देवभूमि के कोने-कोने में जल तांडव, जानिए केवल 24 घंटों में उत्तराखंड में कैसे पसरा शोक

अक्टूबर में नई मुसीबत आई है. देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से बाढ़ के हालात बने हुए हैं. लेकिन उत्तराखंड में महज चौबीस घंटे की भ...
Uttarakhand Floods

अक्टूबर में नई मुसीबत आई है. देश के कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश से बाढ़ के हालात बने हुए हैं. लेकिन उत्तराखंड में महज चौबीस घंटे की भारी बारिश से पूरी देवभूमि में गहरा शोक है. उत्तराखंड में बाढ़ और बारिश की वजह से मरने वालों की संख्या 47 हो गई है. ज्यादातर मौतें बादल फटने और लैंडस्लाइड की वजह से हुई हैं. कई लोग अब भी मलबे में दबे हुए हैं. जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. सरकार ने चारधाम यात्रियों से अपील की है कि वे जहां हैं वहीं पर रहें. मौसम में सुधार होने से पहले अपनी यात्रा फिर से शुरू ना करें.

ऐसे हालात में कुदरत के मार की फिक्र जरूरी है. क्योंकि विज्ञान को भी समझ नहीं आ रहा कि महज 24 घंटे में कई 47 लोगों को मौत की नींद सुला देने वाले ये बादल कैसे बनने लगे हैं और आगे भी ये कितनी तबाही मचा सकते हैं. ये समझने के लिए ही टीवी9 भारतवर्ष की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची. जहां उत्तराखंड का शोक चप्पे चप्पे पर नजर आया.

उत्तराखंड में पहाड़ दरके. जमीन धंसी. बादल फटा और पहाड़ों से लेकर सड़क तक आफत का सैलाब आया. पुल भी बहा. हर कदम पर मौत का खतरा भी मंडराया. पहाड़ का हर रास्ता जोखिम से भर गया. सड़क से लेकर रेल की पटरियां तक तबाह हो गई.

देवभूमि के कोने-कोने में जल तांडव

तीन दिनों तक बारिश और सैलाब ने देवभूमि के कोने-कोने में जल तांडव मचाया. लेकिन बारिश थमने के साथ ही जिंदगी बचाने का मिशन शुरू हुआ. रेस्क्यू ऑपरेशन में जाबाजी की सबसे जबरदस्त तस्वीर सबसे ज्यादा प्रभावित नैनीताल से आई. क्योंकि नैनी झील के ओवरफ्लो होने से हालात और बिगड़ गए थे.

नैनीताल ने सैलाब से ऐसी तबाही पहले कभी नहीं देखी. ऐसे में टीवी 9 भारतवर्ष की टीम भी आफत की बारिश के बाद की तबाही को कैमरे में कैद करने सीधे नैनीताल झील पहुंची. उत्तराखंड में जब पहाड़ों पर आसमान से आफत बरसी तो नैनी झील समंदर बन गया. नैनी झील का पानी सड़कों और घरों तक पहुंच गया. लेकिन पानी के प्रहार से सबसे ज्यादा नुकसान झील के किनारे नाविकों का हुआ. जान बचाने के लिए नाविक नाव छोड़कर भागे. कई घंटे बीतने के बाद अब वापस लौटे हैं.

झील की तूफानी लहरें मॉल रोड की सड़कों पर बही. पानी का बहाव इतना खौफनाक था कि लोगों के दिल दहल गए.पानी के कहर के बीच भी सेना के जवान रेस्क्यू में लगे रहे. ह्यूमन चेन बनाकर लहरों से उनकी लड़ाई चली.दुकान में फंसे लोगों को बाहर निकाला गया.ऐसे में हमने मॉल रोड का भी मुआयना किया. ताकी आप समझ सके कि कैसे झील का पानी मॉल रोड तक आ गया.

सैलाब को देखकर मॉल रोड के दुकानदार भी डरे हुए थे.कभी सोचा नहीं था कि नैनी झील का पानी सड़कों तक आ जाएगा. ऐसा पिछले 50 वर्षों में कभी नहीं हुआ था. झील से सटे नैना देवी मंदिर में भी भयावह मंजर था.यहां पांच फिट तक पानी भर गया.एक दिन बाद भी सैलाब से मची तबाही के निशान मंदिर परिसर में दिख रहे हैं.अभी भी यहां पानी भरा है.

हमने मंदिर के मुख्य पुजारी से भी बात की. पूरे 24 घंटे की घटना को समझा. पानी कहां तक आया. अचानक कैसे मंदिर बंद किया गया. और अब फिर हालात कैसे सामान्य हुए.

बाढ़, बारिश से हल्द्वानी में गोला नदी के तट पर बना गोलापुल ही ढह गया. गोला पुल का एक हिस्सा भरभरा कर गिर गया. अचानक पुल बारिश के चलते दरक गया. पुल के बीचोबीच गड्ढा बन गया. पुल के एक छोर पर खड़े लोगों ने दूसरे छोर से आ रहे बाइक सवार को अलर्ट किया…तब मोटरसाइकिल सवार वापस मुड़ा. लेकिन पुल के दोनों तरफ खडे लोग तमाशबीन बने देखते रहे. और उनकी आंखों के सामने ही पुल लहरों में समा गया. हमारे रिपोर्टर ने उसी पुल का जायजा लिया. जिसके जरिए हल्द्वानी नैनीताल और उत्तराखंड से जुड़ता है और अब पूरी तरह से कट गया है.

बाकी हिस्सों से कटा नैनीताल का संपर्क

अभी भी नैनीताल का संपर्क राज्य के बाकी हिस्सों से कटा है. यहां तक आने वाली तीनों सड़कें लैंडस्लाइड के चलते ब्लॉक हैं. रेल लाइन से भी संपर्क संभव नहीं है. नैनीताल जिले में ही काठगोदाम रेलवे स्टेशन को जोड़ने वाली रेलवे लाइन भारी बारिश के चलते बह गई. ये तस्वीर भी उसी रेलवे ट्रैक की है. इसे शंटिंग रुट कहा जाता है. नदी में अचानक आए पानी के तेज बहाव के आगे रेलवे ट्रैक के पास बनी आरसीसी की दीवार भी टूट गई.टीवी 9 की टीम कई घंटों की जद्दोजहद के बाद काठगोदाम के इस ट्रैक तक पहुंची.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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राष्ट्रीय समाचार: देवभूमि के कोने-कोने में जल तांडव, जानिए केवल 24 घंटों में उत्तराखंड में कैसे पसरा शोक
देवभूमि के कोने-कोने में जल तांडव, जानिए केवल 24 घंटों में उत्तराखंड में कैसे पसरा शोक
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