शंकराचार्य की मूर्ति के सामने PM मोदी का 15 मिनट ध्यान, 2019 में वायरल हुई थी ऐसी ही एक तस्‍वीर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पहाड़ से सपने से खंड-खंड पहाड़ अखंड होने वाला है. देवभूमि का कायाकल्प होने वाला है. असंभव स...
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के पहाड़ से सपने से खंड-खंड पहाड़ अखंड होने वाला है. देवभूमि का कायाकल्प होने वाला है. असंभव सी लगने वाली चार धाम यात्रा भी बहुत सुलभ होने वाली है. आज ही केदारनाथ पुरम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी दोनों ही काम आने वाली है. आज गोवर्धन पूजा के दिन पीएम मोदी ने भगवान केदारनाथ की विशेष पूजा की. श्री आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया और विश्व कल्याण की कामना की. इस मौके पर प्रधानमंत्री वर्ष 2013 की त्रासदी को याद कर भावुक भी हुए और केदारनाथ धाम के कायाकल्प के वचन को भी दोहराया.

हिमालय की बर्फीली चोटियों के बीच जहां भगवान केदार विराजमान हैं. जहां शिव से संकल्प सिद्धि का आशीर्वाद मिलता है. जहां भगवान भोलेनाथ जर्रे-जर्रे में अपना दिव्य रूप दिखाते हैं. उसी केदारधाम में प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर शीश नवाया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 7 बजकर 55 मिनट पर केदारधाम पहुंचे. मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचने पर पुजारियों ने प्रधानमंत्री का माथे पर चंदन का लेप लगाया. इसके बाद पीएम मोदी ने बाबा केदार की विधिवत पूजा-अर्चना की. रुद्राभिषेक किया. करीब बीस मिनट तक पूजा अर्चना के बाद पीएम ने मंदिर की परिक्रमा की और विश्व कल्याण की कामना की.

PM मोदी ने किया शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण

प्रधानमंत्री के केदारनाथ दौरे के मद्देनजर मंदिर को फूल-मालाओं से सजाया गया था. इसके लिए ऋषिकेश से 15 क्विंटल फूल मंगाए गए थे. साथ ही यहां सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध भी किए गए थे. बाबा केदार को नमन करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का अनावरण किया. दुर्लभ ब्लैक स्टोन से बनी शंकराचार्य की इस विशाल मूर्ति के सामने पीएम मोदी ने करीब 15 मिनट तक ध्यान लगाया.

इस तस्वीर को देखकर नरेंद्र मोदी की उस ध्यान साधना की याद आ गई जो उन्होंने दो वर्ष पहले साल 2019 में केदारनाथ की एक गुफा में की थी. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी पांच बार केदारनाथ धाम पहुंच चुके हैं. क्योंकि पीएम मोदी बाबा केदार के परम भक्त हैं. पीएम बनने से पहले उन्होंने हिमालय में साधना के लिए अपने जीवन के कई साल गुजारे हैं. उन्हें बाबा केदार के आशीर्वाद पर पूरा भरोसा है. नरेंद्र मोदी का हिम शिखरों के बीच विराजमान महादेव से ऐसा लगाव है कि जब भी मौका मिलता है. प्रधानमंत्री मोदी केदार के द्वार पहुंच जाते हैं.

लेकिन इस बार मौका खास है. नई केदारपुरी बनकर तैयार है. आदि शंकराचार्य की दिव्य और भव्य मूर्ति स्थापित हो चुकी है. वर्ष 2013 में आई त्रासदी में आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि भी बह गई थी. जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिशा निर्देश में केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण कार्यों के तहत आदिगुरु शंकराचार्य की समाधि खास डिजाइन से तैयार की गई है. वाकई केदारधाम में पीएम मोदी की आस्था बसती है. पहाड़ प्रधानमंत्री के दिल में बसता है. इसलिए महीने दो महीने में प्रधानमंत्री यहां के कार्यों की जानकारी लेते हैं और आज केदारधाम में पीएम ने इसे जाहिर भी किया.

अब आसान होगी चार धाम यात्रा

मतलब जो चार धाम यात्रा पहले लोगों का सपना होता, बेहद मुश्किल मानी जानी वाली चार धाम यात्रा की हिम्मत लोग उम्र के चौथेपन में कर पाते थे. अब वहां ऑल वेदर रोड. रोप वे और तमाम सुविधाओं की बात हो रही हैं. और ये सब सरकार के संकल्प के कारण ही हिमालय की वादियों में दिख रहा है. आज भी पीएम मोदी केदारनाथ में पूजा अर्चना के बाद संगम स्थल पर गए. जहां अलकनंदा और मंदाकिनी का संगम होता है. पीएम ने केदारनाथ में चल रहे विकास कार्यों का जायजा भी लिया.

पीएम मोदी ने केदारनाथ में 130 करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट का उद्घाटन भी किया. साथ ही 400 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया. प्रधानमंत्री के केदारनाथ दौरे में पूरे समय उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे. सुबह करीब पौने आठ बजे देहरादून में जौली ग्रांट हवाई अड्डे पर उत्तराखंड के राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम का स्वागत किया. उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी एमआई हेलीकॉप्टर से बाबा केदार के धाम रवाना हो गए.

पीएम मोदी की सोच के कारण हुआ केदारनाथ का कायाकल्‍प

वाकई वर्ष 2013 की त्रासदी के बाद आसान नहीं था केदारनाथ धाम का कायाकल्प. लेकिन ये प्रधानमंत्री का ही संकल्प है जिसके कारण केदारनाथ पुरम की ना सिर्फ कल्पना की कई. बल्कि ये सपना साकार भी होता दिख रहा है. अब जरा समझिए की पीएम मोदी की सोच के कारण किस तरह केदारधाम का कायाकल्प हुआ है. मंदिर के ठीक पीछे थ्री लियर सुरक्षा दीवार का निर्माण हुआ है. मंदिर से 500 मीटर दूर तक पैदल मार्ग 50 फीट चौड़ा हुआ है. मंदिर के आगे और पीछे के परिसर को काफी चौड़ा किया गया है. मंदाकिनी और सरस्वती नदी पर आस्था पथ, घाट और चबूतरे बने हैं. 7 हजार यात्रियों के रहने के लिए कॉटेज का निर्माण हुआ है. हेलीपैड बने हैं और सड़कें भी व्यवस्थित की गई हैं. भीमबली से केदारनाथ तक 10 किमी नया रास्ता बनाया गया है. छोटी लिनचोली, लिनचोली, रुद्रा प्वांइट में कई छोटे बाजार बने हैं. केदारनाथ मंदिर के पीछे ब्रह्मवाटिका का भी निर्माण किया गया है.

मंदिर के ही ठीक पीछे आज प्रधानमंत्री मोदी ने आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा और समाधि स्थल का अनावरण किया. बताया जाता है कि केदारनाथ मंदिर का पुनरुद्धार आदि शंकराचार्य ने ही कराया था. मान्यता ये भी है कि यहीं भगवान शंकर से अनुमति के बाद आदि शंकराचार्य विलुप्त हो गए थे. ये प्रमाण है, केदार धाम के पुनरुद्धार का. हिमालय में आस्था की विशालता का. इसी कड़ी में आदि शंकराचार्य की समाधि को भी नया और भव्य रूप दिया गया. नई मूर्ति लगाई गई. ये प्रतिमा केदारनाथ मंदिर के ठीक पीछे छह मीटर जमीन की खुदाई कर बनाई गई है. इसी दिव्य मूर्ति का अनावरण पीएम मोदी ने किया.

क्लोराइट शिस्ट से बनाई गई है मूर्ति

आदि शंकराचार्य की ये मूर्ति करीब 12 फीट ऊंची है. आदि शंकराचार्य की प्रतिमा का वजन 35 टन है. मूर्ति को कृष्णशिला पत्थर यानी ब्लैक स्टोन से तैयार किया गया है. आदि शंकराचार्य की मूर्ति को मैसूर के मशहूर मूर्तिकार अरुण योगीराज ने बनाया है. मूर्ति में दिव्य चमक लाने के लिए नारियल पानी से इसे पॉलिश किया गया है. आदि शंकराचार्य की ब्लैक स्टोन की 12 फीट ऊंची प्रतिमा पर धूप, बारिश और आंधी तूफान का भी असर नहीं होगा. क्योंकि मैसूर के मूर्तिकारों ने इसे क्लोराइट शिस्ट से बनाया है.

आदि शंकराचार्य की प्रतिमा के निर्माण के लिए 18 मॉडल तैयार किए गए थे. प्रधानमंत्री की सहमति के बाद इनमें से एक मॉडल को चुना गया था. मैसूर के मूर्तिकार योगीराज शिल्पी और उनके बेटे अरुण को प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री कार्यालय ने दी थी. आदि शंकराचार्य की इस प्रतिमा के निर्माण का काम वर्ष 2020 में शुरू हुआ था. 9 लोगों की टीम ने तकरीबन एक साल में इसे तैयार किया. इस साल सितंबर महीने में मूर्ति को मैसूर से चिनूक हेलीकॉप्टर से उत्तराखंड लाया गया. आपको बता दें कि आदि शंकराचार्य, केरल के कालड़ी में जन्मे महान दार्शनिक और संत थे. 8वीं शताब्दी में सनातन धर्म के वैभव और हिंदू परंपराओं को पुनर्जिवित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया. इसके लिए आदि शंकराचार्य ने भारत के चार कोनों में चार मठों की स्थापना की. ज्योतिष्पीठ बदरिकाश्रम, श्रृंगेरी पीठ, द्वारिका शारदा पीठ और पुरी गोवर्धन पीठ की स्थापना की. आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत को शिखर पर पहुंचाया.

आदि शंकराचार्य ने 32 साल की उम्र में केदारनाथ में महाप्रयाण किया था. यहीं पर उनकी पवित्र समाधि है. आपको बता दें कि केदारनाथ उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में है. हिमालय की गोद में बना ये मंदिर तीन तरफ से पर्वतों से घिरा है और यहां पर पांच नदियों- मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्णगौरी का संगम भी माना जाता है. जिनमें से अलकनंदा की सहायक नदी मंदाकिनी ही भौतिक रूप में नजर आती है. कहा जाता है कि केदारनाथ मंदिर को पांडव वंश के जन्मेजय ने बनवाया था. लेकिन कहा ये भी जाता है कि इसकी स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी. तभी से मैसूर के जंगम ब्राह्मण यहां पर पुजारी होते हैं.

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राष्ट्रीय समाचार: शंकराचार्य की मूर्ति के सामने PM मोदी का 15 मिनट ध्यान, 2019 में वायरल हुई थी ऐसी ही एक तस्‍वीर
शंकराचार्य की मूर्ति के सामने PM मोदी का 15 मिनट ध्यान, 2019 में वायरल हुई थी ऐसी ही एक तस्‍वीर
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