Russia-Ukraine War: ड्रोन पावर के जरिए रूस को सबक सिखाना चाहते हैं जेलेंस्की, अमेरिका कर रहा पूरी मदद

आखिर ब्रिटेन और अमेरिका ( America ) ये क्यों कह रहे हैं कि मारियुपोल ( Mariupol ) पर रूसी कब्जा ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा, तो आपको बता दें...
Volodymyr Zelenskyy

आखिर ब्रिटेन और अमेरिका (America) ये क्यों कह रहे हैं कि मारियुपोल (Mariupol) पर रूसी कब्जा ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगा, तो आपको बता दें इसके पीछे अमेरिका के वो हाइटेक हथियार हैं जिन्हें वो यूक्रेन (Ukraine) भेज रहा है. इनमें सबसे ज्यादा चौंकानेवाला नाम है Ghost Drones का. प्रेसिडेंट बाइडेन ने कहा था कि वो यूक्रेन को 121 टैक्टिकल ड्रोंस सप्लाई करने वाले हैं. शुक्रवार को इसकी नई और बेहद चौंकानेवाली डिटेल्स सामने आई हैं. पेंटागन की तरफ से कहा गया कि यूक्रेन को सपोर्ट करने के लिए ही Ghost Drones तैयार किए गए हैं. अभी तक ज्यादातर मुल्कों को इस ड्रोन के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन अमेरिकी डिफेंस सोर्सेस के मुताबिक इस ड्रोन का पूरा नाम Phoenix Ghost है.

इस मिस्ट्री एयरक्राफ्ट को कैलिफोर्निया स्थित Aevex Aerospac नाम की कंपनी ने बनाया है. अमेरिका के Air Force drone program के तहत ही इस Unmanned Aerial Vehicle को डेवलप किया गया है. वैसे drone program काफी पहले से जारी थी, लेकिन यूक्रेन पर रूसी इंवेजन के बाद से इसमें तेजी आई और जल्द से जल्द ऐसा ड्रोन तैयार किया गया जो यूक्रेन specific requirements को match कर रहा था. US डिफेंस सोर्सेस के मुताबिक Phoenix Ghost ड्रोन 6 घंटे तक लगातार उड़कर टारगेट को ट्रैक कर सकता है. ये ड्रोन Infrared sensors के जरिए रात के वक्त भी ऑपरेशनल रहता है.

डोनबास रीजन के लिए बेहद मददगार साबित होंगे ड्रोंस

Phoenix Ghost को one-way aircraft भी कहा जाता है और ये medium armored ground targets के खिलाफ काफी असरदार है यानी आर्मर्ड व्हीकल जैसे high value targets से टकराकर पूरी तरह बर्बाद कर सकता है. US डिफेंस के मुताबिक फीनिक्स ड्रोन स्विचब्लेड से भी ज्यादा ज्यादा कारगर है और उससे ज्यादा देर तक हवा में रह सकता है. US ऑफिशियल्स का ये भी कहना है कि ये ड्रोंस यूक्रेन के डोनबास रीजन के लिए बेहद मददगार साबित होंगे, क्योंकि डोनबास का पूरा इलाका अमेरिका के kansas जैसा है और इसी जगह को ध्यान में रखकर ड्रोंस को डिजाइन किया गया है.

ड्रोन पावर के जरिए रूस को सबक सिखाना चाहते हैं जेलेंस्की

वैसे जिस कंपनी ने फीनिक्स ड्रोन बनाया है, उसने ड्रोन के टेक्निकल specifications के बारे में ज्यादा डिटेल जारी नहीं की. ऐसा इसलिए ताकि रूस इसे लेकर कोई Counter military equipment डिप्लॉय ना कर सके, लेकिन सवाल तो ये भी है कि अब जेलेंस्की को टैंक्स के मुकाबले ड्रोंस पर क्यों भरोसा है. इसमें कोई शक नहीं कि रूस की सेना बड़ी है. उसके पास हाइटेक हथियार हैं. स्पेस में सैटेलाइट को मार गिरानेवाली सैटेलाइट है, लेकिन जब बात ड्रोंस की आती है तो यूक्रेन फ्रंट पर रूसी सेना काफी पिछड़ती हुई दिखाई दी. कम से कम यूक्रेन और वेस्टर्न मीडिया का तो यही दावा है. जेलेंस्की ड्रोन पावर के जरिए रूस को सबक सिखाना चाहते हैं और अमेरिका उनकी मुराद पूरी कर रहा है.

अमेरिका यूक्रेन को 72 155mm Howitzers और 144,000 artillery rounds देगा. साथ ही 72 Tactical Vehicles दिए जाएंगे. अमेरिका 121 से ज्यादा Phoenix Ghost Tactical UAV देगा. इसके साथ फील्ड इक्विपमेंट और स्पेर पार्ट्स भी मुहैया कराएगा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ये हथियार वक्त पर पहुंच गए तो जेलेंस्की को सबसे ज्यादा मदद ड्रोंस से ही मिलेगी, क्योंकि यूक्रेन वॉर के नियम ड्रोन्स के जरिए हो रहे हैं. इस समय यूक्रेन के पास 300 मिलिट्री ड्रोन की पूरी फ्लीट है. तुर्की से मिला Bayraktar TB2 ड्रोन हैं. अमेरिका से मिला स्विचब्लेड ड्रोन भी मौजूद हैं. खुद के बनाए A1-SM Fury और Leleka-100 ड्रोंस भी मौजूद हैं. हालांकि ये ड्रोन दुश्मन की रेकी के लिए बनाए गए हैं.

यूक्रेन का दावा है कि तुर्की के मिले ड्रोंस की वजह से रूस को कई जगहों पर हार का सामना करना पड़ा है. कीव के लंबे चौड़े टैंक्स के काफिले को कई बार इन ड्रोंस ने ही काउंटर किया और कई टैंक्स की कब्र खोद दी. इसके अलावा रूस के कई surface-to-air missile systems और command posts को भी बर्बाद कर दिया दिया. ऐसा नहीं है कि रूस के पास ड्रोंस की कोई कमी है. रूस के पास भी एक से बढ़कर एक ड्रोंस हैं. रूस की ड्रोन फ्लीट में कम से कम 11 अलग अलग ड्रोंस हैं. Zala Kyb को उड़ता बारूद कहा जाता है. हंटर, थंडर, एल्टियस, सीरियस, ओरायन जैसे भी ड्रोंस मौजूद हैं. इसके अलावा एलिरोन 3, ओरलान-10 और लीर 3 जैसे ड्रोंस भी फ्लीट का हिस्सा हैं. सीरिया और यूक्रेन में रूस ने एलिरोन और ओलरान का इस्तेमाल किया है.

रूस के पास नहीं है काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी

वहीं रूस के ड्रोंस यूक्रेन में ज्यादा कारगर इसलिए नहीं है, क्योंकि रूस के पास काउंटर ड्रोन टेक्नोलॉजी नहीं है. इसके चलते ही यूक्रेन का डिफेंस ज्यादा मजबूत है, जबकि रूस को डिफेंस के लिए electronic warfare systems पर निर्भर रहना पड़ता है, लेकिन सीरिया और आर्मेनिया में रूसी तकनीक तुर्की के ड्रोन के सामने कमजोर पड़ गई, इसीलिए यूक्रेन को लगता है कि अगर डोनबास को दोबारा जीतना है तो फिर ड्रोन फाइट में उनका UPPER HAND रहेगा.

देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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Nishpaksh Mat

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Russia-Ukraine War: ड्रोन पावर के जरिए रूस को सबक सिखाना चाहते हैं जेलेंस्की, अमेरिका कर रहा पूरी मदद
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