CDS बिपिन रावत के बयान से विदेश मंत्री एस जयशंकर असहमत, कहा- सभ्यताओं के टकराव को भारत नहीं मानता

सीडीएस बिपिन रावत ( CDS Bipin Rawat ) के बयान के एक दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर( S Jaishankar ) ने उनके बयान से दूरी बनाते हुए हुए अपने ...
S Jaishankar Wang Yi

सीडीएस बिपिन रावत (CDS Bipin Rawat) के बयान के एक दिन बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर(S Jaishankar) ने उनके बयान से दूरी बनाते हुए हुए अपने चीनी समकक्ष से कहा कि भारत ने कभी भी सभ्यताओं के टकराव का समर्थन नहीं किया है. दरअसल चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत ने चीन के इस्लामिक देशों से बढ़ते रिश्तों की तुलना के लिए सभ्यताओं के टकराव के सिद्धांत का जिक्र किया था. ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की समिट से पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी को कहा कि एशियाई एकजुटता भारत-चीन संबंधों के निर्धारित उदाहरण पर निर्भर करेगी. विदेश मंत्रालय ने कहा कि दोनों पक्षों ने हाल ही के वैश्विक विकास पर भी बात की.

बदलते हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य को लेकर बुधवार को नई दिल्ली में सीडीएस बिपिन रावत ने कहा कि हम सिनिक और इस्लामी सभ्यताओं के बीच संयुक्तता देख रहे हैं. आप चीन को अब ईरान से दोस्ती करते हुए देख सकते हैं, वे तुर्की की ओर बढ़ रहे हैं… और आने वाले वर्षों में वे अफगानिस्तान में कदम रखेंगे…क्या इससे पश्चिमी सभ्यता के साथ सभ्यताओं का टकराव होगा? उन्होंने कहा कि दुनिया अशांति में है.

वे अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं

सीडीएस ने कहा कि चीन का उदय लोगों की परिकल्पना की तुलना में तेजी से हुआ. हम एक द्विध्रुवीय या बहुध्रुवीय दुनिया में वापस जा रहे हैं. हम निश्चित रूप से जो देख रहे हैं वह राष्ट्रों की ओर से अधिक आक्रामकता है. खासकर जो द्विध्रुवीय दुनिया में जाने की कोशिश कर रहा है और अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है वह है चीन. वे अधिक से अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं और हम उनके साथ भूमि सीमा साझा करते हैं. इसलिए अब समय आ गया है कि हम अपनी रणनीतियों को देखें कि हम दो सीमाओं से कैसे निपटेंगे. ये दोनों हमारे पड़ोसी हैं और विरोधी. पश्चिमी मोर्चे पर पाकिस्तान और उत्तर में चीन.

लंबित मुद्दों के समाधान पर हो चर्चा

दुशान्बे में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन से इतर एक बैठक में बृहस्पतिवार को दोनों विदेश मंत्रियों ने क्षेत्र में वर्तमान हालात पर विचारों का आदान-प्रदान किया और इस बात पर सहमति जताई कि दोनों पक्षों के सैन्य एवं राजनयिक अधिकारियों को जल्द से जल्द फिर मुलाकात करनी चाहिए और लंबित मुद्दों के समाधान पर चर्चा करनी चाहिए. विदेश मंत्रालय (एमईए) के अनुसार, जयशंकर ने वांग यी से कहा कि भारत ने ‘‘सभ्यताओं के टकराव के सिद्धांत’’ का कभी भी समर्थन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों के जरिए जो मिसाल कायम होगी, एशियाई एकजुटता उसी पर निर्भर करेगी.

तीसरे देश के नजरिए से बचें

जयशंकर ने कहा कि दोनों पक्षों को ‘‘परस्पर सम्मान’’ आधारित संबंध स्थापित करना होगा और जिसके लिए यह आवश्यक है कि चीन, भारत के साथ अपने संबंधों को, तीसरे देशों के साथ अपने संबंधों के दृष्टिकोण से देखने से बचें. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘यह भी आवश्यक है कि भारत के साथ अपने संबंधों को चीन किसी तीसरे देश के नजरिए से नहीं देखे.’’ जयशंकर ने अपने वक्तव्य में ‘‘एक तीसरे देश’’ का जिक्र किया, वहीं विदेश मंत्रालय की ओर से जारी वक्तव्य में ‘‘तीसरे देशों’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है.

राजनयिक अधिकारियों को फिर चर्चा करनी चाहिए

विदेश मंत्रालय ने कहा, मंत्रियों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी कि दोनों पक्षों के सैन्य एवं राजनयिक अधिकारियों को पुन: मुलाकात करनी चाहिए और लंबित मुद्दों के जल्द से जल्द समाधान के लिए चर्चा जारी रखनी चाहिए. बयान में कहा गया कि, ‘‘इस संदर्भ में विदेश मंत्री ने स्मरण किया कि विदेश मंत्री वांग यी ने पिछली बैठक में कहा था कि द्विपक्षीय संबंध निम्न स्तर पर रहे हैं.’’ विदेश मंत्रालय ने कहा कि पिछली बैठक में दोनों पक्षों ने सहमति जताई थी कि वर्तमान हालात का लंबे समय तक जारी रहना दोनों पक्षों के हित में नहीं है क्योंकि इससे संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ रहा है.

पिछली बैठक के बाद के संबंधों में तरक्की हुई

विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि दोनों पक्षों को द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करते हुए पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर लंबित मुद्दों के जल्द समाधान की दिशा में काम करना चाहिए.’’ उसने कहा, ‘‘विदेश मंत्री ने इस बात का संज्ञान लिया कि 14 जुलाई को हुई पिछली बैठक के बाद से दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में कुछ प्रगति की है और गोगरा इलाके में सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया को पूरा किया है.’’ मंत्रालय ने कहा, ‘‘हालांकि अब भी कुछ लंबित विषय हैं जिनके समाधान की जरूरत है.’’

एलएसी पर यथास्थिति में बदलाव स्वीकार्य नहीं

वांग और जयशंकर ने 14 जुलाई को दुशान्बे में एससीओ के एक अन्य सम्मेलन से इतर एक द्विपक्षीय बैठक में बातचीत की थी. बैठक में जयशंकर ने वांग से कहा था कि एलएसी पर यथास्थिति में किसी भी तरह का एकपक्षीय बदलाव भारत को स्वीकार्य नहीं है और पूर्वी लद्दाख में अमन-चैन पूरी तरह बहाल होने पर ही समग्र संबंध विकसित हो सकते हैं. बृहस्पतिवार की बैठक में भी दोनों मंत्रियों ने हालिया वैश्विक घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

(भाषा के इनपुट के साथ)

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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