NEET: EWS के लिए कैसे तय कर दी 8 लाख रुपए की सालाना आय? केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने पूछे सवाल

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी का निर्धारण करने के लिए आठ लाख ...
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मेडिकल पाठ्यक्रमों में आरक्षण के लिए आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी का निर्धारण करने के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय की सीमा तय करने पर केंद्र से सवाल पूछे. शीर्ष अदालत ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को इजाजत देते हुए उनसे कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी निर्धारित करने के लिए आठ लाख रुपये वार्षिक आय की सीमा तय करने का आधार क्या है? केंद्र इस पर एक हलफनामा दाखिल करे. केंद्र ने कहा कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आठ लाख रुपये की वार्षिक आय की सीमा तय करना राष्ट्रीय जीवन निर्वाह सूचकांक पर आधारित नीति का विषय है.

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, विक्रम नाथ और बीवी नागरत्न की पीठ ने केंद्र से यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि सीमा तय करने के लिए आधार और मानदंड क्या थे. क्या इस मुद्दे पर कोई विचार-विमर्श हुआ है. या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी में क्रीमी लेयर के निर्धारण की सीमा से केवल आठ लाख रुपये की आय का आंकड़ा उठाया गया है. शीर्ष अदालत, केंद्र और चिकित्सा परामर्श समिति (MCC) के 29 जुलाई के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. मेडिकल पाठयक्रमों में प्रवेश के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में EWS श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था.

आधार बताएं?

शीर्ष अदालत ने कहा कि हम जानना चाहते हैं कि आठ लाख रुपये की वार्षिक आय का आधार क्या है? इसके पीछे क्या अध्ययन था? क्या कोई विचार-विमर्श हुआ? क्या आप कह सकते हैं कि आठ लाख रुपये की सीमा पूरे देश के लिए है? हर राज्य में रहने की एक अलग लागत होती है. मुंबई, बैंगलोर और चेन्नई जैसे महानगरीय शहरों में उत्तर प्रदेश या किसी अन्य छोटे शहर की तुलना में रहने की अलग-अलग लागत है. देश में हर जगह के लिए आठ लाख रुपये की सीमा एक समान कैसे हो सकती है.

क्या कोई स्टडी की?

अदालत ने पूछा कि क्या सरकार ने एक राज्य में हर घर के सकल घरेलू उत्पाद का अध्ययन किया है? क्या उसने आर्थिक पिछड़ेपन के मानदंड का पता लगाया है? इसकी कार्यप्रणाली क्या है? यहां तक ​​​​कि हाउस रेंट अलाउंस के लिए भी आपके पास क्लास -1 और क्लास -2 शहरों की अवधारणा है. आप कैसे कह सकते हैं कि देश में हर जगह आठ लाख रुपये के लिए आवेदन किया जाएगा. आप केवल यह नहीं कह सकते कि यह नीति का मामला है और इससे दूर हो जाएं. शीर्ष अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज को इस मुद्दे पर विचार करने और उसके द्वारा पूछे गए सवालों के संबंध में एक हलफनामा दायर करने के लिए कहा.

आर्थिक पिछड़ापन वास्तविक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्थिक पिछड़ापन एक वास्तविक चीज है. इसमें कोई संदेह नहीं है, क्योंकि लोगों के पास न तो किताबें खरीदने के लिए पैसे हैं और न ही खाना खाने के लिए, लेकिन जहां तक ​​ईडब्ल्यूएस का सवाल है, वे अगड़ी श्रेणी के हैं और उनमें कोई सामाजिक या शैक्षिक पिछड़ापन नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह जानना चाहती है कि ईडब्ल्यूएस के लिए इन संकेतकों पर पहुंचने के लिए क्या कवायद की गई. पीठ ने साढ़े तीन घंटे से अधिक की अपनी सुनवाई में कहा कि राज्यों को भी मामले में एक पक्ष बनाया जाए. काउंसलिंग के समय रोस्टर/आरक्षण पैटर्न घोषित किया जाएगा कि कितनी सीटें (एससी/एसटी/ओबीसी और ईडब्ल्यूएस) को कितनी सीटें मिलेंगी.

सरकार ने की है सीटों में वृद्धि

सरकार ने 2019 में ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को समायोजित करने के लिए सीटों में वृद्धि की है, लेकिन केंद्र पिछले साल कोटा लागू करने में सक्षम नहीं थी. सीटों में बढ़ोतरी का फायदा पिछले साल छात्रों को मिला है. छात्रों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और श्याम दीवान ने दावा किया है कि मानदंड निर्धारित करने के लिए कोई कार्यप्रणाली दिखाए बिना मनमाने ढंग से आठ लाख रुपये की सीमा तय की गई है. लगभग 2500 सीटें ईडब्ल्यूएस श्रेणी में जाएंगी, जो अन्य छात्रों की संभावनाओं को प्रभावित करेगी.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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