पंचतत्व में विलीन हुए सीडीएस जनरल बिपिन रावत, नम आंखों से पूरे देश ने दी श्रद्धांजलि

आज पूरा देश मौन है, भावुक है, व्याकुल है. ना शब्द हैं, ना चेतन है, सिर्फ एक शून्य है. लेकिन वो कहते है ना शूरवीरों के लिए शून्य कहां होता ह...
Bipin Rawat

आज पूरा देश मौन है, भावुक है, व्याकुल है. ना शब्द हैं, ना चेतन है, सिर्फ एक शून्य है. लेकिन वो कहते है ना शूरवीरों के लिए शून्य कहां होता है. वो तो शून्य को शिखर में तब्दील करने का माद्दा रखते हैं, लेकिन आज जब जनरल का आखिरी सफल निकला तो शिखर भी झुक गया, राष्ट्र नायक के सामने नतमस्तक हो गया. देश के सबसे बड़े जनरल नए मोर्चे पर निकल गए, ये कहकर भारत मां की गोद में लिपट गए कि फौजी कभी थकता नहीं, कभी रुकता नहीं, कभी मरता नहीं. जिस सेना की वर्दी को चार दशक तक अपने सीने से लगाकर रखा, जिस तिरंगे की आन बान शान को झुकने नहीं दिया, भारत माता के सिर को सदैव ऊंचा रखा, वो योद्धा जब तक जिया वतन का रहा, मरकर भी अमर हो गया.

जनरल रावत की विदाई की आखिरी तस्वीरें हैं ये. सुपर सोल्जर को राष्ट्र का आखिरी सैल्यूट है ये. जितनी बार देखेंगे उतनी बार गर्व की अनुभूति होगी. आंखें नम भी होंगी, आंसू भी छलकेंगे, लेकिन धरा की धुरी बदलने वाले, दुश्मन के दंभ को गर्त में मिलाने वाले जब रुकसत होते हैं तो विलाप की वेदी के साथ महायोद्धा के लिए महाउद्घोष भी सुनाई पड़ता है. आज अभिमान है उस बिटिया पर, जिसने पिता को हंसते-हंसते विदा किया. सम्मान है उस परिवार का, जिसने गम के पलों को भी गर्व में बदल दिया. पिता ने वतन के लिए कुर्बानी दी, मां भी अनंत यात्रा पर चलीं गईं, लेकिन बेटियों को नाज है देशभक्त पिता पर. फक्र है उस फौजी पर जिसने जिंदगी के गमों को दुखों की घड़ी को संयम के साथ सहने की ताकत दी.

जनरल ने बेटियों को सिखाया था, चाहे जो हो जाए, मैं रहूं या ना रहूं, मेरा वतन सलामत रहना चाहिए. वतन परस्ती का हौसला कायम रहना चाहिए. मेरे जाने का गम ना करना, क्योंकि वतन पर जिंदगी न्योछावर करने का मौका तो किस्मत वालों को ही मिलता है. जनरल रावत ने कई जंग के मैदान देखे, दुश्मनों को धूल चटाई, करगिल की बर्फीली चोटियां हो या फिर सीमापार आतंकियों के अड्डे. बारूद की महक से वास्ता कल भी था और आज भी दिखाई दिया. फर्क सिर्फ इतना था कि आज जंग का मैदान अलग था. आज तोपों की गड़गड़ाहट जरूर थी. कदम ताल का तारतम्य भी था. मगर ये सब इसलिए था क्योंकि जनरल रावत अंतिम पड़ाव पर आगे बढ़ रहे थे. सैकड़ों जवान अपने जनरल को आखिरी मोर्चे तक विदा करने आए थे और जब जनरल का काफिला निकला तो पूरा देश उनके साथ हो लिया. एक हाथ में तिरंगा तो दूसरे में जनरल की तस्वीर, जो जहां था वहीं से अंतिम प्रणाम किया.

सेना की गोरखा रेजिमेंट से थे जनरल बिपिन रावत 

गोरखा रेजिमेंट से आने वाले जनरल बिपिन रावत का गन कैरेज आज दिल्ली की जिन सड़कों से निकला, कोई ऐसा मोड़, कोई ऐसा चौराहा नहीं था, जहां जनरल के नाम की गूंज नहीं थी और जब दो घंटे बाद जनरल का काफिला अंतिम पड़ाव पर पहुंचा तो भी श्रद्धांजलि देने वालों का सैलाब उमड़ा था. तीनों सेनाओं के प्रमुख ने सीडीएस को सैल्यूट किया. रक्षा मंत्री ने भी दिलेर, दबंग, सख्त मगर सौम्य सेनापति को नमन किया. जब देश की मिट्टी में कोई जवान तपता है. अनुशासन की सीमाओं में पलता बढ़ता है. त्याग और बलिदान को अपने जीवन का सर्वस्व मान लेता है, जो कड़े और बड़े फैसले लेने में संकोच नहीं करता, तब जाकर लाखों में एक हीरा जनरल बीरा बनता है.

आज चाहे मंत्री हो या संतरी, आम हो या खास, अफसर हो या अर्दली, हर कोई जनरल रावत को श्रद्धांजलि देने उनके अंतिम दर्शन करने के लिए उनके घर पर पहुंचा था. जनरल रावत का इस तरह जाना दुखद जरूर है. किसी ने नियति के इस फैसले के बारे में नहीं सोचा था, लेकिन ये भी सही है कि आजाद भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब सेना के जनरल के आखिरी दर्शन के लिए प्रोटोकॉल के बंधन को हटा दिया गया. 3 कामराज मार्ग, जनरल रावत का घर हर देशवासी के लिए खुला था. कोई भी आकर उनके अंतिम दर्शन कर सकता था. एक वक्त ऐसा भी आया जब एक बुजुर्ग मां देश के लाल को देखकर भावुक हो गईं और ये तस्वीरें हर किसी का कलेजा चीर गईं.

यूं तो दिल्ली के बरार स्क्वॉयर ने कई सैनिकों को विदा किया, लेकिन जनरल रावत का आखिरी सफर कई मायनों में अलग था और खास था. जिन कंधों पर देश की सुरक्षा का दायित्व था, आज वो तिरंगे में लिपटकर मां भारती के चरणों में नमन कर रहा था. मानो देश का बहादुर बीरा कह रहा हो मां तेरी सेवा में कहीं कमी रह गई हो तो माफ कर देना, जितना कर सकता था किया, अब थक गया हूं. अब सोने जा रहा हूं. अब मुझे आशीर्वाद दे कि जल्द ही किसी मां की गोद से फिर जन्मूं और फिर तेरी मिट्टी में मिलने का प्रण लूं.

जनरल बिपिन रावत की बेटियों ने किया उन्हें विदा

आज जिस तरह जनरल बिपिन रावत की बेटियों ने उन्हें विदा किया, इसी तरह ब्रिगेडियर एलएस लिड्डर की इकलौती बेटी ने भी अपने हीरो को, अपने बेस्ट फ्रेंड को फाइनल सैल्यूट किया. नोट करनेवाली बात ये है कि दोनों के परिवार ने ऐसे मुश्किल वक्त में भी शौर्य के साथ-साथ संयम और धैर्य का परिचय दिया, क्योंकि एक फौजी ही अपने परिवार को ये साधना विरासत में सौंपता है. चेहरे पर ठहराव, हाथ में तिरंगा और तिरंगे के साथ अपनी बाहों में समेटे ब्रिगेडियर लिड्डर की तस्वीर. ये उस फौजी परिवार का जज्बा और धैर्य है, जिसने दो दिन पहले ही एक पिता को खोया, एक पति को अलविदा कहा. ब्रिगेडियर लखविंदर सिंह लिड्डर जनरल रावत के साथ उसी हेलिकॉप्टर में सवार थे जो नीलगिरि के पर्वतों में क्रैश हुआ था.

कल ब्रिगेडियर लिड्डर का पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया था और आज सुबह दिल्ली के बरार स्क्वॉयर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया. 17 साल की बेटी आशना ने पिता को मुखाग्नि दी. ये पल किसी को भी झकझोरने और भावुक करने वाला था. अभी कुछ दिन पहले की ही बात है ब्रिगेडियर लिड्डर ने अपनी बेटी के किताब लॉन्च होने की खुशी में जश्न मनाया था. ये किसी भी परिवार के लिए गर्व का मौका था और इस बार भी ब्रिगेडियर ने वादा किया था कि वो जल्दी घर लौटेंगे. बेटी आशना से फ्यूचर प्लान डिस्कस करेंगे, लेकिन ऐसा हो ना सका. सोचिए ऐसे वक्त में भावनाओं को रोककर, मन में उमड़ते सैलाब को समेटकर दुनिया से बात करना आसान नहीं है, लेकिन बहादुर अफसर की बहादुर बेटी आशना सामने आई, पिता को हीरो बताया और बेस्ट फ्रेंड कहा.

ब्रिगेडियर को अंतिम विदाई देनेवालों में खुद रक्षा मंत्री थे शामिल

वैसे आज दिल्ली के बरार स्क्वॉयर में ब्रिगेडियर को अंतिम विदाई देनेवालों में खुद रक्षा मंत्री शामिल थे. NSA अजित डोवल ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए. हरियाणा के चीफ मिनिस्टर खट्टर ने भी ब्रिगेडियर को याद किया, लेकिन ब्रिगेडियर की पत्नी ने जब पति के ताबूत को देखा तो खुद को रोक ना पाईं, इमोशनल हो गईं. पार्थिव शरीर को चूमा और फिर उन्हें विदा किया, आज जिस वक्त ब्रिगेडियर लिड्डर का अंतिम संस्कार हो रहा था तो गीतिका उसी तिरंगे को अपने हाथ में लेकर खड़ी थी, जिसमें ताबूत पर लपेटा गया था. उन्होंने तिरंगे को माथे पर लगाया और फिर कहा कि दुख तो है, लेकिन क्या करूं सैनिक की पत्नी हूं, अब उनकी यादों के साथ जीना है.

किस्मत कितनी क्रूर हो सकती है, इसका अंदाजा इस बात से भी लगता है कि ब्रिगेडियर लिड्डर जल्द ही मेजर जनरल बनने वाले थे. उनका प्रमोशन अप्रूव हो चुका था. CDS बिपिन रावत का स्टाफ छोड़कर डिविजन ऑफिसर की कमान संभालने वाले थे, लेकिन होनी को कुछ और मंजूर था. ब्रिगेडर आए जरूर, मगर शौर्य और कर्तव्य के पथ पर सर्वोच्च बलिदान देकर. वाकई ऐतिहासिक विदाई, क्योंकि अभी तक किसी भी जनरल को इस तरह की आखिरी विदाई नहीं दी गई थी. सीडीएस जनरल बिपिन रावत के अंतिम दर्शन में श्रीलंका, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश की सेनाओं के कमांडर भी पहुंचे और दिल्ली की सड़कों पर जनरल जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे.

करीब चार दशक सेना की सेवा करने वाले जनरल अनुशासन और ईमानदारी को अपनी जिंदगी का मूलमंत्र समझते रहे तो आइए अब सुनते हैं जनरल रावत से जुड़ी कुछ अनसुनियां कहानियां. जिसकी दहाड़ से दुश्मन कांपते थे, चीन-पाकिस्तान जैसे कुटिल देश दहल जाते थे आज वो अनंत यात्रा पर चला गया, मां भारती की गोद में हमेशा के लिए सो गया. जिस जनरल को सर्जिकल स्ट्राइक की महारत हासिल थी, जिसने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण का प्रण लिया था, आज वो पंचतत्व में विलीन हो गया. 135 करोड़ देशवासियों को रुला गया. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, सेना प्रमुख, सेना उप प्रमुख, संयुक्त राष्ट्र पीस कीपिंग फोर्स की अगुवाई. जनरल बिपिन रावत ने देश से विदेश तक सेना का मान बढ़ाया. सैन्य दलों की अगुवाई की और उनकी अगुवाई में ही डोकलाम पठार से लेकर लद्दाख तक चीनियों के खिलाफ भारतीय सैनिकों ने आक्रामक रुख दिखाया. पाकिस्तान को ईंट का जवाब पत्थर से दिया.

जवानों के लिए उपलब्ध कराया व्हाट्सएप नंबर 

भारतवर्ष माउंटेन वॉरफेयर के इस महायोद्धा को सीने में सम्मान के साथ ज़िंदा रखेगा. ऊंचाई पर जंग के इस महारथी को हमेशा याद किया जाएगा. जनरल को जानने वाले कहते हैं कि वो युद्ध के मैदान में जितने सख्त थे, आम जिंदगी में उतने ही सरल. सेना के सबसे बड़े अधिकारी, सीने पर दर्जनों मेडल. पहचान जनरल लेकिन लोकप्रियता जवानों के बीच और इसीलिए हर रविवार को उनका घर जवानों के लिए खुला होता था, जहां जनरल रावत उनकी हर छोटी-बड़ी शिकायतों का समाधान करते थे. सीडीएस बनने के बावजूद उन्होंने ये सिलसिला जारी रखा. सेना प्रमुख रहते जनरल रावत ने जवानों के लिए अपना व्हाट्सएप नंबर उपलब्ध कराया था ताकि वो सीधे चीफ से संवाद कर सकें.

जनरल के जवानों से लगाव का एक दिलचस्प किस्सा है. एक दिन एक जवान जनरल रावत के पास एक अजीब शिकायत लेकर आया. उस जवान को शराब की लत के कारण F-5 कैटेगरी में डालकर नौकरी से निकालने का आदेश जारी कर दिया गया था. उस जवान की शिकायत थी कि उसके अफसर को इसी गलती के कारण नशामुक्ति प्रोग्राम में डाला गया तो फिर उसके साथ भेदभाव क्यों? तब उसकी बात सुनकर जनरल रावत ने उसकी बर्खास्तगी का आदेश रद्द करवा दिया. दरअसल जनरल रावत को भेदभाव से चिढ़ थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस के हिमायती थे. वो अक्सर कहते थे कि भारतीय सशस्त्र बल सम्मान के लिए है, पैसे के लिए नहीं और इसीलिए जब इन्हें कोई गड़बड़ी देखी तुरंत जांच के आदेश दिए.

उन्होंने सैन्य आवास परियोजनाओं में घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे. सेना प्रमुख रहते उन्होंने कारों की खरीद पर 12 लाख रुपए की सीमा लगाई. आर्मी कैंटीन से मर्सिडीज और ब्लू लेबल व्हिस्की की खरीद पर रोक लगाई. मतलब जनरल रावत ने सैन्य कैंटीन की खरीद में बड़े सुधारों की शुरुआत की, क्योंकि उन्हें लगता था कि एक सामान्य अधिकारी या जवान के मौजूदा वेतन से ये सब संभव नहीं है और जो सीनियर आर्मी अफसर सैन्य कैंटीन से मर्सिडीज या ब्लू लेबल व्हिस्की जैसी चीजें खरीदकर उत्पाद शुल्क बचा रहे हैं, उन्हें ये खुले मार्केट से खरीदनी चाहिए.

शनिवार को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित की जाएंगी अस्थियां 

दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अस्थियां शनिवार को हरिद्वार में गंगा में प्रवाहित की जाएंगी. देश का बीरा आखिरी सफर पर निकला तो दिल्ली की सड़कों पर देशप्रेमियों का मेला उमड़ पड़ा. सैनिकों का हीरा आखिरी बार लोगों के बीच से गुजरा तो हर कोई उसे नमन करने निकल पड़ा. सुबह से जनरल बिपिन रावत के आवास पर अंतिम दर्शन करने वालों का तांता लगा. उनकी अंतिम यात्रा बरार स्कवायर के लिए रवाना हुई, तब भी जनरल जिंदाबाद के नारे इंद्रप्रस्थ की सड़कों पर गूंजते रहे. यानी जो दिल्ली में था या जो दिल्ली पहुंच सकता था, उसने सामने से जनरल को श्रद्धांजलि दी. लेकिन जो दिल्ली नहीं पहुंच सके उन्होंने टीवी9 भारतवर्ष के साथ उनकी शहादत को सलाम किया.

जम्मू से लेकर लखनऊ तक और पटना से लेकर मुंबई तक जनरल रावत को आखिरी विदाई दी गई. सुबह से लेकर शाम तक लोग #GeneralZindabadOnTv9 के साथ जुड़ते चले गए. मतलब पूरा देश एक जनरल के जाने पर फिक्र जता रहा था. साथ ही फख्र भी कर रहा था क्योंकि जनरल कभी मरते नहीं. पटना के कारगिल चौक पर TV9 भारतवर्ष द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में लोगों की भीड़ उमड़ी और CDS बिपिन रावत को नमन किया. जम्मू के वॉर मेमोरियल में सुबह से ही लोग श्रद्धांजलि देते रहे. यहां बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना भी पहुंचे और CDS रावत को नमन किया. शाम को जम्मू के रूप नगर में कैंडिल जलाकर लोगों ने जनरल रावत को श्रद्धांजलि दी. उनकी शूरवीरता को सलाम किया.

TV9 भारतवर्ष द्वारा लखनऊ के शहीद स्मारक में रखी गई श्रद्धांजलि सभा लोगों की भीड़ उमड़ी. लोगों ने यहां जनरल को याद किया, उनकी वीरता को नमन किया और TV9 भारतवर्ष की इस मुहिम को सराहा. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के समता चौक पर भी TV9 भारतवर्ष की तरफ से रखे गए श्रद्धांजलि सभा में CDS रावत को श्रद्धांजलि देने के लिए लोगों का तांता लगा रहा. वहीं शाम में न्यू मार्केट में लोगों ने कैंडिल जलाकर जनरल को आखिरी विदाई दी. शहर कोई भी हो उबाल देशप्रेम का था, मौका जनरल को आखिरी विदाई देने की थी और जहां भी टीवी9 भारतवर्ष ने जनरल के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया, वहां देशप्रेमियों का मेला लग गया.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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