Fikr Aapki: हाईटेक ड्रोन, स्नाइपर्स और 15 इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बैन, अमित शाह के जम्‍मू कश्‍मीर दौरे पर अभेद किलाबंदी

पिछले दिनों घाटी में हिंसा और आतंकी गतिविधियों से पूरे देश की फिक्र बढ़ गई है. अल्पसंख्यक और अप्रवासियों की हत्या के बाद पुंछ और राजौरी जिल...
Jammu Kashmir (1)

पिछले दिनों घाटी में हिंसा और आतंकी गतिविधियों से पूरे देश की फिक्र बढ़ गई है. अल्पसंख्यक और अप्रवासियों की हत्या के बाद पुंछ और राजौरी जिले के जंगलों में 12 साल बाद आतंकियों के खिलाफ सबसे बड़ा ऑपरेशन चल रहा है. इस बीच कल यानी 23 अक्टूबर को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिन के दौरे पर जम्मू कश्मीर जाएंगे. तो आइए सबसे पहले अमित शाह के दौरे पर एक नजर डालते हैं.

अमित शाह कल सुबह जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर पहुंचेंगे. श्रीनगर में हाल में हुई हिंसा को लेकर जम्मू कश्मीर की सुरक्षा की समीक्षा करेंगे. 23 अक्टूबर को दिनभर गृहमंत्री अमित शाह जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल, आईबी के अधिकारियों, सीआरपीएफ और एनआईए के डीजी, आर्मी के अधिकारियों और जम्मू कश्मीर के डीजीपी के साथ मीटिंग करेंगे. 23 अक्टूबर को ही उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की मौजूदगी में एकीकृत मुख्यालय की बैठक में जम्मू कश्मीर की सुरक्षा का जायजा लेंगे.

इसी दिन शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर यानी SKICC में पंचायत प्रतिनिधियों और केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों से 370 हटने के बाद विकास कार्यों का फीडबैक लेंगे. 24 अक्टूबर को गृहमंत्री जम्मू में IIT में नए ब्लॉक का उद्घाटन करेंगे. इसी दिन जम्मू में एक जनसभा को संबोधित करेंगे. उसके बाद राजभवन में कुछ प्रतिनिधि मंडल से मुलाक़ात करने का कार्यक्रम है. सूत्रों के मुताबिक 24 अक्टूबर की शाम को ही अमित शाह श्रीनगर वापस लौट जाएंगे.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अगले दिन यानी 25 अक्टूबर को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कारोबारी संगठनों और सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से मिलेंगे. जम्मू कश्मीर में गैर मुस्लिम और गैर कश्मीरियों पर हुए हमले के बाद गृहमंत्री अमित शाह का ये दौरा काफी महत्वपूर्ण है. घाटी में ISI की नापाक साजिश को करारा जवाब देने के लिए भी अमित शाह का ये दौरा बेहद अहम है. और जिसे ध्यान में रखते हुए पूरे श्रीनगर में अभूतपूर्व सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं. पूरे शहर को किले में तब्दील कर दिया है.
अमित शाह के स्वागत वाला होर्डिंग, ड्रोन, सुरक्षा के बंदोबस्त, पुरुष-महिला सबकी की चेकिंग सबको मिलाकर मोंटाज बनाएं.

ज़मीन और आसमान से निगहबानी, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती. सीआरपीएफ की महिला ब्रिगेड की मुस्तैदी. यानी अभूतपूर्व सुरक्षा का बंदोबस्त और ये तैयारी है केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के स्वागत की. जिसके तहत श्रीनगर को किले में तब्दील कर दिया गया है. श्रीनगर के लालचौक पर सघन छानबीन चल रही है. CRPF की 132 बटालियन और क्विक एक्शन टीम की महिला कमांडो चेकिंग कर रही हैं.

बता दें कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद अमित शाह का ये पहला कश्मीर दौरा है. घाटी में टारगेटेड किलिंग यानी अप्रवासियों की हत्या और आतंकी हलचल में बढ़ोतरी के बीच, गृहमंत्री का ये दौरा बेहद अहम माना जा रहा है. इसलिए श्रीनगर की सुरक्षा को अभेद्य बनाया गया है.

हाईटेक ड्रोन से भी निगरानी

श्रीनगर में चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाबलों की तैनाती के अलावा, हाईटेक ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है. अल्पसंख्यकों की रिहाइश वाले इलाकों में भी ड्रोन की तैनाती की गई है. हाइटेक ड्रोन के अलावा स्नाइपर्स के जरिए भी निगरानी जा रही है. श्रीनगर और पुलवामा के लगभग 15 इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बैन कर दिया गया है. डल झील का इलाका 23 से 25 अक्टूबर तक आम नागरिकों के लिए बंद किया गया है.

हालांकि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कहा है कि ये सभी कदम आतंकी हिंसा को रोकने के लिए उठाये गए हैं. इतना ही नहीं बढ़ती आतंकी गतिविधियों को देखते हुए, श्रीनगर में सड़कों के किनारे नये बंकर भी बनाए गए हैं और हाईरिज्यूलेशन कैमरे लगाए गए हैं.

तीन दिन के जम्मू कश्मीर दौरे के दौरान गृह मंत्री अमित शाह प्रदेश में चल रहे विकास के कार्यों की भी समीक्षा करेंगे. जिसमें जम्मू-कश्मीर का पर्यटन मुख्य एजेंडा होगा. इस मुद्दे को लेकर आज हमारे संवाददाता अभिषेक उपाध्याय ने श्रीनगर पहुंचे केंद्रीय जहाजरानी, बंदरगाह और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर से बातचीत की. जिन्‍होंने बताया कि श्रीनगर की डल झील और दूसरों झीलों में क्रूज़ चलाने की तैयारी चल रही है.

22 अक्‍टूबर 1947 को लॉन्‍च हुआ था ऑपरेशन गुलमर्ग

अमित शाह के दौरे से एक दिन पहले कश्मीर में आज एक और तस्वीर दिखी, जो 74 साल पहले पाकिस्तान के सबसे बड़े पाप की याद दिलाती है. आज ही के दिन यानी 22 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जे के लिए ऑपरेशन गुलमर्ग को लॉन्च किया था. जिसमें हजारों लोगों का खून बहा था. इसीलिए कश्मीर में हर साल 22 अक्टूबर को ब्लैक डे के रूप में मनाया जाता है और आज भी इस उपलक्ष्य में कई कार्यक्रम हुए. जिनका जिक्र हम आगे करेंगे. पहले आपको बताते हैं कि 22 अक्टूबर 1947 को क्या हुआ था?

21-22 अक्टूबर 1947 की दरमियानी रात पाकिस्तानी सेना ने कबायलियों के वेश में कश्मीर पर कब्जा जमाने के लिए ऑपरेशन को शुरू किया था. पाकिस्तानी सेना के साथ इस हमले में 22 पश्तून जनजातियां शामिल थीं. उस हमले के दौरान कबाइलियों ने भारी लूटपाट, मारकाट और अत्याचारों को अंजाम देकर तकरीबन 35 से 40 हज़ार हत्याएं की थीं. साथ ही भारतीय सेना ने इस हमले का सामना कर जम्मू और कश्मीर की हिफाज़त की थी.

दरअसल, पाकिस्तान 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान अलग मुल्क बना और महज एक हफ्ते के भीतर भारत के खिलाफ साजिश रचने में जुट गया और करीब दो महीने की तैयारी के बाद पाकिस्तान के तब के राष्ट्रपति मुहम्मद अली जिन्ना और तब के प्रधानमंत्री लियाकत अली ने मिलकर बड़ी साजिश रची और कश्मीर पर कब्जे के लिए ऑपरेशन गुलमर्ग के तहत भारतीयों का खून बहाया. जिसके बाद से हर युद्ध में पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी है और अब तो कश्मीर बदल रहा है. ये बदला हुआ कश्मीर पाकिस्तान और आतंकिस्तान को करारा जवाब दे रहा है.

22 अक्टूबर 1947, जम्मू कश्मीर के लिए ब्लैक डे

श्रीनगर में जगह-जगह होर्डिंग लगे, जिन पर लिखा है- 22 अक्टूबर 1947, जम्मू कश्मीर के लिए ब्लैक डे. दूसरे पोस्टर में लिखा है 22 अक्टूबर जिसे भुलाया नहीं जा सकता. 22 अक्टूबर को काला दिवस के रुप में मनाते हुए SKICC यानी शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में एक समारोह का आयोजन भी किया गया. जिसे जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संबोधित किया. इसी मौके पर SKICC से एक रैली भी निकाली गई. जिसमें काले झंडे के साथ लोगों ने मार्च किया.

ये बदले हुए कश्मीर की तस्‍वीर है जो पाकिस्तान के ऑपरेशन गुलमर्ग के विरोध में ब्लैक डे मनाता है और आतंकी मंसूबों के खिलाफ गैर कश्मीरियों के साथ खड़ा रहता है. दूसरी ओर हमारी सेना का अदम्य साहस है. पुंछ ऑपरेशन के 12वें दिन भी हिमालय जैसा अडिग है. सूत्र बताते हैं कि पुंछ के जंगलों में आतंकियों के हाइड आउट के करीब सुरक्षाबल पहुंच चुके हैं. किसी भी वक्त आतंकियों को ढेर कर सकते हैं. संदेश साफ है- आज के कश्मीर में आतंक जिंदा नहीं बचेगा, सिर्फ और सिर्फ अमन का राज होगा. कश्मीर बदल रहा है और कश्मीर की अवाम इस बदलाव के साथ है. उन्हें हर हाल में घाटी में अमन, शांति और विकास चाहिए, भले ही इसके लिए पाकिस्तान के आतंकियों से ही लोहा क्यों ना लेना पड़े.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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Fikr Aapki: हाईटेक ड्रोन, स्नाइपर्स और 15 इलाकों में मोबाइल इंटरनेट बैन, अमित शाह के जम्‍मू कश्‍मीर दौरे पर अभेद किलाबंदी
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