उलझते जा रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के रहस्‍य, पुलिस की रडार पर 7 किरदार, आखिर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से क्‍यों नहीं सुलझी मौत की गुत्‍थी?

महंत नरेंद्र गिरि ब्रह्मलीन हो गए. लेकिन उनकी मौत का रहस्य गहराता जा रहा है. इस सिलसिले में आज पुलिस ने उनके पूर्व शिष्य आनंद गिरि और बड़े ...
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महंत नरेंद्र गिरि ब्रह्मलीन हो गए. लेकिन उनकी मौत का रहस्य गहराता जा रहा है. इस सिलसिले में आज पुलिस ने उनके पूर्व शिष्य आनंद गिरि और बड़े हनुमान के मुख्य पुजारी आद्या तिवारी को आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की. इनसे करीब सत्तर सवाल पूछे. इसके बाद शाम करीब पौने चार बजे दोनों आरोपियों को सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट के बाहर वकीलों की भारी भीड़ थी. जिसके कारण बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो आनंद गिरि और आद्या तिवारी को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

इस बीच SIT ने आद्या तिवारी के बेटे और इस केस के तीसरे आरोपी संदीप को भी गिरफ्तार कर लिया. बहरहाल, जानिए कि करीब दो दिन की जांच के बाद यूपी पुलिस महंत मौत मिस्ट्री, कहां तक सुलझा पाई है?

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और निरंजनी अखाड़ा के सचिव महंत नरेंद्र गिरि शान से जीते रहे और शान से चिर समाधि में लीन हो गए. महंत नरेंद्र गिरि ब्रह्मलीन हो गए. अनंत यात्रा पर चले गए लेकिन पीछे छोड़ गए अनसुलझे सवालों की लंबी फेहरिस्त. पीछे छोड़ गए मौत की मिस्ट्री, जिसमें कई राज हैं. कई किरदार हैं. कई पेच हैं.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से क्यों नहीं सुलझी मौत की गुत्थी?

पेच ये कि आखिर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से क्यों नहीं सुलझी मौत की गुत्थी? सुसाइड नोट में आरोपियों के नाम फिर गनर से पूछताछ क्यों? महंत के कथित सुसाइड नोट में किस लड़की का जिक्र? आखिर, कब सुलझेगी महंत नरेंद्र गिरि की मौत मिस्ट्री?

पुलिस के रडार पर सात किरदार

50 घंटे से ज्यादा बीत गए लेकिन महंत की मौत के गहरे रहस्य के तार सुलझ नहीं पाए हैं. फिलहाल पुलिस के रडार पर सात किरदार हैं.

पहला- नरेंद्र गिरि के पूर्व शिष्य आनंद गिरि
दूसरा – लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी
तीसरा – आद्या तिवारी के बेटे संदीप तिवारी
इन तीनों का नाम कथित सुसाइड लेटर में लिखा है. कथित सुसाइड नोट में महंत की मौत के लिए इन्हें जिम्मेदार बताया गया.
पुलिस के रडार पर चौथे किरदार हैं महंत नरेंद्र गिरि के गनर अजय सिंह.
इनके अलावा एडिशनल एसपी ओम प्रकाश पांडे, बीजेपी के नेता सुशील मिश्रा और समाजवादी पार्टी के नेता इंदु प्रकाश मिश्रा भी पुलिस की जांच के दायरे में हैं.

इनमें से तीन आरोपी आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी पुलिस की गिरफ्त में है. आनंद गिरि से प्रयागराज पुलिस लाइन में लंबी पूछताछ हुई है. DIG से लेकर ADG तक ने आनंद से 12 घंटे तक पूछताछ की. आनंद को महंत नरेंद्र गिरि का कथित सुसाइड लेटर भी दिखाया गया. सूत्र बताते हैं कि पूछताछ के दौरान ही आनंद ने खुद को पाक साफ बताया और साजिश में नरेंद्र गिरि के गनर अजय का नाम बताया.

नरेंद्र गिरि के गनर से भी पूछताछ

जिसके बाद पुलिस ने गनर अजय सिंह को हिरासत में लिया और बाकी तीन गनर मनीष शुक्ला, अभिषेक मिश्रा और विवेक मिश्रा से भी पुलिस लाइन में पूछताछ की गई. बताया जाता है कि जांच के दौरान महंत नरेंद्र गिरि की सुरक्षा में तैनात गनर्स की लापरवाही पाई गई है. उनके खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया गया क्योंकि नियम के मुताबिक महंत के सोते समय भी एक पुलिसकर्मी उनके कमरे के बाहर रहना चाहिए था.

यहां दो उलझे हुए पेच दिख रहे हैं. पहला- महंत नरेंद्र गिरि जब हर रोज़ अपने कमरे में विश्राम करते थे, तो 20 सितंबर को गेस्ट हाउस में विश्राम करने क्यों गए? दूसरा- विश्राम करने के वक्त उनके कमरे के बाहर कोई सुरक्षाकर्मी तैनात क्यों नहीं था?
हमारी पड़ताल के दौरान तो पता यहां तक चला कि महंत का मेन गनर अजय सिंह करीब एक हफ्ते से प्रयागराज में नहीं था.

अब यहां टाइमिंग पर गौर कीजिए. महंत की मौत के अगले दिन, मिस्ट्री से जुड़े पेंच खोले जा रहे थे. गुत्थी सुलझाई जा रही थी. तभी महंत नरेंद्र गिरि का कथित सुसाइड नोट सामने आया. जिसमें लड़की के नाम पर आनंद गिरि के ब्लैकमेल करने का जिक्र है. हालांकि आनंद गिरि पहले ही दिन से सुसाइड लेटर को फर्जी बता रहे हैं. महंत की मौत को षडयंत्र कह रहे हैं. क्योंकि आनंद के मुताबिक महंत लिखना पढ़ना नहीं जानते थे. कई और लोग भी इस सुसाइड लेटर पर सवाल उठा चुके हैं. क्योंकि इसमें सबसे पहले तो तारीख काटी गई है. कुल 41 जगह लिखकर काटा गया है. इसके अलावा गौर करने वाली बात ये भी है कि इसमें नरेंद्र गिरि के सभी सिग्नेचर एक से नहीं दिखते हैं.

ब्लैकमेलिंग के एंगल पर चल रही है जांच

महंत सुसाइड को लेकर सस्पेंस एक वीडियो को लेकर भी बना हुआ है. बताया जाता है कि महंत नरेंद्र गिरि के मोबाइल से पुलिस को एक वीडियो मिला है. इसके अलावा ये भी कहा जा रहा है कि एक वीडियो के जरिए आनंद गिरि, महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल कर रहा था. बहरहाल, महंत की मौत का सच जांच के बाद ही सामने आएगा लेकिन फिलहाल पोस्मार्टम रिपोर्ट के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि की मौत फांसी के कारण दम घुटने से हुई. यानी फांसी के फंदे ने महंत नरेंद्र गिरी की जान ले ली.

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पोस्टमार्टम की इनिशियल फाइंडिंग के बाद ये बात साफ हो चुकी है कि मौत की वजह फांसी ही है. लेकिन अब तफ़्तीश फांसी यानी खुदकुशी की वजह पर हो रही है. अब जांच ब्लैकमेलिंग के एंगल पर हो रही है. आखिर अगर कोई फोटो है जिसके जरिए उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था तो वो फोटो कहां है? किसके पास है? इसको लेकर आनंद गिरि से पूछताछ की गई लेकिन उसने फोटो की बात से इनकार कर दिया.

वीडियो शूट करने वाले शिष्‍ट का भी बयान होगा दर्ज

महंत नरेंद्र गिरि के मोबाइल फोन से मिले वीडियो में भी वहीं बातें रिकॉर्ड हैं जो सुसाइड नोट में लिखी हैं. पुलिस अब महंत के उस शिष्य के बयान दर्ज करेगी. जिससे ये वीडियो शूट करवाया गया था. इसके अलावा पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से सल्फास की गोलियां जब्त की हैं. महंत ने सल्फास की गोलियां एक शिष्य से मंगवाई थी. बताया जाता है कि 13 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि सल्फास की गोलियां खाकर आत्महत्या करना चाहते थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरी की मौत का समय 20 सितंबर को दोपहर 3 से 4 बजे के बीच का है. रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि महंत के शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान नहीं हैं. सूत्र बताते हैं कि आनंद गिरि ने बताया है कि मई में गुरु नरेंद्र गिरि से समझौता हो जाने के बावजूद दोनों में दूरियां थीं.

पुलिस CDR यानी कॉल डिटेल रिपोर्ट को जांच रही है कि क्या आनंद गिरि सच बोल रहा है? पुलिस ने महंत के सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है. मौके से महंत नरेन्द्र गिरि के लिखे कई दस्तावेज भी मिले हैं. जिन्हें कब्जे में लेकर हैंड राइटिंग एक्सपर्ट को सौंपा गया है.

रिपोर्ट आने के बाद साफ होगा कि सुसाइड नोट नरेंद्र गिरि ने खुद लिखा या किसी और से लिखवाया था. महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में गिरफ्तार आनंद गिरि की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. आज हरिद्वार में युवा भारत साधु समाज ने इन्हें अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया.

अब बात महंत के दूसरे शिष्य बलबीर गिरि की करते हैं. इस केस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, शक की सुई बलबीर गिरि की तरफ भी घूमती जा रही है. यही वो बलवीर गिरि हैं, जिनके नाम महंत नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट में वसीयतनामा लिखा है. लेकिन महंत की मौत की जांच आगे बढ़ी तो बलवीर भी सवालों के घेरे में आ गए. दरअसल, कल नरेंद्र गिरि के कथित सुसाइड नोट को देखकर बलवीर ने कहा था कि ये गुरुजी की ही राइटिंग है और वो अगले महंत बनने के लिए तैयार हैं. लेकिन 24 घंटे के अंदर ही वो बयान से पलट गए. आज टीवी9 भारतवर्ष से EXCLUSIVE बातचीत में बलवीर गिरि ने कहा कि वो गुरुजी की राइटिंग को नहीं पहचानते. वहीं महंत बनने के सवाल पर कहा कि इसका फैसला पंच परमेश्वर करेंगे.

बलवीर ने भी बदले अपने बयान

मतलब 24 घंटे में बलवीर के बोल बदल गए. उधर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरिगिरि ने बलबीर गिरि को महंत नरेंद्र गिरि का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया. वहीं जिस निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र गिरि थे, उस अखाड़े के सर्वेसर्वा रविंद्र पुरी ने कहा कि महंत का सुसाइड नोट फर्जी है और बलबीर उनके उत्तराधिकारी नहीं हैं. यहां ये जानना भी जरूरी है कि आखिर बलवीर गिरि कौन हैं और महंत नरेंद्र गिरि से इनका कैसा रिश्ता था?

बलवीर वर्ष 1998 में निरंजनी अखाड़े के संपर्क में आए. वर्ष 2001 में इनका संपर्क महंत नरेंद्र गिरि से हुआ. तब नरेंद्र गिरि अखाड़े के कारोबारी महंत थे. महंत नरेंद्र गिरि के संपर्क में आते ही उनसे दीक्षा लेकर बलवीर उनके शिष्य बन गए. नरेंद्र गिरि जब बाघम्बरी गद्दी के पीठाधीश्वर बन कर प्रयागराज पहुंचे तो बलवीर भी उनके साथ चले गए. महंत नरेंद्र गिरि ने बलबीर गिरि को हरिद्वार आश्रम का प्रभारी बनाया हुआ था. किसी भी प्रमुख वार्ता या आयोजन में भी ये महंत के साथ रहते थे. यहां तक कि कुंभ के आयोजन की देखरेख का जिम्मा भी महंत बलवीर को ही देते थे.

लेकिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत के बाद सुसाइड नोट से लेकर उत्तराधिकार तक बलबीर पर सवाल खड़े हो रहे हैं. बहुत मुमकिन है कि पुलिस इनसे भी पूछताछ कर सकती है.

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