फुलप्रूफ प्रोटोकॉल के बावजूद क्यों क्रैश हुआ हेलिकॉप्टर? CDS बिपिन रावत और 12 अन्य की मौत पर उठ रहे सवाल

हर कोई जानता है कि देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की सुरक्षा बेहद सख्त होती है. सीडीएस जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) के साथ हमेशा कई कमां...
Bipin Rawat

हर कोई जानता है कि देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की सुरक्षा बेहद सख्त होती है. सीडीएस जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) के साथ हमेशा कई कमांडो होते थे. वो देश के सबसे फुलप्रूफ विमान से सफर करते थे. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर सीडीएस का हैलिकॉप्टर क्रैश कैसे हुआ? हेलिकॉप्टर दुर्घटना की खबर और तस्वीरों के आते ही पूरा देश हैरान हो गया. जिस जगह जनरल बिपिन रावत का हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ, वो तमिलनाडु का बेहद घने जंगलों वाला नीलगिरी की पहाड़ी का इलाका है.

हेलिकॉप्टर की हालत बयां कर रही थी कि ये हादसा बेहद भयानक था, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि आखिर जिस हेलिकॉप्टर में सीडीएस सवार थे वो इतनी आसानी से क्रैश कैसे हो सकता है? आपको बता दें कि जब भी कभी VVIP को हेलिकॉप्टर से ट्रैवल करना होता है, तो उसके लिए एक बहुत ही फुलप्रूफ प्रोटोकॉल को अपनाया जाता है और सीडीएस स्तर के अधिकारी के ट्रैवल करते समय भी यही प्रोटोकॉल मानने होते हैं.

प्रोटोकॉल कहता है कि- इस दौरान दो हेलिकॉप्टर एक साथ उड़ान भरा करते हैं और ये भी जरूरी होता है कि जिस हेलिकॉप्टर में सीडीएस जैसे अधिकारी सफर कर रहे हों, वो डबल इंजन वाला हेलिकॉप्टर हो. Mi सीरीज का जो हेलिकॉप्टर हादसे का शिकार हुआ, वो भी डबल इंजन वाला ही था. इसमें डबल इंजन इसलिए लगे होते हैं कि अगर एक इंजन में खराबी आ जाए तो दूसरा इंजन हेलिकॉप्टर को डेस्टिनेशन तक पहुंचा सके.

फिर यहां सवाल ये उठता है कि आखिर दो इंजन वाला हेलिकॉप्टर वेलिंगटन तक क्यों नहीं पहुंच सका, जहां पर सेना के सबसे प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विस स्टाफ कॉलेज में सीडीएस रावत को लैक्चर देना था. आपको टॉप सोर्सेस के हवाले से बता दें कि घना जंगल और कम विजिबिलिटी ही सीडीएस के हेलिकॉप्टर के हादसे की वजह बनने की आशंका है. खराब मौसम की वजह से बादलों में उड़ान भरते समय विजिबिलिटी कम होती है, इसलिए हेलिकॉप्टर को कम ऊंचाई पर उड़ान भरनी पड़ती है और लैंडिंग पॉइंट सिर्फ दस किलोमीटर दूर रह जाने की वजह से भी हेलिकॉप्टर काफी नीची उड़ान भर रहा था.

हादसे के पीछे खराब मौसम को बताई जा रही वजह

ऐसा माना जा रहा है कि नीचे घने जंगल थे इसलिए क्रैश लैंडिंग भी फेल हो गई. चूंकि इस Mi-17V5 हेलिकॉप्टर के पायलट विंग कमांडर पृथ्वी सिंह चौहान और सीओ रैंक के अधिकारी थे. ऐसे में मानवीय चूक की आशंका ना के बराबर बताई जा रही है. हेलिकॉप्टर हादसे को लेकर अभी जितने भी कारण बताए जा रहे हैं, वो खराब मौसम और तमाम आशंकाओं को लेकर है. इसकी असल वजह तब सामने आएगी, जब ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की जांच होगी.

सीडीएस बिपिन रावत को जानने वाले कहते हैं कि वो हमेशा देश की सुरक्षा और एक सैनिक की जिम्मेदारी की बात करते थे. यहां तक कि अपने ससुराल में भी एक सैनिक स्कूल खोलना चाहते थे. आपको बता दें कि सीडीएस बिपिन रावत का ससुराल मध्य प्रदेश के शहडोल में है, जो एक आदिवासी बहुल इलाका है.

हेलिकॉप्टर क्रैश की घटना कुन्नूर के काटेरी गांव में घटी

तमिलनाडु के कुन्नूर में जिस जगह हेलिकॉप्टर क्रैश हुआ है, वहां पर आसपास घना जंगल है. यही कारण रहा कि रेस्क्यू ऑपेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. हेलिकॉप्टर क्रैश की घटना कुन्नूर के काटेरी गांव में घटी है. ये इलाका अपर कुन्नूर क्षेत्र में आता है. समुद्र तल से 1850 मीटर ऊपर है और नीलगिरी की पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इसमें 14 से ज्यादा नुकीले शिखर हैं- जैसे डोड्डाबेट्टा चोटी, स्नोडन, कुलकोम्बाई… इस रेंज की सबसे ऊंची चोटी डोड्डाबेट्टा है. कुन्नूर के काटेरी गांव के चारों तरफ भी नीलगिरी की ऊंची ऊंची पहाड़ियां हैं और जंगल हैं.

वैसे पूरा कुन्नूर ही घने जंगलों से घिरा है. कुन्नूर नीलगिरी माउंटेन रेंज में दूसरा सबसे बड़ा हिल स्टेशन है. इसे ‘क्वीन ऑफ हिल स्टेशन’ भी कहते हैं. यहां पर कई बड़े चाय के बागान भी हैं. यहीं से टी एस्टेट की शुरुआत भी हो जाती है. वैसे सीडीएस का हेलिकॉप्टर नीलगिरी के जंगलों में क्रैश हुआ है. जानकारी के मुताबिक, नीलगिरी रेंज बहुत ही नुकीले पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा है. ऐसे में इन क्षेत्रों में उड़ान भरने के दौरान रडार से संपर्क टूटता रहता है और हेलिकॉप्टर चलाने के लिए पायलट को अपनी आंखों और अनुभव पर ज्यादा भरोसा करना होता है.

ऐसे में एक चूक बड़े हादसे का रूप ले लेती है. ऐसा ही नीलगिरी पहाड़ी क्षेत्र में भी है. हेलिकॉप्टर के लिए चोटियों के बीच उड़ान भरते समय रडार स्टेशन से संपर्क नहीं बना पाते हैं. धुंध और कम विजिबिलिटी में ये और मुमकिन नहीं हो पाता और हेलिकॉप्टर उड़ाना कठिन हो जाता है. नीलगिरी पहाड़ी क्षेत्र में अक्सर धुंध का भी सामना करना पड़ता है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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