Ahmedabad Blast: 4 महीने तक घर गए बगैर जांच करती रही टीम, जानिए दोषियों की गिरफ्तारी से लेकर सजा तक की पूरी कहानी

अहमदाबाद में जुलाई 2008 के सीरियल बम ब्लास्ट मामले ( Ahmedabad Serial Blast Case ) में शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट ( Special Court ) ने दोषियो...
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अहमदाबाद में जुलाई 2008 के सीरियल बम ब्लास्ट मामले (Ahmedabad Serial Blast Case) में शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट (Special Court) ने दोषियों की सजा का ऐलान कर दिया है. कोर्ट ने 49 में से 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जबकि 11 दोषियों को आखिरी सांस तक कैद में रहने की सजा सुनाई गई. दोषियों को सजा सुनाने के अलावा कोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया.

आपको बता दें कि 8 फरवरी को स्पेशल कोर्ट ने इन सभी को दोषी करार दिया था. जबकि 28 आरोपियों को बरी कर दिया था. यानी कुल 77 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था, जिनमें से 28 सबूतों के अभाव में बरी हो गए थे. दरअसल 26 जुलाई 2008 को सीरियल बम ब्लास्ट के बाद अहमदाबाद में 20 और सूरत में 15 FIR दर्ज हुई.

दिसंबर 2009 से सुनवाई शुरू हुई. कोर्ट ने सभी 35 FIR को एक कर दिया. 1,163 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. 6 हजार से ज्यादा सबूत पेश हुए. कुल 78 आरोपी थे जिनमें एक सरकारी गवाह बन गया. बाद में 77 आरोपियों पर केस चला. अब जानिए कि अहमदाबाद बम ब्लास्ट के गुनहगारों के खिलाफ गुजरात पुलिस ने कैसे सबूत जुटाए. आतंकियों की गिरफ्तारी से लेकर सजा तक की पूरी कहानी क्या है.

26 जुलाई 2008,  यही वो तारीख थी जिस दिन आतंकियों ने साइकिल में टिफिन बम लगाकर जगह-जगह विस्फोट किया और सीरियल बम ब्लास्ट से अहमदाबाद दहल उठा था. 70 मिनट तक 21 धमाके हुए थे, जिसमें 56 लोगों की मौत हो गई. 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

2002 के गोधरा कांड का बदला लेने के लिए किया गया ब्लास्ट

इस ब्लास्ट की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन के संगठन हरकत उल जिहाद अल इस्लामी ने ली. भटकल बंधु यानी रियाज, इकबाल और यासीन भटकल उस ब्लास्ट के मुख्य सूत्रधार थे. 2002 के गोधरा कांड का बदला लेने के लिए इंडियन मुजाहिदीन ने अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट किया.

इससे पहले केरल के वाघमोर के जंगलों में आतंकियों ने ब्लास्ट की ट्रेनिंग ली. आतंकियों की एक टीम ट्रेन से अहमदाबाद आई. मुंबई से कार में विस्फोटक लाए गए. कार से ही अहमदाबाद और सूरत में विस्फोटक पहुंचाए गए. 13 साइकिल खरीदी गईं और स्लीपर सेल का इस्तेमाल किया गया. ये तो हुई टेरर प्लानिंग की बात. लेकिन अब जानिए कि इतने बड़ी साजिश को जांच टीम ने कैसे ट्रैक किया. कैसे सबूत जुटाए गए और फिर कोर्ट ने पहली बार इतने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई.

26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद में सीरियल ब्लास्ट के वक्त अहमदाबाद के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर आर वी असारी गोधरा में ड्यूटी कर रहे थे. तभी इन्हें सीनियर ने सबूत जुटाने का ऑर्डर दिया. आतंकवादियों ने ब्लास्ट में इस्तेमाल सामग्री कहां तैयार की और बम कहां बनाए गए. सबकुछ पता लगाने को कहा गया. इस बीच कई पुलिस अफसर जांच टीम में शामिल हो गए. बाद में इनकी संख्या 350 तक पहुंच गई.

चार महीने तक घर जाए बगैर जांच करती रही टीम

सीरियल ब्लास्ट के इन्वेस्टिगेशन के दौरान इन्हें एक लिंक मिला. इससे पता चला कि आतंकवादियों ने दाणीलीमड़ा इलाके के एक घर में बम रखा था. यहां पहुंचकर जांच टीम को आतंकवादी गतिविधि के पक्के सबूत हासिल हुए. उस वक्त टीम के ऊपर जल्द से जल्द पूरा केस खोलने का दबाव था. लिहाजा पूरी इन्वेस्टिगेटिव टीम सुबह के नाश्ते के बाद रात तक भूखे प्यासे काम करती थी.

चार महीने तक जांच टीम के लोग घर तक नहीं गए थे. पूरे देश में छिपे धमाके से जुड़े आतंकियों का पता लगाया और उन्हें अहमदाबाद क्राइम ब्रांच लाया गया. कर्नाटक से आतंकियों को लेकर टीम चली तो 1163 किलोमीटर दूर आकर सीधा अहमदाबाद में ही रुकी. इसी तरह उज्जैन से भी आतंकवादियों को लाया गया. इस पूरे इन्वेस्टिगेशन के बाद इस बात पर मुहर लग गई कि ये गुजरात पुलिस की सबसे बेस्ट इंवेस्टिगेशन टीम में से एक है क्योंकि इस टीम ने गुजरात पुलिस के एक बहुत बड़े चैलेंज को सॉल्व किया. कोर्ट में सबूत पेश किए, तब जाकर 13 साल 7 महीने बाद दोषियों को कोर्ट से सजा मिल सकी.

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