AFSPA के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करेगी नगालैंड सरकार, गोलीबारी की घटना के बाद से वापस लेने की उठ रही मांग

नगालैंड (Nagaland) के मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत के बाद नगालैंड सरकार (Nagaland government) ने विधानसभा का एक...
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नगालैंड (Nagaland) के मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत के बाद नगालैंड सरकार (Nagaland government) ने विधानसभा का एक विशेष सत्र आयोजित करने और अफस्पा (AFSPA) को निरस्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करने का गुरुवार को फैसला किया. सरकार के एक प्रवक्ता ने ये जानकारी दी. योजना और समन्वय, भूमि राजस्व और संसदीय मामलों के मंत्री नीबा क्रोनू ने बताया कि विशेष सत्र 20 दिसंबर को होने की संभावना है और असम तथा नगालैंड के राज्यपाल जगदीश मुखी औपचारिक रूप से इसे आहूत करेंगे.

सशस्त्र बल विशेष अधिकार कानून (Armed Forces Special Powers Act) सेना को अशांत क्षेत्रों में गिरफ्तारी और नजरबंदी की शक्तियां देता है. मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नगा राजनीतिक मुद्दे पर कोर कमेटी की दिन में कोहिमा में हुई बैठक में ये फैसला लिया गया. मंत्री नीबा क्रोनू ने कहा कि विशेष सत्र में नगा राजनीतिक मुद्दे पर भी चर्चा होगी. मोन जिले के ओटिंग गांव में शनिवार को सुरक्षाबलों की गोलीबारी में कोयला खदान में काम करने वाले छह मजदूरों की मौत हो गई थी. घटना के बाद में झड़पों में सात लोगों की मौत हो गई.

नगालैंड से अफस्पा हटाने की मांग हुई तेज

इन घटनाओं के बाद से नगालैंड से अफस्पा हटाने की मांग तेज हो गई है. मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी सोमवार को लोगों के अंतिम संस्कार के दौरान इस कानून को वापस लेने की मांग की थी. नगा स्टूडेंट्स फेडरेशन और नागरिक संस्थाओं सहित आदिवासी संगठन और महिला संगठन राज्य सरकार से विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने और कानून को निरस्त करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करने की मांग कर रहे हैं.

क्या है अफस्पा (AFSPA)?

ये एक कानून है, जिसका पूरा नाम आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट है. इस कानून को साल 1958 में लागू किया गया था और देश के कई ‘अशांत’ इलाकों में इसे लागू किया गया है. आफस्पा को समझने से पहले इसके इतिहास को समझा जाना जरूरी है. दरअसल साल 1942 में ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के पूर्वी बॉर्डर में हो रहे हमले को लेकर भारतीय सेना और जापान के सैनिकों के बीच खास अलायंस हुआ था. इसके साथ ही सेना के लिए एक ऑर्डिनेंस पास किया गया था, जिसमें सेना को किसी मारने, प्रोपर्टी को नष्ट करने और गिरफ्तार करने के लिए स्पेशल पावर दिए गए थे. माना जाता है कि ये ही आज के आफस्पा की बुनियाद है.

होता क्या है कि कुछ राज्यों में राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहती है. केंद्र सरकार उस क्षेत्र को ‘डिस्टर्ब एरिया’ घोषित कर आंतरिक सुरक्षा के लिए सेना को तैनात कर देती है. ऐसे में सेना को खास पावर दिए जाते हैं, जिससे कि अलगाववाद जैसी घटनाओं को रोका जा सके और ऐसा ही नगालैंड में भी है. केंद्रीय गृह मंत्रालय हर छह महीने के लिए (AFSPA) कानून को लागू करता है.

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(इनपुट- भाषा के साथ)

देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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Nishpaksh Mat

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राष्ट्रीय समाचार: AFSPA के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करेगी नगालैंड सरकार, गोलीबारी की घटना के बाद से वापस लेने की उठ रही मांग
AFSPA के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करेगी नगालैंड सरकार, गोलीबारी की घटना के बाद से वापस लेने की उठ रही मांग
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