Fikr Aapki: देश के लाखों बच्चों पर कोरोना का खतरा बढ़ा, तीसरी लहर के लिए अस्पताल कितने तैयार!

देश के लाखों बच्चों पर अब कोरोना का खतरा ज्यादा बताया जा रहा है, लेकिन सवाल ये कि क्या कोराना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) आएगी और क्या...
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देश के लाखों बच्चों पर अब कोरोना का खतरा ज्यादा बताया जा रहा है, लेकिन सवाल ये कि क्या कोराना की तीसरी लहर (Corona Third Wave) आएगी और क्या जब कोरोना की तीसरी आएगी तो बच्चों की सेहत पर भारी पड़ेगी. साथ ही क्या तीसरी लहर में बच्चों पर वायरस का सबसे घातक असर होगा, क्योंकि देश के साइंटिस्ट, डॉक्टर और सरकार तक इसकी फिक्र जता चुकी है. इस वक्त आधे हिंदुस्तान में बच्चों पर वायरल बुखार कहर बनकर टूटा है, सैकड़ों की मौत हुई है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर हम बुखार को ही कंट्रोल नहीं कर सकेंगे तो कोरोना की नई लहर से कैसे लड़ेंगे?

इन्हीं सवालों के इर्द गिर्द हमने सात सूबों का रियलिटी टेस्ट किया है. आपको ये रिपोर्ट जरूर देखनी चाहिए ताकि अच्छी या बुरी, हर परिस्थिति के लिए आप तैयार रहें. सबसे पहले देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई के अस्पतालों का रिएलिटी टेस्ट. कोरोना की तीसरी लहर अगर आई तो बच्चों के लिए खतरा बड़ा होगा, लेकिन क्या इस खतरे से निपटने के लिए देश की तैयारी भी बड़ी है? ये समझने के लिए टीवी9 भारतवर्ष ने आधे भारत का पूरा रियलिटी टेस्ट किया है.

हमारे रिपोर्टर्स ने देश भर के 7 राज्यों के अस्पतालों का जायजा लिया है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के अस्पतालों का हाल जाना है. तो चलिए आपको कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच सात राज्यों की रियलिटी टेस्ट पर ले चलते हैं. सबसे पहले आपको ले चलते हैं दिल्ली और मुंबई, जहां कोरोना की दो लहरों का कहर सबसे ज्यादा टूटा था. सबसे पहले बात देश की राजधानी दिल्ली की. हमारी टीम बच्चों के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक चाचा नेहरू हॉस्पिटल पहुंची. यहां आईसीयू वार्ड तैयार करने का काम तेजी से जारी है.

चाचा नेहरू हॉस्पिटल में बेड बढ़ाने के साथ ऑक्सीजन प्लांट भी लगाया गया

हमारी पड़ताल में ये पता चला कि यहां बच्चों के लिए बेड बढ़ाने के साथ-साथ, ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है. आईसीय, NICU और वेंटिलेटर की संख्या बढ़ाई गई है. सभी बेड पर 24 घंटे ऑक्सीजन सप्लाई के लिए नई पाइप लाइन बिछाई गई है. पहले अस्पताल में 220 बेड्स की व्यवस्था थी. कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए बेड्स की संख्या को बढ़ाकर 250 से अधिक किया गया है. वहीं 30 आईसीयू बेड्स को बढ़ाकर 100 कर दिया गया है. इसके अलावा 150 ऑक्सीजन पॉइंट्स की संख्या को बढ़ाकर 230 तक पहुंचाया गया है. अस्पताल की तैयारियों को लेकर टीवी9 भारतवर्ष की टीम ने चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की हेड ममता जाजू से भी बात की.

हेड ममता जाजू ने कहा कि यहां वार्ड में बच्चों को अकेला नहीं रखा जाएगा. कोरोना होने की स्थिति में बच्चों के साथ माता-पिता को रहने की अनुमति मिलेगी. इन तैयारियों के साथ ही अस्पताल प्रशासन हेल्पलाइन नंबर जारी करने का प्लान बना रहा है, जिससे बीमार बच्चों को किसी भी समय मदद मिल सके. तीसरी लहर को लेकर चाचा नेहरू अस्पताल की तैयारी बहुत हद तक संतोषजनक है. इसके बाद बच्चों की बड़ी फिक्र को लेकर हमने महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई का रुख किया और हमारी टीम ने मुंबई की मेयर किशोरी पेडणेकर से बातचीत की. मेयर ने दावा किया कि मुंबई में 25 हजार बेड बच्चों के लिए तैयार रखे गए हैं और जरूरत पड़ी तो 25 हजार और बेड बढ़ाए जा सकते हैं. मेयर के इसी दावे की पड़ताल करने हम पहुंचे बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स. यहां जंबो कोविड सेंटर बनाया गया है.

देश के दो महानगरों ने बच्चों बचाने के लिए कमर कसी

इस जंबो कोविड सेंटर की क्षमता 2300 के आसपास है. फिलहाल यहां सिर्फ 25 कोरोना के मरीज इलाज करवा रहे हैं. इनमें समय-समय पर एक-दो बच्चे भी आ रहे हैं, लेकिन तीसरी लहर को देखते हुए आगे की तैयारी और भी बड़ी है. बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स कोविड सेंटर बनाने के साथ ही मुंबई के मलाड, वर्ली और कंजूरमार्ग पर भी ऐसे सेंटर बनाए गए हैं जहां बच्चों के लिए स्पेशल आईसीयू तैयार हैं. वहां आईसीयू से जुड़ा एक दूसरा कमरा भी है, जिसमें संक्रमित बच्चों के माता-पिता पीपीई किट पहनकर रुक सकेंगे. यानी देश के दो महानगरों ने बच्चों को बचाने के लिए कमर कस रखी है, लेकिन ऐसे दावे दूसरी लहर से पहले भी किए जा रहे थे और अब तीसरे लहर से पहले की तैयारी के दावे भी अभी महामारी की कसौटी पर परखे जाने बाकी हैं.

यानी दो मेट्रो शहरों में स्थितियां बेहतर हैं, लेकिन आज हम तीसरी लहर में बच्चों की फिक्र कर रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि कोरोना वायरस की पहली और दूसरी लहर में कितने बच्चे संक्रमित हुए. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक दूसरी लहर में 11.62 फीसदी बच्चे संक्रमित हुए जबकि पहली लहर में 11.31 फीसदी वायरस की चपेट में आए. कर्नाटक में तो दूसरी लहर के दौरान बच्चों में संक्रमण तेजी से फैला. 1 मई से 16 मई के बीच यानी महज 15 दिनों में 19 हजार बच्चे संक्रमित हुए. देश के अस्पतालों के आंकड़ें इस बात के सबूत हैं कि कोरोना ने दूसरी लहर में भी बच्चों को चपेट में लिया. ऐसे में जब आशंका है कि तीसरी लहर बच्चों को ज्यादा प्रभावित करेगी, तब देश के दो सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार इस महामारी से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं.

लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में डेंगू और मलेरिया वार्ड भी बनाया गया

कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए क्या उत्तर प्रदेश तैयार है. ये जानने के लिए हमारी पड़ताल की शुरुआत हुई लखनऊ के सबसे बड़े अस्पतालों में एक बलरामपुर चिकित्सालय से, जो कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मौतों के लिए चर्चा में रहा. यहां अलग से डेंगू और मलेरिया वार्ड भी बनाया गया है, जहां डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार से पीड़ित मरीज हैं, लेकिन इसमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है. हमारी पड़ताल बता रही थी कि बलरामपुर का अस्पताल बहुत हद तक संभल चुका है और इसके बाद हमारी टीम पहुंची लखनऊ के ही लोकबंधु अस्पताल में. सूबे की राजधानी में तो सब कुछ चाकचौबंद था, लेकिन पड़ताल में हमें कुछ ऐसी तस्वीरें भी दिखीं जो फिक्र बढ़ाती हैं.

महराजगंज जिला अस्पताल में डेंगू और वायरल बुखार से पीड़ित मरीजों की भरमार है. यहां ओपीडी में मरीजों की कतार देखी जा सकती है. बेड नहीं मिलने से ज्यादातर मरीज जमीन पर लेट कर अपना इलाज करा रहे हैं. बच्चों के वार्ड में एक ही बेड पर तीन-तीन मरीजों का इलाज किया जा रहा है. अब फिरोजाबाद के शिकोहाबाद ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल देख लीजिए. आरोप हैं कि यहां डॉक्टर नहीं आते और झोला छाप डॉक्टर पेड़ के नीचे लिटाकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं.

अब बिहार की तैयारी देखिए, बिहार के सबसे बड़े कोविड अस्पताल NMCH में तैयारियों को स्टैंडबाई पर रखा गया है. यहां दूसरी लहर के दौरान सबसे ज्यादा हाहाकार ऑक्सीजन को लेकर मचा था, लिहाजा अब राज्य के ज्यादातर बड़े अस्पतालों की तरह एनएमसीएच में भी अपना ऑक्सीजन प्लांट लगाया गया है. अब तक हमने आपको दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश और बिहार के अस्पतालों का हाल दिखाया, लेकिन दूसरी लहर के दौरान मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा भी वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल थे. ऐसे में हमारी पड़ताल भी मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा तक पहुंची. करोना की तीसरी लहर के साये के बीच क्या है यहां के अस्पतालों की तैयारी, देखिए ये रिपोर्ट.

कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में  5 गुना ज्यादा संक्रमित हुए बच्चे

कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर में बच्चे 5 गुना ज्यादा संक्रमित हुए है. ऐसे में आशंका है कि तीसरी लहर आई तो ये आंकड़े और बढ़ सकते हैं, लिहाजा मध्य प्रदेश सरकार भी बच्चों को बचाने की कवायद तेज कर दी है, लेकिन यहां तीसरी आने से पहले ही डेंगू ने कहर बरपा रखा है. ऐसे में हमारी टीम ने सबसे पहले भोपाल के जेपी अस्पताल का जायजा लिया, जहां डेंगू और मलेरिया के मरीज भरे पड़े थे. भोपाल के अस्पतालों जैसे हालात जबलपुर में भी हैं. तस्वीरों को देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां मौसमी बीमारियों के साथ-साथ वायरल फीवर और डेंगू ने कहर बरपा दिया है. यहां हजारों मरीज वायरल फीवर से पीड़ित हैं जबकि डेंगू मरीजों की संख्या का आंकड़ा भी 800 के ऊपर है. जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल में एक एक बेड पर 2 से 3 बच्चों का इलाज चल रहा है. 24 बेड की व्यवस्था वाले बच्चा वार्ड में 60 बच्चे एडमिट किए गए हैं, फिर भी जगह कम पड़ रही है.

कमोबेश यही स्थिति ग्वालियर, इंदौर, छतपुर और जबलपुर की है. बदलते मौसम के साथ बीमारी तेजी से फैली है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चे हुए हैं. मध्य प्रदेश के बाद टीवी भारतवर्ष की टीम ने पंजाब और हरियाणा के 2 जिलों अंबाला कैंट और मोहाली पहुंची. सबसे पहले आपको हरियाणा के अंबाला कैंट के सिविल अस्पताल का हाल दिखाते हैं. हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री का भी दावा है कि तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए ग्राउंड लेवल पर तैयारी की गई है. वैसे बात पंजाब की करें तो पंजाब सरकार को भी आशंका है कि करोना की तीसरी लहर कहर बन सकती है. इसी वजह से अस्पतालों में तमाम तैयारियां की गई हैं और सैकड़ों बेड तैयार रखे गए हैं. मोहाली सिविल अस्पताल में तो बच्चों के लिए अलग से आईसीयू आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं.

हालांकि ये तमाम सरकारी इंतजाम तब जस के तस धरे रह जाते हैं जब कोरोना का कहर बरपता है, ऐसे में पंजाब और हरियाणा की तैयारी भी तभी परखी जाएगी जब मुसीबत आएगी. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच हमने आपको 7 राज्यों की पड़ताल दिखाई, लेकिन इस बीच एक सच ये भी है कि फिलहाल देश में कोरोना के केस कम हो रहे हैं. पहले कोरोना केस चालीस हजार से ऊपर चल रहे थे, अब उनका ग्राफ 30 हजार के नीचे आने लगा है. इसमें भी केरल से आने वाले मरीजों की संख्या ज्यादा है. हर दिन केरल में कोरोना केस 20 हजार से ज्यादा है. ऐसे में एक्सपर्ट ये भी कह रहे है कि हो सकता है कि तीसरी लहर ना आए. वैसे बच्चों को लेकर एक अच्छी खबर ये भी है कि 2 से 18 साल के बच्चों के लिए अगले महीने जायडस कैडिला की वैक्सीन लॉन्च हो सकती है. मतलब जायडस कैडिला की कोरोना वैक्सीन अगले महीने से बच्चों के लिए उपलब्ध होगी.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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