बहादुर शाह जफर के बेटों को उन्हीं के आंखों के सामने मार दी गई गोली, दिल्ली पर अंग्रेजों के कब्जे के बाद जानिए कैसे कमजोर पड़ी 1857 की क्रांति

मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का जिक्र आते ही उनकी उर्दू शायरी और हिंदुस्तान से उनकी मोहब्बत की भी बात होती है. कहने को तो वह 1837 में बादशाह ...
revolt of 1857

मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर का जिक्र आते ही उनकी उर्दू शायरी और हिंदुस्तान से उनकी मोहब्बत की भी बात होती है. कहने को तो वह 1837 में बादशाह बनाए गए, लेकिन तब तक देश के काफी बड़े इलाके पर अंग्रेजों का कब्जा हो चुका था. सल्तनत के नाम पर उनके पास कुछ ही इलाके बचे थे. 1857 में क्रांति (Revolution of 1857) की चिंगारी भड़की तो सभी विद्रोही सैनिकों और राजा-महाराजाओं ने उन्हें हिंदुस्तान का सम्राट माना और उन्होंने भी अंग्रेजों को खदेड़ने का आह्वान किया, लेकिन 82 बरस के बूढ़े बहादुर शाह जफर की अगुवाई में लड़ी गई यह लड़ाई कुछ ही दिन चल सकी.

20 सितंबर 1857 को अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर (Badshah Bahadur Shah Zafar) को आत्मसमर्पण करना पड़ा था और उन्हें ब्रिटिश मेजर होसॉन ने पकड़ लिया था. दरअसल, मई 1857 में आजादी की पहली लड़ाई शुरू हुई थी जिसके बाद अंग्रेजों ने मौजूदा पुरानी दिल्ली जिसे वॉल्ड सिटी भी कहते हैं, उसकी तीन महीने तक घेराबंदी की थी. 14 सितंबर को ब्रिटिश फौजों की जीत हुई थी तथा शहर पर उनका कब्जा हो गया था और 17 सितंबर को बहादुर शाह जफर को लाल किला छोड़ना पड़ा था. जबकि 20 सितंबर को उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था.

21 सितंबर को हुई थी बहादुर शाह जफर की गिरफ्तारी

20 सितंबर को ही अंग्रेजों ने दिल्ली पर फिर से अपना कब्जा स्थापित किया था और बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को भी इसी दिन उन्हीं के आंखों के सामने गोली मार दी गई थी. जबकि 21 सितंबर को अंग्रेजों ने बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर उन पर मुकदमा चलाया गया था. इसके बाद उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. ब्रिटिश शासन (British Rule) के खिलाफ मंगल पांडे ने ही 1857 की क्रांति (1857 Revolt) का आगाज किया था.

मंगल पांडे ने उठाई थी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज

मंगल पांडे (Mangal Pandey) वो पहले शख्स थे, जिसने न केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई, बल्कि अंग्रेजों की साख तक को हिलाकर रख दिया था. वैसे तो मंगल पांडे सैनिक के तौर पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (East India Company) में भर्ती हुए थे, मगर जब उन्होंने देखा कि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी भारतीयों को खूब प्रताड़ित करती है, तो उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उनके अंदर ब्रिटिश राज के खिलाफ इतना गुस्सा था कि उन्होंने विद्रोह कर दिया. कहा जाता है 1857 के विद्रोह के पीछे वो अफवाह भी थी, जिसमें कहा गया था कि बड़ी संख्या में यूरोपीय सैनिक हिंदुस्तानी सैनिकों को मारने आ रहे हैं.

इतिहास में 20 सितंबर की तारीख में दर्ज कई ऐसी ही घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा:

1388: दिल्ली के सुल्तान फिरोज तुगलक तृतीय का निधन.

1831: भाप से चलने वाली पहली बस बनाई गयी.

1856: भारत के महान संत और समाज सुधारक श्री नारायण गुरु का जन्म.

1857: अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर ने आत्मसमर्पण किया. कैदी बनाकर लाल किले लाए गए.

1878: मद्रास के अखबार द हिंदू के साप्ताहिक संस्करण का प्रकाशन शुरू हुआ था.

1933: सामाजिक कार्यकर्ता और भारत की स्वतंत्रता के लिए कार्य करने वाली अंग्रेज महिला एनी बेसेंट का निधन.

1942: भारतीय महिला स्वतंत्रता सेनानी कनकलता बरुआ का निधन.

1999: तमिल सिनेमा की स्वप्न सुंदरी के नाम से प्रसिद्ध अभिनेत्री राजकुमारी का निधन. उनकी फिल्म हरिदास 114 सप्ताह तक चेन्नई के सिनेमाघर में चली थी.

2001: अमेरिका ने 150 लड़ाकू विमान खाड़ी में उतारे.

2006: ब्रिटेन के रॉयल बॉटैनिक गार्डन्स के वैज्ञानिकों को 200 साल पुराने बीज उगाने में कामयाबी मिली.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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बहादुर शाह जफर के बेटों को उन्हीं के आंखों के सामने मार दी गई गोली, दिल्ली पर अंग्रेजों के कब्जे के बाद जानिए कैसे कमजोर पड़ी 1857 की क्रांति
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