करोड़ रुपए खर्च कर सेना खरीदेगी देश में बने ये खतरनाक हथियार

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सेना ने देश में बने वेपन सिस्‍टम को खरीदने का बड़ा फैसला किया है. सेना की तरफ से मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के मकसद से देश में बनी आकाश मिसाइल और अल्‍ट्रा लाइट हेलीकॉप्‍टर्स (ALH) ध्रुव को खरीदने के लिए एक प्रस्‍ताव भेजा गया है. सूत्रों की मानें तो सेना की तरफ से 15000 करोड़ रुपए का प्रपोजल भेजा गया है. जहां आकाश मिसाइल दूसरे देशों को निर्यात की जाएगी तो ध्रुव हेलीकॉप्‍टर को हिन्‍दुस्‍तान एयरोनॉटिक्‍स लिमिटेड की श्रेष्‍ठता की मिसाल माना जाता है.

15,000 करोड़ रुपए का प्रस्‍ताव

सूत्रों की मानें तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व वाली रक्षा अधिग्रहण काउंसिल जल्द ही एयर डिफेंस के लिए आकाश मिलाइलों की दो रेजीमेंट्स और 25 एएलएच हेलीकॉप्‍टर की खरीद के प्रस्ताव पर मंजूरी दे सकती है. ये हेलीकॉप्‍टर आर्मी की एविएशन विंग को सौंपे जाएंगे. बताया जा रहा है कि ये दो प्रोजेक्ट्स करीब 15000 करोड़ रुपए के हैं. माना जा रहा है कि इससे देश की सीमाओं की रक्षा करने की भारतीय सेना की क्षमता को बढ़ावा मिलेगा.

नया वर्जन खरीदेगी आर्मी

सेना आकाश मिसाइल के नए वेरिएंट को आकाश-एस को खरीदने की योजना बना रही है. इनमें लगे नए स्वदेशी सीकर दुश्मन के विमानों और क्रूज मिसाइलों को 25-30 किलोमीटर तक की दूरी तक एक्यूरेसी के साथ टारगेट कर सकते हैं. ये मिसाइलें लद्दाख जैसे अत्यधिक ठंड के मौसम में दुश्मनों को जवाब देने में सक्षम हैं. ऐसे में ये आकाश-एस मिसाइल चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर पहाड़ी और अन्य क्षेत्रों में भारतीय सेना की सभी जरूरतों को पूरा करेंगी.

DRDO ने बनाई है आकाश मिसाइल

आकाश मिसाइल को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है. अभी इसका इस्तेमाल भारतीय सेनाओं द्वारा किया जा रहा है. लेकिन अब इसके अपग्रेड वर्जन को खरीदने की योजना है. DRDO ने हाल ही में आकाश मिसाइल प्रणालियों के आकाश-नई पीढ़ी के संस्करण का भी परीक्षण किया है. इसका इस्तेमाल कर सैनिक दुश्मनों के अधिक दूरी पर स्थित ठिकानों पर टारगेट कर सकते हैं. इन्हें उत्तरी सीमाओं पर बहुत अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से भी संचालित किया जा सकता है.

2014 में हुई वायुसेना में शामिल

आकाश मिसाइल को भारतीय वायुसेना में सन् 2014 में और सेना में 2015 में शामिल किया गया था. इसकी रेंज 25 किलोमीटर है. इसकी वजह से ही यह हेलीकॉप्‍टर्स, फाइटर जेट्स और ड्रोन को कई संवेदनशील संस्‍थानों पर हमला करने में मदद करती है. इस मिसाइल के 96 प्रतिशत तक सिस्‍टम पूरी तरह से देश में तैयार हैं. मिसाइल ग्रुप मोड या फिर ऑटोनोमस मोड में एक साथ कई टारगेट्स को निशाना बना सकती है. आकाश मिसाइल बिल्‍ट-इन-इलेक्‍ट्रानिक काउंटर-काउंटर मेजर्स (ईसीसीएम) फीचर्स से लैस है. इस पूरे सिस्‍टम को मोबाइल प्‍लेटफॉर्म पर कनफिगर किया जा चुका है.

साल 1992 में आया ध्रुव

एएलएच ध्रुव ने पहली बार साल 1992 में उड़ान भरी थी. उसके बाद से यह भारतीय सेना के लिए हर स्तर पर मददगार साबित हुआ है. इसकी खूबियां इसे बाकी हेलीकॉप्‍टर्स से बहुत अलग बनाती हैं. फिलहाल इस हेलीकॉप्‍टर का प्रयोग सेना और वायु सेना दोनों अधिकतम ऊंचाई वाली जगहों पर अपने अभियानों में कर रहे हैं.

ध्रुव की खासियत है कि इसके जरिए हथियार और बाकी सामान उन ऊंचाईयों वाली जगहों पर ले जाए जा सकते हैं जहां बाकी हेलीकॉर्प्‍स उड़ान भरने में सक्षम नहीं हैं. लद्दाख सेक्टर में इस तरह के 20 से ज्यादा हेलीकॉप्‍टर सेना की मदद कर रहे हैं.

सर्दी का मौसम में लद्दाख में तापमान शून्य से नीचे चला जाता है और इस तरह के मौसम में भी ध्रुव पेलोड ले जाने में सक्षम है. फिलहाल एचएएल सेना के लिए 41 हेलीकॉप्‍टर, इंडियन नेवी के लिए 16 और भारतीय तटरक्षक बल के लिए 16 हेलीकॉप्‍टर्स को तैयार कर रहा है. जहां 38 हेलीकॉप्‍टर्स का प्रोडक्‍शन पहले ही हो चुका है तो बाकी हेलीकॉप्‍टर्स भी साल 2022 तक तैयार हो जाएंगे.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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जानिए आखिर क्‍यों 15000 करोड़ रुपए खर्च कर सेना खरीदेगी देश में बने ये खतरनाक हथियार
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