तेजी से फैलता जा रहा ओमिक्रॉन का प्रकोप, नाइट कर्फ्यू के बाद दिन के खतरे पर कब तक होगा फैसला?

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron variant) के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. देश में ओमिक्रॉन के केस मिलने का रिकॉर्ड टूट गया ह...
Night Curfew

भारत में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron variant) के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं. देश में ओमिक्रॉन के केस मिलने का रिकॉर्ड टूट गया है और 1 दिन में रिकॉर्ड 135 ओमिक्रॉन से संक्रमित मिले और सिर्फ 27 दिन में 2 से बढ़कर 687 ओमिक्रॉन केस हो गए. दिल्ली से लेकर देहरादून तक, हरियाणा से लेकर कर्नाटक तक, सिर्फ एक जैसी बात. एक जैसा सवाल. बात नीयत की नहीं. कोरोना के खिलाफ नीति की है. लोग पूछते हैं कि आखिर ऐसी नीति का क्या फायदा.

दिल्ली में कोरोना के मामलों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई और पिछले 24 घंटों में 496 संक्रमित मिले. दिल्ली में साढ़े 6 महीने बाद सबसे ज्यादा नए केस
और 1 दिन में कोरोना के नए केस में 50% बढ़ोतरी हो गई. मुंबई में कोरोना के नए मामलों में बड़ा उछाल दर्ज आया है. मुंबई में पिछले 24 घंटों में 1377 नए संक्रमित मिले. 1 दिन में मुंबई में कोरोना के नए केस 70% बढ़ गए हैं.

दिन के खतरे पर बड़ा फैसला नहीं

ये सारे सवाल इसलिए हैं क्योंकि दिन के वक्त अभी ज्यादा रेस्ट्रिक्शन्स नहीं है. रैली में नेताओं के भाषण सुनने लोग आते हैं तो क्या कोरोना वहां नहीं है. बाजार में सुबह शाम पैर रखने की जगह नहीं. क्या तब कोरोना का खतरा नहीं. टूरिस्ट स्पॉट पर होटल फुल हैं. लोग पार्टी मूड में हैं. क्या संक्रमण का डर यहां नहीं, लेकिन अभी तक दिन के खतरे पर कोई बड़ा फैसला नहीं हुआ. सिर्फ चेतावनी जारी होती है और एडवाइजरी सामने आ जाती हैं.

लेकिन कोरोना के केस बढ़ते हैं तो सरकार के पास सबसे पहला और इजी ऑप्शन नाइट कर्फ्यू का होता है. इसलिए रात की पाबंदी शुरू हो जाती है. मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर ये वो राज्य हैं जहां फिलहाल नाइट कर्फ्यू लगा है. आने वाले वक्त में ये लिस्ट और लंबी हो सकती है, लेकिन जब हमारे रिपोर्टर ने रात को सड़कों पर घूमकर देखा तो उन्हें कितना कोरोना मिला और कोरोना के कितने सुपर स्प्रेडर. ये समझना मुश्किल नहीं है.

नाइट कर्फ्यू में क्या होता है?

दरअसल, नाइट कर्फ्यू में रात 8 बजे, 10 बजे या 11 बजे से सुबह 5 या 6 बजे तक लोगों के बाहर जाने पर पाबंदी होती है. तर्क ये है कि बेवजह भीड़ इकट्टी ना हो. सरकारों को लगता है कि इससे केसेस की संख्या में कमी आ सकती है.

दूसरी लहर की शुरुआत में पहले कई राज्यों ने नाइट कर्फ्यू लगाया था
लेकिन जब इससे हालात काबू नहीं हुए तो फिर लॉकडाउन लगाना पड़ा. हालांकि इस बार भी यही पैटर्न फॉलो हो रहा है, लेकिन दिन में भीड़ दिखाई देती है. रैली में लोग जुटते हैं तो इस पर एक्सपर्ट्स की अलग-अलग राय है. कुछ का मानना है कि सरकार सिचुएशन के हिसाब से फैसला करती है.

आखिर नाइट कर्फ्यू का पैरामीटर क्या?

तो सवाल है कि आखिर नाइट कर्फ्यू का पैरामीटर क्या है. ये कैसे तय किया जाए कि अब किसी जिले या फिर शहर, किसी राज्य में नाइट कर्फ्यू की नौबत है तो इसे लेकर राज्यों की अलग-अलग एक्शन प्लान हैं.

मिसाल के तौर पर अगर किसी शहर में पॉजिटिविटी रेट 5% से ज्यादा है तो फिर चिंता की बात है. ये वॉर्निंग के तौर पर देखा जाता है. इसीलिए उस शहर को पाबंदी लगाने के लिए कहा जाता है. इसी तरह अगर संक्रमण की रफ्तार 10% से ज्यादा है तो फिर सख्ती और बढ़ा दी जाती है. इस तरह का ट्रेंड अभी तक भारत में देखा गया है.

तो महाराष्ट्र में कोविड के खिलाफ 7 प्वाइंट एक्शन प्लान बना है इसमें क्लोज कॉन्टैक्ट्स की टेस्टिंग, फास्ट कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, हॉट स्पॉट पर मास टेस्टिंग जैसी चीजें शामिल हैं.

दिल्ली में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान

दिल्ली में कोरोना के खिलाफ ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान है. 4 लेवल पर अलर्ट तैयार किए गए हैं.

लगातार दो दिन संक्रमण दर 0.5% – लेवल 1 येलो अलर्ट
संक्रमण दर 1% से ज्यादा – लेवल 2 अंबर अलर्ट
संक्रमण दर 2 % से ज्यादा – लेवल 3 ऑरेंज अलर्ट
संक्रमण दर 5% से ज्यादा – लेवल 4 रेड अलर्ट

और चूंकि इस बार ओमिक्रॉन से तीसरी लहर की आशंका है और ये वेरिएंट काफी तेजी से फैलता है तो जिन राज्यों में ओमिक्रॉन के ज्यादा केस डिटेक्ट हो रहे हैं. वहां नाइट कर्फ्यू के आगे भी पाबंदियां शुरू हो चुकी हैं. जैसे दिल्ली में आज से येलो अलर्ट शुरू हो चुका है.

दिल्ली में नाइट कर्फ्यू के अलावा क्या-क्या पाबंदी

-शादी और अंतिम संस्कार में 20 लोगों को इजाजत मिली है.
-बाकी सभी तरह की गैदरिंग पर पहले से रोक है.
-दिल्ली मेट्रो 50% सिटिंग कैपेसिटी से चलेगी.
-ऑटो और कैब में दो यात्री बैठ सकते हैं.
-पार्क घूमने जा सकते हैं लेकिन पिकनिक नहीं मना सकते.
-रेस्टोरेंट और बार को 50% क्षमता के साथ मंजूरी.
-धार्मिक स्थल खुले रहेंगे लेकिन श्रद्धालुओं को जाने की इजाजत.

बात सिर्फ इतनी सी है कि अभी देश में ओमिक्रॉन के केस बढ़ रहे हैं, लेकिन ये उस लेवल पर नहीं है. जहां खतरा ज्यादा हो, इसीलिए सरकार अपने हिसाब से पाबंदियां लगा रही है और जहां तक रैली की बात है तो इसे लेकर फैसला चुनाव आयोग को करना है और जरूरत इस बात की भी है कि पॉलिटिकल पार्टीज भी भीड़ जुटाने से ज्यादा लोगों से एहतियात बरतने की अपील करें. हो सके तो डिजिटिल प्लेटफॉर्म पर रैली करें. इससे रैली भी हो जाएगी और भीड़ भी जमा नहीं होगी.

असल में दिल्ली में मरीजों की मुश्किल दोगुना बढ़ी हुई है क्योंकि जिन डॉक्टर्स को मरीजों का इलाज करना चाहिए. अस्पताल में होना चाहिए. वो हड़ताल पर चले गए. इसकी वजह से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों पर वर्कलोड बढ़ गया. मरीजों कई दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन इलाज करने वाला कोई नहीं. आज उस वक्त चिंता और बढ़ गई थी, जब aiims के डॉक्टर्स ने भी हड़ताल का सपोर्ट कर दिया था, लेकिन बाद में फैसला वापस ले लिया. पूरा मामला क्या है. रिपोर्ट से समझते हैं.

पिछले कई दिनों से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों की ये तस्वीरें दिखाई दी. मरीज के रिश्तेदार इलाज के लिए इधर से उधर घूम रहे थे, उनकी बात सुनेंगे तो अंदाजा होगा कि मजबूरी क्या है, परेशानी कितनी है.

दिल्ली में 11 दिनों से डॉक्टर हड़ताल पर

असल में पिछले 11 दिनों से दिल्ली समेत देशभर के रेजिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर थे. उन्होंने OPD और दूसरी सभी चिकित्सा सेवा से नाम वापस ले लिया था. इसके चलते दिल्ली के 6 सरकारी अस्पतालों को खामियाजा भुगतना पड़ा. सफदरजंग के अलावा LNJP, RML और लेडी हार्डिंग के रेजिडेंट डॉक्टर स्ट्राइक में शामिल हो गए. इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के बीच कई बैठक हुई..लेकिन कुछ हुआ नहीं और कल तो दिल्ली के बाहर जो तस्वीरें आईं उसने चिंता और बढ़ा दी.

पुलिस और डॉक्टर्स के बीच टकराव हुआ. पुलिस ने कई डॉक्टर्स को डिटेन तक कर लिया था. इसके बाद आज डॉक्टर्स की तरफ से कहा गया कि अगर मांगें नहीं मानी गई तो फिर कोविड वॉर्ड में भी काम बंद कर देंगे और एम्स के डॉक्टर्स की तरफ से भी इन्हें सपोर्ट मिला. लेकिन इस सबके बीच आज हेल्थ मिनस्टर मनसुख मांडविया ने डॉक्टरों के एक ग्रुप से बात की और उन्हें काम पर लौट जाने की अपील की.

क्यों डॉक्टर कर रहे हड़ताल

डॉक्टर्स NEET-PG एग्जाम के बाद काउंसलिंग में हो रही देरी का विरोध कर रहे हैं. असल में हर साल पीजी के लिए जनवरी में एग्जाम होता है और मई तक नए डॉक्टर जॉइन कर लेते हैं। इस साल एग्जाम जनवरी में नहीं हो पाया. कोविड का हवाला दिया गया. सितंबर में एग्जाम हुआ. रिजल्ट आ गया है, लेकिन काउंसलिंग नहीं हुई है. अभी तक काउंसलिंग की तारीख की घोषणा भी नहीं हुई है. मामला लगभग एक साल पीछे चला गया है. लगभग 45 से 47 हजार एमबीबीएस डॉक्टर पीजी करने के इंतजार में हैं.
इसी के चलते हड़ताल की गई.

एक ओर डॉक्टरों की हड़ताल और दूसरी ओर लोगों की लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती हैं क्योंकि इस वक्त देश में कोरोना का सुपर स्प्रेडर वेरिएंट ओमिक्रॉन जितनी तेजी से फैल रहा है. खतरा भी उतना ही बढ़ता जा रहा है. ये खतरा कितना बड़ा हो सकता है और ओमिक्रॉन को सुपर स्प्रेडर वैरिएंट क्यों कहा जा रहा है. इसे समझने के लिए आपका ये जानना जरूरी है कि ओमिक्रॉन का एक संक्रमित कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है.

और ये जानने का पैमाना होता है वायरस के वेरिएंट्स का R फैक्टर यानी reproduction number… जो बताता है कि एक संक्रमित कितने लोगों में वायरस फैला सकता है. कोरोना के ओरिजनल स्ट्रेन से संक्रमित एक व्यक्ति तीन लोगों को संक्रमित करता था. फिर अल्फा वेरिएंट आया, तो ये आंकड़ा बढ़कर पांच हो गया. डेल्टा वेरिएंट में सात हो गया, लेकिन ओमिक्रॉन का R फैक्टर डेल्टा से पांच गुना ज्यादा है. बताया जा रहा है कि इससे संक्रमित एक शख्स 35 लोगों को संक्रमित कर रहा है. यही वजह है कि ओमिक्रॉन सिर्फ 35 दिन में दुनिया के 119 देशों में फैल चुका है, जिनमें भारत भी शामिल है.

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तेजी से फैलता जा रहा ओमिक्रॉन का प्रकोप, नाइट कर्फ्यू के बाद दिन के खतरे पर कब तक होगा फैसला?
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