Police Commemoration Day: 21 अक्टूबर 1959 की वो मनहूस दोपहरी, जिसके ज़ख्म 62 साल बाद भी नहीं भरे

हिंदुस्तान आज (21 अक्टूबर 2021) 62वां ‘पुलिस स्मृति दिवस’ (Police Commemoration Day 2021) मना रहा है. पुलिस-अर्धसैनिक बलों से जुड़े तमाम हि...
Police Commemoration Day

हिंदुस्तान आज (21 अक्टूबर 2021) 62वां ‘पुलिस स्मृति दिवस’ (Police Commemoration Day 2021) मना रहा है. पुलिस-अर्धसैनिक बलों से जुड़े तमाम हिंदुस्तानी जवान इस दिन को ‘पुलिस परेड डे’ और ‘पुलिस शहीदी दिवस’ के रूप में भी जानते,पहचानते, बोलते और याद करते हैं. आज से पहले तक 61 पुलिस स्मृति दिवस आयोजित किए जा चुके हैं. इस दिन देशभर के पुलिस बल, चाहे वो राज्य पुलिस हो, केंद्रीय सुरक्षा बल या फिर अर्धसैनिक बल, सभी एक साथ मिलकर इस दिन को ‘खास’ नजर से देखते हैं. आईए जानते हैं कि हमारे बहादुर 62 साल बाद भी आखिर क्यों नहीं भूल पाते हैं बीती 21 अक्टूबर सन् 1959 की इस तारीख को.

 हर साल मनाए जाने वाले “पुलिस स्मृति दिवस” को मनाने के पीछे छिपी है शोक, समर्पण, त्याग, बहादुरी की मिसाल की वो कहानी, जो आज भी धूमिल नहीं पड़ी है. देश में जब-जब शहीदी दिवस का आयोजन होता है तब-तब अब से 62 साल पहले विश्वासघाती चीनी सैनिकों की गद्दारी और हिंदुस्तानी रणबांकुरों की जाबांजी की यादें ताजी हो उठती हैं. बहादुरी की यही वो मिसाल है जिसका जिक्र हिंदुस्तान का धुर-विरोधी चीन आज भी अपने सिपाहियों-पुलिस से करता है. बात है 1950 के दशक के अंत की. उस जमाने में देश की चीन से सटी लद्दाख सीमा की सुरक्षा-निगरानी की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force) यानी सीआरपीएफ के कंधों पर थी.

62 साल पहले ऐसे होती थी चीन सीमा पर निगरानी

उस जमाने में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के अफसर सीमा की निगरानी को टुकड़ी के साथ खुद घोड़ों पर बैठकर निकला करते थे.  हथियारबंद ‘पैदल मार्च’ करते हुए मातहत जवानों की टुकड़ियों के साथ. जिस घटना की तारीख को आज 62 साल बाद भी देश भर की पुलिस और अर्धसैनिक बल ‘पुलिस स्मृति दिवस’ के रूप में मना रहे हैं. या यूं कहिए कि आज 62 साल बाद भी वे उस मनहूस तारीख को नहीं भूले हैं. वह घटना इसी दुर्गम लद्दाख के “हॉट-स्प्रिंग्स” (Hot Springs) क्षेत्र में घटी थी. केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के इतिहास में दर्ज पन्नों को पलटा जाए तो, कई हैरतंगेज जानकारियां उस घटना के बारे में देखने-पढ़ने को मिलती हैं.

मसलन बीते 62 साल से हर साल 21 अक्टूबर को मनाए जा रहे “पुलिस स्मृति दिवस” की नींव तो 20 अक्टूबर 1959 को ही पड़नी शुरू हो चुकी थी. हालांकि चीन द्वारा उस कायराना घटना को अंजाम 21 अक्टूबर सन् 1959 को दोपहर के वक्त दिया गया था. भारत के दुश्मन देश चीन के हथियारबंद सैकड़ों सैनिकों की भीड़ द्वारा सीआरपीएफ 20 रणबांकुरों को चारों ओर से घेरकर . यह घटना जिस जगह घटी वो स्थान (हॉट स्प्रिंग्स) समुद्र तल से करीब 10 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है. उस जमाने में तिब्बत में चीन से लगती 2500 मील लंबी भारतीय सीमा की रखवाली की जिम्मेदारी, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के (प्रथम पंक्ति यानी फ्रंट लाइन पर) कंधों पर थी.

62 साल पहले भारत-चीन का वो डरावना मंजर

20 अक्टूबर सन् 1959 को बल की तीसरी वाहिनी (थर्ड बटालियन)  उस दिन पूर्वी लद्दाख के इसी ‘हॉट स्प्रिंग्स’ सीमा पर निगरानी कर रही थी. जवानों की उस टुकड़ी को तीन भागों में बांटकर गश्त की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. 20 अक्टूबर 1959 को चीन सीमा पर गश्त को निकली उन 3 में से दो टुकडियां तो वापिस लौट आईं. तीसरी टुकड़ी मगर वापिस नहीं लौटी. वापिस न लौटने वाली उस तीसरी टुकड़ी में दो सिपाही और एक पोर्टर शामिल थे. 20 अक्टूबर 1959 को दोपहर से 21 अक्टूबर को सुबह तक जब तीसरी टुकड़ी वापिस नहीं लौटी तो अपनी उस खोई हुई टुकड़ी की तलाश के लिए एक और टुकड़ी तैयार की गई.

गायब तीसरी टुकड़ी की तलाश के लिए गठित की गई नई टुकड़ी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 20 जवानों को शामिल किया गया. उस तलाशी टीम का नेतृत्व खुद (लीड) खुद बल के डीसीआईओ (डिप्टी सेंट्रल इंटेलीजेंस ऑफिसर) सब-इंस्पेक्टर करम सिंह कर रहे थे. सुरक्षा के लिहाज से एहतियातन करम सिंह ने, अपनी उस ‘विशेष तलाशी टुकड़ी’ को भी तीन अलग-अलग टुकड़ियों में बांट लिया था. ताकि किसी एक टुकड़ी के मुसीबत में फंसने पर, बाकी टुकड़ियां या टुकड़ी मुसीबत में फंसी टुकड़ी के जवानों को मदद कर सके. खुद घोड़े पर सवार होकर करम सिंह तीनों टुकड़ियों के साथ एक दिन पहले से गायब अपने तीनों जवानों की तलाश में, 21 अक्टूबर 1959 को सीमांत (हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र) क्षेत्र में निकल गए.

शहीद हो गए रणबांकुरे मगर पीठ नहीं दिखाई

करम सिंह तीनों टुकड़ियों के साथ अभी कुछ ही दूरी तय कर सके होंगे कि पहले से घात लगाए बैठे, सैकड़ों चीनी सैनिकों ने गोलियों-बमों से उन पर हमला कर दिया. हमले के वक्त चूंकि चीनी सैनिक ऊंची पहाड़ी पर छिपे थे. जबकि करम सिंह और उनकी तीनो टीमें निचले हिस्से में हमलावरों के वार की जद में चारों ओर से फंस चुकीं थीं. लिहाजा चीनी सैनिकों के उस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 बहादुर जवान मोर्चा लेते हुए मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि 7 रणबांकुरे बुरी तरह ज़ख्मी हो गए. शहीद 10 जवानों के शवों संग, घायल 7 हिंदुस्तानी जवानों को भी चीनी सैनिक बंधक बनाकर अपने साथ ले गए. हालांकि चीन द्वारा छिपकर किए गए उस कायराना हमले में भी मोर्चा लेते हुए कई हिंदुस्तानी बहादुर जवान खुद को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहे थे.

कई दिन बाद चीन ने लौटाए हमारे बहादुरों के शव

उस घटना के बाद चीन ने 13 नवंबर 1959 को यानी करीब 22-23 दिन बाद हमारे बहादुर शहीद सैनिकों के शव हिंदुस्तान को लौटाए. उन शहीदों का ‘हॉट-स्प्रिंग्स’ में ही पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. इस सबके बाद जनवरी 1960 के मध्य में हमारे राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के तमाम आला-पुलिस प्रमुखों के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया. उसी सम्मेलन में तय हुआ कि भारतीय पुलिस-सुरक्षा बल उस घटना में शहीद रणबांकुरों की याद को हमे्शा के लिए ‘अमर’ कर देंगे. उन पुलिस जवानों के त्याग समर्पण, ईमानदारी, बहादुरी की मिसाल को आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ‘नजीर’ के बतौर सहज कर रखेंगे. उसी सम्मेलन में तय किया गया था कि उन शहीद हुए बहादुरों की याद में हर साल 21 अक्टूबर को देश भर में ‘पुलिस स्मृति दिवस’ मनाया जाएगा. कालांतर में ‘हॉट स्प्रिंग्स’ में एक पुलिस स्मारक बनाने का फैसला भी किया गया था.

स्मारक, जिसे हर हिंदुस्तानी पुलिस जवान देखना चाहता

हॉट स्प्रिंग्स में उन शहीद बहादुरों की याद में बने इस पुलिस स्मारक को देखना  आज हर पुलिसकर्मी अपनी खुशकिस्मती समझता है. दूसरी ओर देश भर में शहीद बहादुरों की याद में सन् 2012 से हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में ‘पुलिस स्मृति दिवस परेड’ का भी आयोजन भी किया जाने लगा है. राष्ट्रीय स्तर की यह परेड यहां मौजूद पुलिस मैमोरियल परिसर (National Police Memorial) में शहीद जवानों की याद में निकाली जाती है. शहीद जवानों के नाम भी इस आयोजन में श्रद्धांजलि देने के वक्त पढ़कर सुनाए जाते हैं. साथ ही इस विशेष दिन का महत्व अब इस कदर बढ़ चुका है कि, देश के हर राज्य की पुलिस और देश के केंद्रीय बल, अर्धसैनिक बल 21 अक्टूबर 1959 को ‘हॉट स्प्रिंग्स’ में शहीद हुए बहादुरों को तो नमन करते ही हैं. साथ ही साथ उसके बाद भी देश के किसी भी कोने में शहीद हुए बाकी रणबांकुरे जवानों के प्रति भी अपनी श्रद्धांजलि इसी दिन समर्पित करते हैं.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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राष्ट्रीय समाचार: Police Commemoration Day: 21 अक्टूबर 1959 की वो मनहूस दोपहरी, जिसके ज़ख्म 62 साल बाद भी नहीं भरे
Police Commemoration Day: 21 अक्टूबर 1959 की वो मनहूस दोपहरी, जिसके ज़ख्म 62 साल बाद भी नहीं भरे
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