TV9 EXCLUSIVE : अफगानिस्तानी जेल से निकला वो ‘मोस्ट वांटेड’ आतंकी, जिसके पीछे हाथ धोकर पड़ीं हिंदुस्तानी एजेंसियां

अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत कायम होने के बाद से ही एक शख्स को लेकर हिंदुस्तानी एजेंसियां बेहद ‘अलर्ट-मोड’ पर हैं. यह शख्स लंबे समय से अ...
Most Wanted Terrorist

अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत कायम होने के बाद से ही एक शख्स को लेकर हिंदुस्तानी एजेंसियां बेहद ‘अलर्ट-मोड’ पर हैं. यह शख्स लंबे समय से अफगानिस्तानी जेलों में कैद था. भारत का ‘मोस्ट-वांटेड’ यह शख्स मूल रूप से हिंदुस्तानी है. फिर भी दिल और दिमाग से यह असल में भारत का कट्टर दुश्मन और भारत के धुर-विरोधी या कहिए दुश्मन पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी ISI का विश्वासपात्र है. नाम है एजाज अहमद अहंगर उर्फ अबू उस्मान अल-कश्मीरी (Aijaz Ahmad Ahangar alias Abu Usman Al-Kashmiri). हिंदुस्तानी एजेंसियां इन दिनों एजाज की उम्र तकरीबन 55 से 58 साल के बीच बताती हैं.

जैसा की उपनाम ‘कश्मीरी’ से ही जाहिर हो जाता है कि यह शख्त मूलत: केंद्र शासित राज्य जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है. एजाज को हालांकि अब कश्मीर से फरार हुए कई साल हो चुके हैं. इसके बाद भी मगर उसका कश्मीर और भारत से वास्ता नहीं टूटा है. एजाज कुछ समय से अफगानिस्तान की विभिन्न जेलों में बंद था. हाल ही में उसे वहां जेल से रिहा कर दिया गया है. अफगानिस्तान की जेल से एजाज अहमद अहंगर की रिहाई ने हिंदुस्तानी खुफिया और जांच एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है. वजह, क्योंकि एजाज पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी का दाऊद इब्राहिम के बाद हाल-फिलहाल सबसे विश्वासपात्र ‘गुर्गा’ कहिए या फिर ‘मोहरा’ है.

भारत का मोस्ट वांटेड अफगानिस्तान में चर्चा में आया

भारतीय एजेंसियों की मानी जाए तो एजाज अहमद अहंगर कश्मीर घाटी की जेल से सन् 1996 में छोड़ा गया था, तभी से वो गायब है. उसी दौरान वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के पाले में जा बैठा. इस कुत्सित मंशा से कि अब हिंदुस्तान को ही तबाही के आलम में झोंकना है. बीते साल वो तब चर्चा में अचानक आया, जब अफगानिस्तानी एजेंसियां काबुल के गुरूद्वारे में हुए बम धमाके की जांच कर रही थीं.  25 मार्च 2020 को हुए उस धमाके में 25 लोग मारे गए थे. उस हमले की जिम्मेदारी तब ISPK ने ली थी. उस मामले में अफगान और अमेरिकी एजेंसियों की संयुक्त टीमों ने, ISPK (खुरासन) प्रमुख असलम फारूखी मौलवी अब्दुल्लाह, अली मोहम्मद और तनवीर अहमद को गिरफ्तार किया था.

गुरुद्वारे पर हमले में गिरफ्तार षडयंत्रकारी अली मोहम्मद ने यह राज खोला कि अफगानिस्तान में छिपा एजाज अहमद अहंगर, फिदायिन हमलों के लिए सबसे खतरनाक ‘मानव-बम’ तैयार करने का मास्टरमाइंड है. उसके बाद अमेरिकी, भारतीय और अफगानिस्तानी जांच व खुफिया एजेंसियों ने तुरंत ही अहंगर की जन्म-कुंडली खंगाल ली. पता चला कि अहंगर तो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए कई साल से ‘तुरुप का इक्का’ साबित हो रहा है. आईएसआई ने ही उसे खुरासन जैसे खतरनाक आतंकवादी गढ़ में घुसवाया है.

जेल से रिहाई होने पर खुली बात

अहंगर मूलरूप से जम्मू कश्मीर घाटी के श्रीनगर का रहने वाला है. अफगानिस्तान में गिरफ्तार अहंगर को हाल ही में वहां की जेल से रिहा कर दिया गया है. लिहाजा ऐसे खतरनाक मोस्ट-वांटेड आतंकवादी की जेल से रिहाई हिंदुस्तानी खुफिया और जांच एजेंसियों के लिए किसी बड़े सिर-दर्द से भला कम कैसे हो सकती है? भारतीय खुफिया एजेंसी के एक पूर्व अधिकारी व दिल्ली पुलिस सूत्रों के मुताबिक अहंगर की शादी अब्दुल्लाह गजाली उर्फ अब्दुल गनी डार की बेटी से हुई थी. अहंगर का ससुर अब्दुल्लाह गजाली भी देश में आतंकवाद की दुनिया में कश्मीर घाटी का बदनाम नाम था. वो लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar-e-Taiba) का कमांडर था. 80 साल की उम्र में उसकी कश्मीर घाटी में (श्रीनगर लाल चौक) हत्या कर दी गई.

सन् 1990 में बने तहरीक-उल-मुजाहिदीन (Tehreek-Ul-Mujahideen) के गठन में अहंगर के ससुर और कश्मीर घाटी के खतरनाक आतंकवादी अब्दुल्लाह गजाली का खुला सपोर्ट रहा था. एजाज अहमद अहंगर जब अब्दुल्लाह गजाली के संपर्क में गया, तब अब्दुल्लाह की उम्र करीब 50 साल रही थी. एजाज अहंगर को पहली बार कश्मीर घाटी में 1992 में गिरफ्तार किया गया था. तब वो कई साल तक जेल में बंद रहा. जेल में बंद रहने के दौरान ही अब्दुल्लाह गजाली ने उससे (एजाज अहमद अहंगर) अपनी बेटी का रिश्ता पक्का कर दिया. सन् 1995 और 1996 में श्रीनगर (जम्मू कश्मीर) में अहंगर को फिर गिरफ्तार करके जेल में भेजा गया.

भारत से पहुंचा पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर

1996 में कश्मीर घाटी की जेल से बाहर आते ही अहंगर बंग्लादेश के रास्ते पाकिस्तान भाग गया. उसी दौरान वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के संपर्क में पहुंचा था. तब से वो अब तक (काबुल में गुरुद्वारे पर हुए हमले तक) हिंदुस्तानी एजेंसियों की नजरों से ओझल था. भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक सन् 2008 में अहंगर ने पाक अधिकृत कश्मीर की रहने वाली किसी आयशा नाम की लड़की से निकाह कर लिया था. उसके बाद वो परिवार सहित वजीरिस्तान के मीरनशाह (Miran Shah) इलाके में जो पाकिस्तान-अफगानिस्तान की सीमा पर है, वहां जाकर रहने लगा था. उसके बाद ही उसने आईएसआई के इशारे पर पहले अलकायदा (Al-Qaeda) और उसके कुछ समय बाद ही Islamic State of Iraq and Syria (ISIS) को ज्वाइन कर लिया.

बाद में वह इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रॉविंस (Islamic State of Khorasan Province) में चला गया. जहां अभी तक वो बैठा हुआ है. हिंदुस्तानी खुफिया एवं जांच एजेंसियों के मुताबिक, अहंगर एक ऐसा खतरनाक मास्टरमाइंड है, जो आज के जमाने में सबसे खतरनाक तरीके से सोशल-मीडिया पर ही आतंकवादी तैयार कर रहा है. फिदायीन हमलों के लिए ‘मानव-बम’ बनाने में उसकी टक्कर का हाल-फिलहाल के वक्त में किसी भी बड़े आतंकवादी गुट के पास तेज-दिमाग नहीं है. अहंगर सोशल मीडिया पर ही युवाओं का ‘ब्रेन-वॉश’ करने में भी महारथ प्राप्त है. यही वजह है कि उसे कभी भी युवाओं को आतंकवाद के दलदल में उतारने के लिए , अपनी मांद से निकल खुद कहीं बाहर नहीं जाना पड़ता है.

बांग्लादेश-पाकिस्तान की तरफ खुफिया नजरें

भारतीय खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि इतने खतरनाक दिमाग वाला इंसान हिंदुस्तान की तरफ नजर उठाकर देखने की जुर्रत करे, उससे पहले ही उसे काबू कर लिया जाए. भारतीय खुफिया एजेंसियों की मानी जाए तो अफगानिस्तान की जेल से रिहा होने के बाद एजाज अहमद अहंगर का अफगानिस्तान में कहीं अता-पता नहीं है. खुफिया एजेंसियों को उसके अफगानिस्तान की सेंट्रल जेल से रिहा होते ही बांग्लादेश भाग जाने की भी भनक लगी है. बांग्लादेश से हवाई जहाज के रास्ते उसके पाकिस्तान पहुंच जाने की सूचनाएं भी हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों के पास आ रही हैं. कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आतंकवादी जहांजेब को उसकी पत्नी हिना बेग के साथ दिल्ली में गिरफ्तार किया था. तब भी हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों को एजाज अहमद अहंगर के बारे में कई सूचनाएं हाथ लगी थीं.

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