TV9 EXCLUSIVE : कश्मीर घाटी में ‘Target Killing’ को अंजाम देने वाले तो सिर्फ “मोहरे” हैं, जानिए कौन है असली मास्टरमाइंड

कई साल से जम्मू-कश्मीर बेकसूर इंसानों के खून से रंगने से बची हुई थी. जबसे अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत (Taliban Government) ने बंदूक के ...
Pakistan Terrorist Module

कई साल से जम्मू-कश्मीर बेकसूर इंसानों के खून से रंगने से बची हुई थी. जबसे अफगानिस्तान में तालिबानी हुकूमत (Taliban Government) ने बंदूक के दम पर सत्ता संभाली उसके एक दो महीने बाद से ही कश्मीर घाटी में खून-खराबा शुरू हो गया. इसका सीधा-सीधा मतलब यह भी नहीं है कि हाल-फिलहाल कश्मीर में शुरू हुई ‘टारगेट किलिंग’ (Target Killing) के पीछे, मौजूदा तालिबान हुकूमत की ओर उंगली उठा दी जाए. हां, बीते एक सप्ताह के भीतर भारतीय फौज के खुफिया तंत्र और हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों ने जिस तरह की बातचीत, सीमा पार (पाक अधिकृत कश्मीर क्षेत्र में भारत की सीमा से सटे इलाकों में) से ‘इंटरसेप्ट’ की है. वो अपने आप में चिंता का विषय है.

हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसियों की मानें तो जम्मू कश्मीर घाटी में ‘टारगेट किलिंग’ का फार्मूला घाटी का ही एक पूर्व आतंकवादी सामने लेकर आया है. नाम है एजाज अहमद अहंगर. वही 58-60 साल का एजाज अहमद अहंगर उर्फ अबू उस्मान अल-कश्मीरी (Aijaz Ahmad Ahangar alias Abu Usman Al-Kashmiri), जिसकी बीते 25 साल से पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई और दुनिया भर में आतंकवाद फैलाने के लिए बदनाम संगठन, इस्लामिक स्टेट खुरासान (Islamic State Khurasan Province ISKP) के अंदर तूती बोलती है. दरअसल एजाज अहमद अहंगार मूल रूप से कश्मीरी आतंकवादी है. सन् 1990 के दशक के मध्य में (1996 के करीब) वो हिंदुस्तान से भागकर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से मिल गया था.

25 साल से इस Most Wanted की तलाश

तब से अहंगर का भारतीय एजेंसियों से एक बार भी आमना-सामना नहीं हुआ है. कुछ दिन पहले ही तालिबानी हुकूमत ने उसे अफगानिस्तान की जेल से रिहा किया था. भारतीय एजेंसियों के कान तभी खड़े हो गए थे. हिंदुस्तानी एजेंसियों को अंदेशा था कि एजाज अहमद अहंगर मौका मिलते ही पाक खुफिया एजेंसियों के हाथों में खेलकर भारत के विरुद्ध जहर उगलने से बाज नहीं आएगा. इसकी पुष्टि तब हो गई जब बीते सप्ताह सीमापार से हिंदुस्तानी एजेंसियों ने खुफिया और कोडवर्ड में चल रही बातचीत को बीच में ही सुन लिया. बातचीत किन-किन लोगों के बीच चल रही थी यह तो, हिंदुस्तानी एजेंसियां कश्मीर के मौजूदा हालातों के मद्देनजर खोलने को राजी नहीं हैं. हां, इतना तय है कि वो बातचीत पाक खुफिया एजेंसियों के ‘बिचौलियों’ और भारत विरोधी किसी मास्टरमाइंड इंसान के बीच ही हो रही थी.

सीमापार से पकड़ी चौंकाने वाली बातचीत

बातचीत के बारे में पूछे जाने पर कि क्या उन दोनों अजनबियों के बीच कोई एक हाल ही में अफगानिस्तान की जेल से रिहा हुआ और भारत का कट्टर दुश्मन पूर्व कश्मीरी आतंकवादी एजाज अहमद अहंगर से मिलता-जुलता लग रहा था? कश्मीर में तैनात एक अधिकारी ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर  कहा, “अभी यह सब कह पाना बहुत जल्दी होगी. इस संभावना को भी सिरे से इनकार नहीं किया जा सकता है. मगर जब तक संदिग्ध के हम लोगों के पास मौजूद (हिंदुस्तानी एजेंसियों के पास पहले से उपलब्ध) आवाज के नमूनों से मिलान न कर लिया जाए, तब तक पुष्टि कर पाना ठीक नहीं होगा. वैसे भी यह बातचीत हमारी कुछ विशेषज्ञ टीमों ने सुनी है. यह इनपुट आर्मी और इंटेलीजेंस का है. वो लोग (भारतीय खुफिया और मिलिट्री) इस पर काफी समय से काम कर रहे हैं. उन्होंने ही सीमा पार कुछ संदिग्ध लोगों के बीच चल रही बातचीत को इंटरसेप्ट किया था.”

एजेंसियों की नजर में चढ़ी ISKP की पत्रिका

भारतीय एजेंसियों की मानें तो हाल ही में इस आतंकवादी संगठन (ISKP) की मासिक पत्रिका ‘वॉयस ऑफ हिन्द’ का एक अंक भी सामने आया है. जिसमें लिखे कुछ लेखों के जरिए भारतीय एजेंसियों को खुले तौर पर चैलेंज किया गया है. एजेंसियों ने इस मैगजीन की तमाम प्रतियां कब्जे में भी ले ली हैं. हिंदुस्तानी खुफिया एजेंसी सूत्रों के मुताबिक मैग्जीन में एक जगह पर एक शख्स को एक गोलगप्पे वाले के सिर में पीछे से गोली मारते हुए दर्शाया गया है. साथ ही लिखा है कि ‘वीआर कमिंग’ यानी हम आ रहे हैं. यहां उल्लेखनीय है कि बीते चंद घंटे के अंदर ही कश्मीर घाटी में एक प्रवासी गोल-गप्पा विक्रेता सहित तीन प्रवासी कामगारों को गोली मार दी गई. इनमें से दो की मौत हो गई. ऐसे में हिंदुस्तानी एजेंसियां इस बात की खुलकर पुष्टि नहीं करतीं है कि, कश्मीर घाटी में ‘टारगेट किलिंग’ के पीछे खुरासान का मानव बम निर्माता एजाज अहमद अहंगर ही है.

अफगानिस्तान की जेल से आईएसआई के अड्डे पर

एजेंसियां एजाज अहमद अहंगर के अफगानिस्तान से रिहा होते ही उस पर लगातार पैनी नजर रखने की बात से भी इनकार नहीं करती हैं. कहा तो यहां तक जाता है कि अहंगर अफगानिस्तान की जेल से छूटते ही सीधा पाकिस्तान स्थित वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक लेफ्टिनेंट स्तर के अधिकारी के अड्डे पर पहुंचाया गया. उसके बाद से उसके बारे में किसी को कुछ ठोस नहीं पता है. जिस तरह से इन दिनों कश्मीर घाटी में ‘टारगेट किलिंग’ का खूनी खेल शुरू किया गया है उससे हिंदुस्तानी एजेंसियों के जेहन में अहंगर का नाम ठनका है. हिंदुस्तानी एजेंसियां इस बात को समझ चुकी हैं कि इस तरह की टारगेट किलिंग की प्लानिंग कोई कश्मीरी टेररिस्ट ही कर सकता है. जिसे जम्मू कश्मीर घाटी के चप्पे चप्पे की जानकारी हो. जो यह जानता हो कि किस तरह ‘गैर-कश्मीरी’ अवाम पर हो रहे अत्याचारों के चलते वो (आतंकवादी) दुनिया की नजर में मौजूदा हिंदुस्तानी हुकूमत को बदनाम कर सकते हैं.

ऐसे रुक सकती है “टारगेट-किलिंग”!

इस मामले में फिलहाल हिंदुस्तानी खुफिया और मिलिट्री खुफिया एजेंसी की नजरों में एजाज अहमद अहंगर के सिवाए कोई दूसरा नाम निकल कर सामने नहीं आ रहा है. हिंदु्स्तानी एजेंसियों की नजर में हाल-फिलहाल कश्मीर घाटी में आए टारगेट किलिंग के दौर को थामने के लिए अहंगर को काबू करना पहली प्राथमिकता है. क्योंकि अब यह अहंगर 1990 के दशक वाला ट्रेनी कश्मीरी आतंकवादी नहीं रह गया. आज का अहंगर दुनिया के सबसे बड़े और खतरनाक आईएसआईएस (Islamic State of Iraq and Syria ISIS) जैसे आतंकवादी संगठन का सबसे काबिल ‘मानव बम निर्माता’ (Human Bomb Maker) भी है.

साथ ही 1990 के दशक में जो एजाज अहमद अहंगर हिंदुस्तानी एजेंसियों से अपनी जान बचाने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (Inter-Services Intelligence) की ‘मांद’ में छिपने को भागा था. आज भारत की कट्टर दुश्मन पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई उसी एजाज अहमद अहंगर के आगे-पीछे चक्कर काट रही है. सिर्फ और सिर्फ इस गलतफहमी में कि अहंगर के जरिए वो कश्मीर घाटी सहित हिंदुस्तान के बाकी तमाम हिस्सों में मौजूद अमन-चैन को तबाह करा सकेगी.

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TV9 EXCLUSIVE : कश्मीर घाटी में ‘Target Killing’ को अंजाम देने वाले तो सिर्फ “मोहरे” हैं, जानिए कौन है असली मास्टरमाइंड
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