Fikr Aapki: पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में लेने की तैयारी में तालिबान, अमेरिका के सैन्य प्रमुख ने जताई आशंका

दुनिया में अगर कोई मुल्क तालिबान का सबसे गहरा दोस्त है, तो वो पाकिस्तान (Pakistan) है. लेकिन कहावत है कि जो दूसरों के लिए खाई खोदता है, वो ...
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दुनिया में अगर कोई मुल्क तालिबान का सबसे गहरा दोस्त है, तो वो पाकिस्तान (Pakistan) है. लेकिन कहावत है कि जो दूसरों के लिए खाई खोदता है, वो खुद उसमें गिरता है और पाकिस्तान के लिए तालिबान वही खाई साबित हो सकता है क्योंकि ये आशंका हर गुजरते दिन के साथ प्रबल होती जा रही है कि तालिबान अब अफगानिस्तान के बाद पाकिस्तान को अस्थिर कर वहां के परमाणु हथियारों पर कब्जा कर सकता है. ये आशंका अमेरिका के सैन्य प्रमुख (US Military Chief) मार्क मिले ने जताई है. अफगानिस्तान से जल्दबाजी में हुई वापसी से पाकिस्तान के परमाणु हथियारों और सुरक्षा को खतरा हो सकता है. यूएस आर्मी के टॉप जनरल के ये शब्द दुनिया पर मंडरा रहे परमाणु संकट के संकेत हैं, जो अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद से छाया है. ये डर जताने वाले वो अमेरिका के सबसे बड़े और सर्विंग सैन्य अफसर हैं और दो दिन पहले ही यही डर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वक्त राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे जॉन बोल्टन ने भी जताई थी.

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि जिस तेजी से तालिबान की ताकत बढ़ी है, मुमकिन है कि तालिबान अब पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को अपने कब्जे में ले सकता है. लेकिन ये डर क्यों जताया जा रहा है और इसका आधार क्या है, ये समझने से पहले आप ये जान लाजिए कि आखिर पाकिस्तान के पास कितने परमाणु हथियार और ठिकाने हैं. पाकिस्तान के पास 160 परमाणु बम, 102 मिसाइलें और 24 लॉन्चर्स हैं. बताया जाता है कि पाकिस्तान ने अपना परमाणु जखीरा 20 ठिकानों पर छिपाकर रखा है, जो पाकिस्तान के अलग-अलग शहरों में हैं. लेकिन इनमें से 9 ठिकाने ऐसे हैं, जहां न्यूक्लियर बम होने की गारंटी है और जिनकी सैटेलाइट इमेज फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट जारी कर चुका है. इनमें से एक ठिकाना है सिंध प्रांत अकरा गैरिसन, जहां अंडरग्राउंड स्टोरेज है. कराची के मसरूर एयरबेस में भी परमाणु बमों का स्टोरेज है. सिंध प्रांत में ही पानो अकील में रिमोट डिपो से जुड़ा स्टोरेज है. पंजाब प्रांत के फतेहजंग में नेशनल डेवलपमेंट कॉम्प्लेक्स भी एक ठिकाना है. गुजरांवाला में रिमोट डिपो से जुड़ा स्टोरेज है. वाह ऑर्डिनेन्स फैसिलिटी में भी न्यूक्लियर एक्टिविटीज होती हैं. बलूचिस्तान के खुजदार और खैबर पख्तूनख्वा के तारबेला में अंडरग्राउंड डिपो है.

अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा करवाना पाकिस्तान को पड़ने लगा है भारी

पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों के बारे में आपने जान लिया. अब आप ये समझिए कि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों तक तालिबान के हाथ पहुंच सकते हैं, ये डर क्यों है. दरअसल अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा करवाना पाकिस्तान को भारी पड़ने लगा है. पाकिस्तान में आतंकवादी हमले तेजी से बढ़े हैं. 4 साल का रिकॉर्ड टूट गया है. पाकिस्तान में अकेले अगस्त में कम से कम 35 आतंकवादी हमले हुए हैं, जिनमें 52 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इन हमलों के पीछे किसी और का हाथ नही हैं बल्कि तहरीक-ए-तालिबान है. हमलों के साथ-साथ पाकिस्तान में तालिबान समर्थकों के हौसले भी बुलंद होते जा रहे हैं, जिसकी सबसे बड़ी बानगी चंद दिनों पहले इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में दिखी, जब वहां मदरसे पर तालिबानी झंडे फहराए गए और मौलाना एके-47 लेकर पुलिसवालों से भिड़ते नजर आए. तालिबान के समर्थक और आतंकी हमले बढ़ना ही पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर तालिबान का कब्जा होने की आशंका को बढ़ा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर पहले भी हमले हो चुके हैं. नवंबर 2007 को सरगोधा न्यूक्लियर स्टोरेज फैसिलिटी सेंटर पर हमला हुआ था. अगस्त 2008 में वाह कैंट में तालिबान के सुसाइड बॉम्बर ने अटैक किया था. अगस्त 2012 में कामरा एयरबेस पर तालिबान ने हमला किया था.

यही वजह है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार हमेशा से आतंकियों के हाथ में जाने का डर जताया जाता रहा है और अब अफगानिस्तान में तालिबान का राज फिर से कायम होने के बाद ये डर बहुत बढ़ गया है, क्योंकि तालिबान और पाकिस्तान के रिश्ते खराब होना शुरू हो गए हैं. यूएस सेंट्रल कमांड के कमांडर जनरल फ्रैंक मैकेंजी के मुताबिक तालिबान अब तक पाकिस्तान से जैसे डील करता था, वो अब बदल गया है. अफगानिस्तान में सरकार बनाने के बाद दोनों देशों के संबंध लगातार जटिल होते जा रहे हैं. कुल मिलाकर अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा करवाकर पाकिस्तान ने ना सिर्फ अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है बल्कि पूरी दुनिया को एक तरह से तबाही के मुहाने पर ला दिया है, क्योंकि अगर तालिबानियों के हाथ में परमाणु हथियार लग जाते हैं तो उसका अंजाम महाविनाश के सिवा कुछ और नहीं होगा. इतने बड़े खतरे को देखते हुए अमेरिका इस फ्रंट पर जबरदस्त एक्टिव दिख रहा है. एक ओर वो तालिबान को ताकतवर होने से रोकने में जुटा है, तो दूसरी ओर उन देशों पर भी नकेल कसने में जुटा है जो तालिबान की ताकत बढ़ा रहे हैं.

अमेरिकी सीनेट में 22 रिपब्लिकन सांसदों ने पेश किया विधेयक 

इसके लिए अमेरिकी सीनेट में एक विधेयक पेश किया गया है. इस बिल का नाम है अफगानिस्तान काउंटर टेररिज्म, ओवरसाइट एंड एकाउंटेबिलिटी एक्ट, जिसे 22 रिपब्लिकन सांसदों ने पेश किया है. इसमें तालिबान के साथ-साथ उसका समर्थन करने वाली सरकारों और संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है. इससे पाकिस्तान में खलबली मच गई है, क्योंकि विधेयक में तालिबान को मदद में पाकिस्तान की भूमिका की जांच की बात भी कही गई है और इस जांच का दायरा 2001 से 2020 तक रखने की मांग है. अमेरिका में पेश हुए बिल को लेकर पाकिस्तान को पूरा यकीन है कि जांच में उसके खिलाफ एक नहीं सैकड़ों सबूत मिल जाएंगे. ऐसे में कंगाल और बेहाल पाकिस्तान की अवाम की बैन के नाम से नींद उड़ी हुई है, लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत और फौज चीन के मायाजाल में इस तरह डूबे हैं कि वो चीन के साथ साजिशे रचने से बाज नहीं आ रहे हैं. चीन और पाकिस्तान मिलकर एक बड़े ऑपरेशन की प्लानिंग कर रहे हैं.

ये सवाल इसलिए क्योंकि चीन और पाकिस्तान की दोस्ती ने एक नया रूप अख्तियार कर लिया है. आपने अभी तक ये सुना होगा कि एक देश दूसरे देश से सुरक्षा संबंधी जानकारियां साझा करते हैं. लेकिन क्या कभी आपने ये सुना है कि किसी देश ने अपनी सेना और खुफिया एजेंसियों के हेडक्वार्टर में दूसरे देश के सैन्य अफसरों की तैनाती की हो, लेकिन चीन और पाकिस्तान ने ऐसा किया है. चीन और पाकिस्तान के बीच खुफिया जानकारी साझा करने को लेकर एग्रीमेंट हुआ है, जिसके तहत पीएलए हेडक्वार्टर में पाकिस्तानी सैन्य अफसर की तैनाती हुई और अब चीन की इंटेलिजेंस एजेंसी एमएसएस के दफ्तर में भी पाकिस्तानी अफसर तैनात हुए हैं. जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के दो लाइजनिंग अफसर वेस्टर्न थिएटर कमांड में तैनात हुए हैं. साउथ थिएटर कमांड के हेडक्वार्टर में भी अफसरों की तैनाती हुई है.

तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और बलूच लिबरेशन आर्मी के हमलों से परेशान पाकिस्तान

पिछले कुछ समय में पीएलए के अलग-अलग फार्मेशन में पाकिस्तानी अफसरों की तैनाती कई गुना बढ़ गई है. मतलब ये कि चीन और पाकिस्तान का आर्थिक याराना अब सैन्य गठजोड़ के उस लेवल तक पहुंच गया है जो दूसरे देशों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है और वो ये है कि चीन के साथ इस गठजोड़ में पाकिस्तान की नाकामी छिपी है. पिछले कई दिनों से पाकिस्तानी सुरक्षाबल तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और बलूच लिबरेशन आर्मी के हमलों से परेशान है. टीटीपी और बीएलए के हमले जिन इलाकों में हो रहे हैं, वहां सीपीईसी के कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनमें चीन के 87 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम फंसी हुई है. इसलिए अब गठजोड़ के बाद चीन ने पाकिस्तान में चल रहे सीपीईसी प्रोजेक्ट की सुरक्षा सीधे तौर पर अपने हाथ में ले ली है. टीटीपी और बीएलए के खिलाफ ऑपरेशन को डायरेक्ट मॉनिटर करेगा यानी चीन अब पाकिस्तान को टीटीपी नाम के भस्मासुर. यानी उन आतंकियों से बचाने के लिए बारूद बरसाएगा, जिन्हें पाकिस्तानी फौज और आईएसआई ने पाला पोसा था और इसके साथ ही बलूचों के नरसंहार में भी पाकिस्तान का साथ देगा.

लेकिन ये गठजोड़ हिंदुस्तान की फिक्र भी बढ़ा रहा है. दरअसल पाकिस्तानी सेना के दो अफसर पीएलए की वेस्टर्न थिएटर कमांड में तैनात किए गए हैंय आपको बता दें वेस्टर्न थिएटर कमांड भारतीय सीमा से लगती है. पीएलए की ये सबसे बड़ी कमांड है और इसकी भारतीय सीमा पर साजिशों को अंजाम पहुंचाना होता है, इसलिए हिंदुस्तान को विस्तारवाद और आतंकवाद के इस गठजोड़ से बहुत ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. भारत को चीन और पाकिस्तान के गठजोड़ से सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि अब तक ड्रैगन एलएएसी पर हिंदुस्तान के खिलाफ साजिशों का चक्रव्यूह तैयार करता था, लेकिन अब वो पाकिस्तान के साथ मिलकर एलओसी पर भी साजिशों का जाल बिछाने में जुट गया है, जिसका सबूत सैटेलाइट कैमरे में कैप्चर तस्वीरों से हुआ है.

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस Detresfa ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक सैटेलाइट इमेज पोस्ट की है. ये तस्वीर इसी महीने की है और पीओके के स्कर्दू एयरबेस की है, जिससे पाकिस्तान की जंगी तैयारियों का अंदाजा लगता है. यहां पुराने रनवे के पास एक नया रनवे तैयार किया गया है. फाइटर जेट को रखने के लिए एयरक्राफ्ट शेल्टर भी बनाए गए हैं. स्टोरेज बंकर, टर्नअराउंड एरिया और फ्यूल स्टोरेज को भी अपग्रेड किया गया है. स्कर्दू एयरबेस की श्रीनगर से दूरी महज 155 किलोमीटर है, जहां पाकिस्तान एयरफोर्स के JF-17 फाइटर जेट की स्क्वॉड्रन तैनात है, जो 5 मिनट में भारत पहुंच सकते हैं. स्कर्दू एयरबेस पर चीनी साजिश की आशंका इसलिए जताई जा रही है कि यहां पर चीन के फाइटर जेट भी देखे जा चुके हैं और बताया जा रहा है कि चीन की मदद से ही एयरबेस अपग्रेड किया जा रहा है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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