Hijab Controversy: कर्नाटक से दूसरे राज्‍यों तक पहुंचा हिजाब विवाद, राजनीतिक गलियारों में बढ़ा सियासी पारा, जानिए कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक में हिजाब VS भगवा को लेकर जबरदस्त बवाल जारी है. नौबत यहां तक पहुंच गई कि कर्नाटक के स्कूल कॉलेजों को...
Hijab Muslim Pti

Karnataka Hijab Controversy: कर्नाटक में हिजाब VS भगवा को लेकर जबरदस्त बवाल जारी है. नौबत यहां तक पहुंच गई कि कर्नाटक के स्कूल कॉलेजों को तीन दिन के लिए बंद करना पड़ा. कुछ जगहों पर पत्थरबाजी की घटनाएं हुई. हिजाब और भगवा के नाम पर हिंसा भड़की. हालात काबू करने के लिए एक जिले में धारा 144 लगानी पड़ी. हाईकोर्ट ने भी इस मामले में सुनवाई की और कह दिया कि भावना से नहीं सिर्फ कानून से चलेंगे. इसी के हिसाब से फैसला लेंगे. संविधान हमारी भगवद गीता है. इस खबर के जरिए हम आपको बताएंगे कि हाईकोर्ट को इतनी तीखी टिप्पणी क्यों करनी पड़ी. इस पूरे मामले का बैकग्राउंड भी समझाएंगे. कर्नाटक सरकार के उस फैसले की बात करेंगे, जिसे लेकर मामले ने तूल पकड़ा.

वहीं, शिमोगा में कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी तक हिजाब वर्सेस भगवा खुलकर दिखाई देने लगा. पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में जबरदस्त हंगामा मचा. पत्थरबाजी और बढ़ते हंगामे के बीच शिमोगा जिले में धारा 144 लगा दी गई. पुलिस लाउडस्पीकर से शांति की अपील करने लगी. कॉलेज प्रशासन छुट्टी की घोषणा करने लगा. इन सबके वावजूद बवाल बढ़ता रहा. हिजाब पर हंगामा बढ़ा तो कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक रिएक्शन आने लगे. नेताओं ने अलग अलग तर्क दिए. किसी ने कहा कि जो लोग हिजाब के फेवर में है. उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए तो किसी ने इसमें गजवा ए हिंद का एंगल ढूंढ लिया. हालांकि इस सबके बीच कुछ और कॉलेज में प्रोटेस्ट की खबर आई. पथराव की तस्वीरें सामने आने लगी. हालात बेकाबू होता देख पुलिस ने मोर्चा संभाला. सख्ती भी बरती. एमजीएम कॉलेज में मुस्लिम छात्राओं ने हिजाब के लिए हक की आवाज़ उठाई तो दूसरे पक्ष ने भगवा गमछे को कॉलेज में मंजूरी देने की मांग की. दरअसल पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में हिजाब को लेकर जबरदस्त हंगामा मचा है.आज हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले ही बवाल और बढ़ गया. हिजाब को लेकर बढ़ते विवाद को देखते हुए सीएम ने हाई स्कूल और कॉलेज को अगले तीन दिनों तक बंद करने का आदेश दे दिया.

1 जनवरी को शुरू हुआ था विवाद

दरअसल कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद 1 जनवरी को शुरू हुआ था. तब उडुपी में 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कॉलेज में क्लास रूम में बैठने से रोक दिया गया. कॉलेज मैनेजमेंट ने नई यूनिफॉर्म पॉलिसी को इसकी वजह बताया. इसके बाद इन लड़कियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की. लड़कियों का तर्क है कि हिजाब पहनने की इजाजत न देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 25 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन है. एक कॉलेज से शुरू हुआ विवाद दूसरे कॉलेजों में भी पहुंच गया. वहां भी हिजाब पहनी छात्राओं को कॉलेज में प्रवेश नहीं दिया गया. ये विवाद तब और और भड़क गया जब एक और समूह के छात्रों ने कॉलेज में भगवा गमछा, स्कॉर्फ, और साफा पहनकर कर आना शुरू किया और जय श्री राम के नारे लगाए.

हिजाब बनाम भगवा स्कार्फ तक कैसे पहुंच?

अब सवाल उठता है कि कर्नाटक के कॉलेज का यूनिफॉर्म विवाद. हिजाब बनाम भगवा स्कार्फ तक कैसे पहुंच गया. क्या इसे राजनीति के रंग में रंगा जा रहा है? क्योंकि इसकी धमक दिल्ली से यूपी तक सुनी जा रही है. इस सबके बीच आज ये मामला कर्नाटक हाईकोर्ट पहुंच गया. कोर्ट ने मुस्लिम छात्राओं की चार याचिकाओं पर सुनवाई की. लड़कियों के वकील के सामने राज्य के एडवोकेट जनरल (AG) ने सरकार का पक्ष रखा.कोर्ट ने इस बारे मे कुछ टिप्पणी की. हाईकोर्ट ने कहा, ‘हम किसी के जुनून या भावनाओं से नहीं. बल्कि कानून और संविधान के मुताबिक चलेंगे जो संविधान कहेगा हम वही करेंगे.संविधान हमारे लिए भगवत गीता है.’

कल मामले की सुनवाई होगी

जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की बेंच ने कहा, एक मामले में जो भी फैसला होगा वो सभी याचिकाओं पर लागू होगा. पीठ ने याचिकाकर्ता से ये पूछा, कुरान का कौन सा पन्ना कहता है कि हिजाब जरूरी है? जज ने कोर्ट की लाइब्रेरी से कुरान की एक कॉपी भी मांगी. याचिकाकर्ता ने पवित्र कुरान की आयत 24.31 और आयत 24.33 का जिक्र किया कहा आयतों के मुताबिक सिर पर दुपट्टा या सिर पर घूंघट आवश्यक धार्मिक कार्य है.याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि एक सोर्स कुरान.कॉम से है और इसे प्रामाणिक कुरान कहा जाता है. भारत से लेकर विदेशों तक कई फैसलों में पवित्र कुरान के इन दो आदेशों की व्याख्या की गई है. असल में याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि सरकार को मामले में उदारता दिखानी चाहिए. सरकार को चाहिए कि वर्दी के रंग का हिजाब पहनने की इजाजत दे. इन सारी बातों पर हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे लिए संविधान भगवद गीता है. हमें संविधान के अनुसार काम करना है.अब कल मामले की सुनवाई होगी.

सभी छात्रों को एक समान पोशाक पहननी चाहिए-कानून

दरअसल, देश का कानून सभी देशवासियों को अपने धर्म और पसंद के मुताबिक पहनावे का अधिकार देता है. इन अधिकारों को लेकर कोई विवाद भी नहीं हुआ है लेकिन कर्नाटक में कर्नाटक शिक्षा कानून-1983 लागू है. ये कानून कहता है कि सभी छात्रों को एक समान पोशाक पहननी चाहिए. ये कानून कहता है कि स्कूल में सभी छात्र एक समान पोशाक में दिखने चाहिए. ये कानून कहता है कि कर्नाटक के स्कूलों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. हिजाब पर विवाद खड़ा होने के बाद कर्नाटक में सरकार ने पहले से लागू इसी कानून को सख्ती से अमल में लाने को कहा. इस कानून से साफ है कि कर्नाटक सरकार ने देश के संविधान के मुताबिक शिक्षा का स्वरूप. धर्मनिरपेक्ष बनाए रखने के लिए स्कूलों में किसी भी तरह के धार्मिक पोशाक की मंजूरी नहीं दी थी. कर्नाटक की सरकार चाहती है कि छात्र ऐसे वातावरण में पढ़े जहां उन्हें धर्म के आधार पर भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़े..और ना ही उनके बीच धार्मिक भेदभाव के भाव विकसित हों.

हिजाब विवाद अब दूसरे राज्यों तक पहुंच चुका है

कर्नाटक से शुरू हुआ हिजाब विवाद अब दूसरे राज्यों तक पहुंच चुका है. तेलंगाना में भी हिजाब को लेकर आज विवाद गरमाता दिखा. हैदराबाद में मुस्लिम छात्राओं और महिलाओं ने प्रदर्शन किया. गोलकोंडा इलाके में 7 टॉम्बस के पास इस्लामिक आर्गेनाईजेशन की छात्राएं और महिलाएं प्लेकार्डस लेकर स्कूलों में हिजाब पहनने के अधिकारों की मांग की. स्कूल से निकला ये विवाद सड़कों तक पहुंच गया है. आज मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने भी इस पर बयान दिया है..एमपी के शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा हिजाब पर प्रतिबंध लगना ही चाहिए क्योंकि ये स्कूल यूनिफार्म का हिस्सा नहीं है. वैसे जिस हिजाब को लेकर इतना बवाल हुआ..वो आखिर होता क्या है. हिजाब नकाब और बुर्के से किस तरह अलग होता है. आज ये भी आपको समझाते हैं. हिजाब का मतलब पर्दे से है. हिजाब में बालों को पूरी तरह से ढकना होता है.यानी हिजाब का मतलब सिर ढकने से है.लेकिन महिला का चेहरा दिखता रहता है.जहां तक नकाब की बात है तो ये एक तरह से कपड़े का परदा होता है, जो सिर और चेहरे पर लगा होता है. इसमें महिला का चेहरा भी नज़र नहीं आता है. हालांकि नकाब में आंखें कवर नहीं होती हैं. बुर्का परिधान में मुस्लिम महिलाओं का पूरा शरीर ढका होता है. आंखों के लिए बस एक जालीनुमा कपड़ा होता है.

हिजाब, नकाब और बुर्का मुस्लिम महिलाओं के परिधान

अब इसमें तो कोई दो राय नहीं कि हिजाब, नकाब और बुर्का मुस्लिम महिलाओं के परिधान हैं लेकिन ध्यान देनेवाली बात ये भी है कि अलग अलग देशों में इन्हे पहनने को लेकर अलग अलग नियम भी हैं. सऊदी अरब में महिलाएं अबाया नाम की ढीली ढाली पोशाक पहनती हैं.इसे हिजाब,नकाब या बुर्के के साथ पहनना जरूरी है. ईरान में महिलाओं के पोशाक को लेकर नियम काफी सख्त है. यहां 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ही हिजाब पहनना जरूरी है.महिलाओं को पब्लिक प्लेसेस पर ढीले-ढाले कपड़े पहनने और सिर और गर्दन ढकने का आदेश है. हालांकि पाकिस्तान और इंडोनेशिया में महिलाओं को बुर्का या हिजाब पहनने की बाध्यता नहीं है..हिजाब पहनना है या नहीं..ये महिलाएं खुद तय करती हैं. लेकिन कुछ ऐसे देश भी हैं जहां बुर्का पहनना पूरी तरह बैन है..इसमें फ्रांस, चीन, डेनमार्क, जर्मनी, श्रीलंका, बेल्जियम, कैमरून और इटली जैसे देश शामिल हैं.

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Hijab Controversy: कर्नाटक से दूसरे राज्‍यों तक पहुंचा हिजाब विवाद, राजनीतिक गलियारों में बढ़ा सियासी पारा, जानिए कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत
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