मणिपुरः हमला कहां और कैसे हुआ, आतंकियों ने इसी जगह को क्यों चुना? जानिए TV9 इस ग्राउंड रिपोर्ट में सब कुछ

भारत के एक लाल ने शहादत दी है. अपने परिवार के साथ उग्रवादियों के कायराना हरकत के शिकार हुए हैं. हम आज उस बॉर्डर तक भी आपको ले चलेंगे, जहां ...
Assam Rifles

भारत के एक लाल ने शहादत दी है. अपने परिवार के साथ उग्रवादियों के कायराना हरकत के शिकार हुए हैं. हम आज उस बॉर्डर तक भी आपको ले चलेंगे, जहां से साजिश की एक गंभीर फिक्र सामने आ रही है. आपको बता दें कि टीवी9 भारतवर्ष वो इकलौता चैनल है, जो मणिपुर में म्यांमार बॉर्डर तक पहुंचा है, जहां पर उग्रवादियों ने दुश्मन देशों के उकसावे पर रौद्र रूप दिखाना शुरू किया है. मणिपुर में उग्रवादियों के हमले में शहीद होने वाले कर्नल विप्लव त्रिपाठी को आज अंतिम विदाई दी गई.

आज उनका, उनकी पत्नी और बेटे का पार्थिव शरीर जब मणिपुर से छत्तीसगढ़ में उनके गृह जिले रायगढ़ लाया गया, तो पूरा शहर हिंद के इस सपूत के सम्मान में उमड़ पड़ा. रास्ते के दोनों ओर लोग खड़े रहे. फूल बरसाते रहे और भारत माता की जय, विप्लव अमर रहे के नारे लगाते रहे. पार्थिव शरीर को रामलीला मैदान में अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, जहां श्रद्धांजलि देने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा.

अंतिम दर्शन के लिए सूबे के सीएम भूपेश बघेल भी पहुंचे. पूरे सैन्य सम्मान के साथ शहीद कर्नल विप्लव, उनकी पत्नी और बेटे को अंतिम विदाई दी गई. टीवी9 भारतवर्ष इस कुर्बानी और हौसले को दुनिया के सामने लाने के लिए उसी जगह पर पहुंचा है, जहां पर एक कर्नल का लहू गिरा है. अब आपको विस्तार से ये ग्राउंड रिपोर्ट दिखाते हैं. आपने अभी जो झलक देखी, वो उसी जगह की है, जहां कर्नल विप्लव का लहू गिरा था, जहां वो शहीद हुए, लेकिन मणिपुर में म्यांमार बॉर्डर से सिर्फ 2 किलोमीटर दूर तक इस जगह तक पहुंचना आसान नहीं था. ये बेहद दुर्गम इलाकों में से एक है. चारों ओर पहाड़ और जंगलों से घिरा है. रास्ते भी उबड़ खाबड़ और टूटे-फूटे हैं, लेकिन तमाम मुश्किलों को पार करते हुए टीवी9 भारतवर्ष की टीम उस जगह तक पहुंची और फिर क्या-क्या दिखा, क्या-क्या पता चला, देखिए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में.

TV9 भारत-म्यांमार बॉर्डर के प्वाइंट तक पहुंचे

टीवी9 भारतवर्ष उस जगह पहुंचा, जहां देश के लिए कर्तव्य पथ पर मां भारती के लाल कुर्बान हो गए. टीवी9 भारतवर्ष पहला ऐसा नेशनल चैनल है, जिसके साहसिक रिपोर्टर सुमित चौधरी और कैमरामैन वीरेंद्र मौर्या भारत-म्यांमार बॉर्डर के उस प्वाइंट तक पहुंचे. जहां दो दिन पहले उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें कर्नल विप्लव त्रिपाठी, उनकी पत्नी, उनका बच्चा और चार जवान शहीद हो गए थे. वहां पहुंचते ही कैमरे में एक-एक करके वहां हमले के निशान कैद होने लगे.

13 नवंबर को इसी जगह से कर्नल अपनी दूसरी यूनिट के लिए जा रहे थे. मैं उसी जगह हूं. जहां उन्हें टारगेट किया गया. ये वही स्पॉट है, जो अवशेष हैं, जो चीजें हैं. 4-5 गाड़ियों का काफिला था, एक गाड़ी में खुद बैठे थे अपने परिवार के साथ. जिस जगह ये हमला हुआ वो मणिपुर की राजधानी इम्फाल से 150 किलोमीटर दूर है और म्यांमार बॉर्डर से महज 2 किलोमीटर दूर है. यहां जब उग्रवादियों ने हमला किया, तो खबर मिलते ही फौरन सेना की रिइंफोर्समेंट पार्टी पहुंच गई थी, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी.

कर्नल विप्लव. जिनकी रग-रग में भारत माता के लिए अथाह प्रेम था. दिल में देशप्रेम का ज्वार था, जिसके आगे इस वीर सपूत ने कभी किसी खतरे की परवाह नहीं की. उस जांबाज से आमने-सामने की लड़ाई का दम नहीं रखने वाले आतंकियों ने कायराना हमला करके शहीद कर दिया. उनके साथ उनकी पत्नी और 5 साल के बेटे को भी मार डाला.

उग्रवादी समूह को ये जानकारी थी कि कर्नल त्रिपाठी विहांग में रुके हुए हैं परिवार के साथ. सुबह कितने बजे निकल रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने पूरी तरह से प्लान करके अटैक को अंजाम दिया. सबसे पहले इसी जगह IED लगाई थी, जो बारूद है, उसके निशान नजर आ रहे होंगे. आसपास जो पत्ते दिख रहे हैं, ब्लास्ट किया, जैसे ही रुके, वैसे ही अटैक करना शुरू कर दिया. यूबीजीएल और स्माल आर्म्स का इस्तेमाल किया गया. IED एक नहीं कई होंगे.

अटैक दो तरफ से किया गया

पहाड़ियों और जंगल से ढके इस इलाके में हम जैसे-जैसे आगे बढ़े, वैसे-वैसे हमें हमले से जुड़े और निशान मिलते गए और उन्हें देखकर पता लगा कि हमला किस तरह किया गया होगा. उग्रवादियों का ये हमला बहुत बड़ा था क्योंकि एक तरफ इससे सरकार की शांति स्थापित करने की कोशिश को रक्तरंजित किया गया, तो दूसरी तरफ उग्रवादियों ने सिर्फ सुरक्षा बलों को नहीं, बल्कि उनके परिवार को भी टारगेट किया है और इसके लिए एक नहीं दो तरफ से घात लगाकर हमला किया गया था.

अटैक दो तरफ से किया गया. जो उग्रवादी थे, वो दोनों तरफ थे. घात लगाकर बैठे हुए थे. पत्तों से ढककर एंबुस बनाया और जैसे ही कॉन्वाय रुका, अटैक करना शुरू कर दिया. रोड के दोनों तरफ से जो घने जंगल हैं, उसका इस्तेमाल एंबुस के लिए किया गया. पहाड़ी के ऊपर जो इलाके हैं, यहां से फायर किया गया और दूसरी ओर झाड़ियों में छिपे थे, वहां से लगातार फायर किया जा रहा था.

हमला कहां हुआ था, उग्रवादी कहां घात लगाकर छुपे थे, ये सब देखने और समझने के बाद हम जब वहां से निकले. तो थोड़ी ही दूर जाकर हमें एक शख्स आता दिखाई दिया. ये शख्स उग्रवादियों के कायरना हमले का चश्मदीद था. उसने सब कुछ बताया.

संवाददाता- करीब ही एक गांव है, क्या नाम है इनका?
स्थानीय निवासी- सुंपाओ
संवाददाता- सुंपाओ इनका नाम है
संवाददाता- ये मणिपुर की ट्राइबल लैंग्वेज बोल रहे हैं, जो मुझे नहीं आती
संवाददाता- अगर आप इनसे पूछे कि क्या हुआ था उस दिन?
संवाददाता- कितने बजे हमला हुआ था, कितने उग्रवादी थे?
सुंपाओ, चश्मदीद- 10 बजे के करीब
संवाददाता- कितने लोग थे वो?
स्थानीय निवासी- 16 से 17 लोग थे. ऐसा बता रहे हैं

कायरों ने घात लगाकर हमला किया

अब तक हमें ये पता चल गया था कि हमला कहां हुआ था, कैसे हुआ था, लेकिन उग्रवादियों ने इसी जगह को क्यों चुना. वो किस संगठन के थे और उनका असली मकसद क्या था, ये सब आपको बताएंगे चंद सेकेंड बाद अगली रिपोर्ट में. ये वही जगह है जहां कर्नल विप्लव त्रिपाठी और उनकी टीम पर कायरों ने घात लगाकर हमला किया, लेकिन सवाल है कि आतंकियों ने हमले के लिए इसी जगह को क्यों चुना? टीवी भारतवर्ष की टीम को ये पड़ताल लगातार चौंकाती गई.

बिहांग जो लुक ईस्ट पॉलिसी का दूसरा गेटवे है. म्यांमार बॉर्डर से महज 2-3 किलोमीटर अंदर है. वो चीन और उसके पाले पोसे आतंकी संगठन PLA के लिए शूल भी है. जहां इस अटैक को अंजाम दिया गया वो रास्त भी बेहद अहम है. ये 102 B नेशनल हाईवे कह सकते हैं. ये आगे म्यांमार की तरफ जाता है. खास बात ये की जो भारत की पॉलिसी है लुक ईस्ट. उसका दूसरा गेटवे बिहांग ही है. यानी यही वो रास्ता है जिससे म्यामार की तरफ रास्ता जाएगा. यही वजह है कि चीन लगतारा उग्रवादी संगठनों को तैयार करता है. डेवपलमेंट के काम को रोका जाए.

यहां हुए हमले की जिम्मेदारी PLA ने ली है, जिसका पूरा नाम पीपल्स लिबरेशन आर्मी मणिपुर है. जो चीन की मदद से भारत को तोड़ने के सपने देखता है. PLA मणिपुर के आतंकी चीन की शह पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं. आतंकियों को चीन की फौज से ट्रेनिंग और हथियार मिलते हैं और म्यांमार में इनके ट्रेनिंग कैंप हैं. ट्रेनिंग कैंप से निकलकर PLA के आतंकी भारत में घुसपैठ करते हैं और हमलों को अंजाम देते है. चीन को डर है कि अगर इन इलाकों में विकास की रफ्तार तेज हुई तो उनकी साजिशें खत्म हो जाएंगी क्य़ोंकि भारत यहां तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर रहा है.

भारत और म्यांमार सीमा का बड़ा हिस्सा खुला है

पिछले कुछ सालों में पीएलए ने मणिपुर और नॉर्थ ईस्ट में कई हमले किए हैं, लेकिन बिहांग में जो हमला हुआ वो 2018 के बाद से सुरक्षा बलों पर हुआ पहला बड़ा हमला है. टीवी9 भारतवर्ष की टीम म्यांमार के उस सरहद पर भी पहुंची, जहां से आतंकी भारत में कायरों की तरह दाखिल होते हैं. भारत और म्यांमार सीमा का बड़ा हिस्सा खुला है. परमिट के जरिए दोनों देशों के नागरिक तय सीमा तक आर-पार जा सकते हैं. मणिपुर और म्यांमार बॉर्डर पर ये बिहाम की आखिरी पोस्ट है. 16 किलोमीटर का फ्री जोन है. परिवार के लोगें से मिल सकें, इस इलाके की चुनौतियां बड़ी हैं.

म्यांमार के साथ हमारा करीब 1643 किलोमीटर लंबा बॉर्ड़र है. हमारे चार राज्यो अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर की सीमाएं म्यांमार के साथ लगती हैं. बॉर्डर पर 250 गांवों में करीब 3 लाख लोग रहते हैं जिनकी जमीन सीमा के दोनों तरफ है. खास बात ये है कि इस सीमा पर घनी झाड़ियां और नदी नाले हैं, जिनमें कोई भी आसानी से छिप सकता है. असम रायफल्स के जवान हमेशा बॉर्डर पर कड़ी निगरानी रखते हैं, लेकिन कई बार झाड़ियों के सहारे म्यांमार के कैंपों से आंतंकी घुसपैठ में कामयाब हो जाते हैं. बिहांग में भी वही हुआ.

हमने अपने ग्राउंड रिपोर्ट में आपको वो जगह दिखाई, जहां पर भारत के एक कर्नल का खून बहा है. भारत के जवानों ने शहादत दी है. ये वो जगह है, जहां पर आमतौर पर जाने की हिम्मत कोई नहीं करता, लेकिन टीवी9 भारतवर्ष ने साजिश का वो ट्रिगर प्वाइंट दिखाया, जहां पर चीन की साजिश का साफ पता चलता है. भारत ने ये साफ कर दिया है कि ये शहादत व्यर्थ नहीं जाएगा और दुश्मनों को हमारे जवानों के खून के एक-एक कतरे का हिसाब देना होगा.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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मणिपुरः हमला कहां और कैसे हुआ, आतंकियों ने इसी जगह को क्यों चुना? जानिए TV9 इस ग्राउंड रिपोर्ट में सब कुछ
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