नागालैंड: गोलीबारी में 14 लोगों की मौत, पीड़ित परिवारों से मिलेगी TMC, सेना ने क्यों की फायरिंग? जानें मामले से जुड़ा हर अपडेट

नागालैंड के मोन जिले में कथित सैन्य गोलीबारी की घटना में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए तृणमूल ...
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नागालैंड के मोन जिले में कथित सैन्य गोलीबारी की घटना में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए तृणमूल कांग्रेस का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सोमवार को राज्य का दौरा करेगा. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने नागालैंड में हुई घटना की गहन जांच की मांग की है. इधर, राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) स्तर के एक अधिकारी की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का भी फैसला किया. नागालैंड सरकार ने कथित गोलीबारी में मारे गए 14 लोगों के परिवारों को 5-5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है.

तृणमूल कांग्रेस ने एक बयान में कहा, ‘तृणमूल कांग्रेस का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज नागालैंड का दौरा करेगा और मोन के ओटिंग में हुई दिल दहला देने वाली घटना में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिवारों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करेगा.’ प्रतिनिधिमंडल में चार सांसद- प्रसून बनर्जी, सुष्मिता देव, अपरूपा पोद्दार और शांतनु सेन- और पार्टी प्रवक्ता बिस्वजीत देव शामिल रहेंगे.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘नागालैंड से चिंताजनक खबर. शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना. मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं. हमें घटना की विस्तृत जांच सुनिश्चित करनी चाहिए. हमें यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पीड़ितों को न्याय मिले.’

एक जवान की भी मौत

नागालैंड के मोन जिले में एक के बाद एक गोलीबारी की तीन घटनाओं में सुरक्षाबलों की गोलियों से कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि 11 अन्य घायल हो गए. पुलिस ने बताया कि गोलीबारी की पहली घटना संभवत: गलत पहचान का मामला थी. इसके बाद हुए दंगों में एक सैनिक की भी मौत हो गई.

गोलीबारी की पहली घटना तब हुई जब शनिवार शाम कुछ कोयला खदान कर्मी एक पिकअप वैन में सवार होकर गाना गाते हुए घर लौट रहे थे. सेना के जवानों को प्रतिबंधित संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-के (एनएससीएन-के) के युंग ओंग धड़े के उग्रवादियों की गतिविधि की सूचना मिली थी और इसी गलतफहमी में इलाके में अभियान चला रहे सैन्यकर्मियों ने वाहन पर कथित रूप से गोलीबारी की, जिसमें छह मजदूरों की जान चली गई.

सेना की गाड़ी को घेरा, लगाई आग

पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि जब मजदूर अपने घर नहीं पहुंचे तो स्थानीय युवक और ग्रामीण उनकी तलाश में निकले तथा इन लोगों ने सेना के वाहनों को घेर लिया. इस दौरान हुई धक्का-मुक्की व झड़प में एक सैनिक मारा गया और सेना के वाहनों में आग लगा दी गई. इसके बाद सैनिकों द्वारा आत्मरक्षार्थ की गई गोलीबारी में सात और लोगों की जान चली गई.

इस घटना के खिलाफ उग्र विरोध और दंगों का दौर रविवार अपराह्न भी जारी रहा और गुस्साई भीड़ ने आज कोन्याक यूनियन और असम राइफल्स कैंप के कार्यालयों में तोड़फोड़ की और उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी. सुरक्षा बलों द्वारा हमलावरों पर की गई जवाबी गोलीबारी में कम से कम एक और नागरिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए.

जिले में मोबाइल इंटरनेट, डेटा सेवा पर बैन

उग्र भीड़ गोलीबारी के घटना में शामिल सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रही थी. नागालैंड सरकार ने एक अधिसूचना के माध्यम से भड़काऊ वीडियो, तस्वीरों या लिखित सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए जिले में मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं के साथ-साथ एक साथ कई एसएमएस करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है.

जिले में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध के बावजूद, हालांकि भीड़ द्वारा मोन में कोन्याक यूनियन कार्यालय और असम राइफल्स कैंप में तोड़फोड़ करने के वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं. मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो सोमवार को प्रभावित जिले का दौरा करेंगे.

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नगालैंड में गोलीबारी के बाद की तस्वीर

दो की हालत गंभीर

पुलिस ने कहा कि इस गोलीबारी में मारे गए लोगों का पोस्टमॉर्टम मोन में कराया जा रहा है और आशंका जताई की मृतकों की संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि घायलों में से दो की हालत गंभीर है और उन्हें बेहतर उपचार के लिए असम भेजा गया है, जबकि शेष का उपचार नागालैंड में ही चल रहा है.

सेना ने घटना की ‘कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी’ का आदेश देते हुए बताया कि इस दौरान एक सैन्यकर्मी की मौत हो गई और कई अन्य सैनिक घायल हो गए. इसने कहा कि यह घटना और उसके बाद जो हुआ, वह ‘‘अत्यंत खेदजनक’’ है तथा लोगों की मौत होने की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की उच्चतम स्तर पर जांच की जा रही है.

कर्नल बोले- घटना अत्यंत खेदजनक

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश सरकार ने आईजीपी नागालैंड की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है. रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (कोहिमा) लेफ्टि. कर्नल सुमित शर्मा ने कहा, ‘नागालैंड में मोन जिले के तिरु में उग्रवादियों की संभावित गतिविधियों की विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर इलाके में एक विशेष अभियान चलाए जाने की योजना बनाई गई थी. यह घटना और इसके बाद जो हुआ, वह अत्यंत खेदजनक है.’

मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने का वादा किया और समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने का आग्रह किया. मोन म्यांमा की सीमा के पास स्थित है, जहां से एनएससीएन-के का युंग ओंग धड़ा अपनी उग्रवादी गतिविधियां चलाता है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे को घटना की जानकारी दी गई है.

गृह मंत्री ने व्यक्त की संवेदना

असम और नागालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी ने शांति की अपील करते हुए एक बयान में कहा, ‘एसआईटी सभी कोणों से घटना की जांच करेगी, जबकि इसमें शामिल सैन्य कर्मियों के खिलाफ कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी का गठन किया गया है.’

मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने ट्वीट किया, ‘मोन के ओटिंग में आम लोगों की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना अत्यंत निंदनीय है. मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. मामले की एसआईटी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी और कानून के अनुसार न्याय किया जाएगा. मैं सभी वर्गों से शांति बनाए रखने का आग्रह करता हूं.’

गृह मंत्री अमित शाह ने भी शोक प्रकट किया और ट्वीट कर घटना में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय एसआईटी इस घटना की गहन जांच करेगी, ताकि शोक संतप्त परिवारों के लिये न्याय सुनिश्चित किया जा सके.’

राहुल गांधी ने उठाए सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ‘यह हृदय विदारक है. भारत सरकार को सही-सही जवाब देना चाहिए. गृह मंत्रालय वास्तव में क्या कर रहा है, जब न तो आम नागरिक और न ही सुरक्षाकर्मी हमारी अपनी ही सरजमीं में सुरक्षित हैं?’

‘ईस्टर्न नागालैंड पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन’ (ईएनपीओ) ने इस घटना के विरोध में क्षेत्र के छह जनजातीय समुदायों से राज्य के सबसे बड़े पर्यटन कार्यक्रम ‘हॉर्नबिल’ महोत्सव से भागीदारी वापस लेने का आग्रह किया.’ संगठन ने एक बयान जारी कर कहा, ‘ईएनपीओ भारतीय सेना की अंधाधुंध गोलीबारी में ओटिंग गांव के 10 से अधिक दिहाड़ी मजदूरों की मौत होने की घटना पर गहरा शोक व्यक्त करता है और घटना की घोर निंदा करता है.’

ईएनपीओ ने छह जनजातियों से राज्य की राजधानी के पास किसामा में हॉर्नबिल महोत्सव स्थल ‘नगा हेरिटेज विलेज’ में अपने-अपने ‘मोरुंग’ में घटना के खिलाफ काले झंडे लगाने को कहा. इसने कहा, ‘सभी संबंधित पक्षों को समझना चाहिए कि यह आदेश/कदम राज्य सरकार के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह सुरक्षाबलों के खिलाफ नाराजगी जताने और छह जनजातीय समुदायों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए है.’

आफस्पा पर उठे सवाल

इसबीच, नागालैंड में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में नागरिकों की मौत के कारण पूर्वोत्तर से सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम,1958 को वापस लेने की मांग रविवार को नए सिरे से जोर पकड़ने लगी है. ‘मणिपुर वीमेन गन सर्वाइवर्स नेटवर्क’ और ‘ग्लोबल अलायंस ऑफ इंडिजिनस पीपल्स’ की संस्थापक बीनालक्ष्मी नेप्राम ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस क्षेत्र के नागरिकों और स्थानीय लोगों को मारने में शामिल किसी भी सुरक्षा बल पर कभी आरोप नहीं लगाया गया और न ही गलती के लिए उन्हें सलाखों के पीछे डाला गया.

आफस्पा को ‘औपनिवेशिक कानून’ बताते हुए, नेप्राम ने कहा कि यह सुरक्षा बलों को ‘हत्या करने का लाइसेंस’ देता है. राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता उत्पल बोरपुजारी ने कहा कि भले ही नागरिकों को ‘झूठी खुफिया जानकारी’ के आधार पर मार दिया गया हो, अफस्पा अपराधियों को छूट प्रदान करता है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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Nishpaksh Mat

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