गलवान घाटी में शामिल PLA कमांडर को मशाल वाहक बनाना पड़ा चीन को पड़ा महंगा, बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा नहीं लेगा भारत

इतिहास गवाह है 1962 से अबतक चीन ( China ) कभी भी भारत के लिए भरोसेमंद नहीं रहा है और ड्रैगन भारत के खिलाफ हर मंच का इस्तेमाल करता रहा है. ...
Qi Fabao

इतिहास गवाह है 1962 से अबतक चीन (China) कभी भी भारत के लिए भरोसेमंद नहीं रहा है और ड्रैगन भारत के खिलाफ हर मंच का इस्तेमाल करता रहा है. आज भी चीन अपने यहां हो रहे विंटर ओलंपिक के मंच को भारत का अपमान करने के लिए इस्तेमाल कर रहा है. उसने एक ऐसी हरकत कर दी, जिससे उसकी मंशा एक बार फिर पूरी दुनिया के सामने उजागर हो गई. चीन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (Peoples Liberation Army) के कायर सैनिक को भारत के गुनहगार को ओलंपिक जैसे खेल में मशाल वाहक Torch bearer बना दिया है. चीन की इस साजिश पर भारत ने सख्त नाराजगी जताई है. भारत सरकार ने फैसला लिया है कि हमारे डिप्लोमैट बीजिंग विंटर ओलंपिक (Beijing Winter Olympics) में शामिल नहीं होंगे. भारत के विदेश मंत्रालय ने पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ये खेदजनक है कि चीन ने विंटर ओलंपिक का इस्तेमाल राजनीति के लिए किया है और गलवान झड़प के विलेन को मशाल वाहक बनाया है.

भारत सरकार ने ये भी फैसला किया है कि बीजिंग विंटर ओलंपिक का लाइव टेलिकास्ट भी भारत में नहीं किया जाएगा. भारत के साथ ही अमेरिका ने भी कहा है कि बीजिंग ओलंपिक 1980 के बाद से अबतक का सबसे विवादित ओलंपिक बन गया है. अब भारत और अमेरिका ही नहीं ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कई देशों ने मानव अधिकारों के मुद्दे पर चीन का विरोध करते हुए इस बार के विंटर ओलंपिक का डिप्लोमैटिक विरोध किया है. जरा सोचिए चीन की राजधानी बीजिंग में शुक्रवार से विंटर ओलंपिक की औपचारिक शुरुआत इसी मशाल से होगी, जिसके लिए अभी चीन के अलग अलग शहरों में Olympics Torch Relay का आयोजन किया जा रहा है. यानी ओलंपिक खेलों के लिए जलाई गई ये मशाल अलग-अलग शहरों में ले जाई जा रही है और जब ये कल बीजिंग पहुंचेगी, तभी इन खेलों का आयोजन होगा. लेकिन इससे पहले ही चीन ने इन खेलों को भारत के खिलाफ मंच बना दिया.

हाथ में विंटर ओलंपिक की मशाल और ऊपर से नीचे तक एथलीट की जर्सी. ये शख्स कोई स्पोर्ट्समैन नहीं, ना ही इसने किसी इवेंट में गोल्ड मेडल जीता है बल्कि ये PLA का रेजिमेंटल कमांडर है. नाम है क्वी फबाओ. क्वी फबाओ ये नाम आपने टीवी9 भारतवर्ष पर पहले भी सुना होगा, लेकिन आप ये तस्वीर पहली बार देख रहे हैं. गलवान का कायर सैनिक और PLA का धोखेबाज कमांडर जिसने भारतीय सैनिकों पर छल से हमला किया. हिंदुस्तान की सरजमीं पर कब्जे की साजिश की. हिमालय पर भारतीय सूरवीरों के हाथों पिटकर भागा, लेकिन अब ये ही चीन का वार हीरो बन गया है.

चीन के राष्ट्रपति ने बुजदिल सैनिक को वॉर का हीरो बनाया

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने एक बुजदिल सैनिक को वॉर हीरो बना कर उसके हाथ में शांति और मित्रता की ऐतिहासिक मशाल सौंप दी है. जो हिंदुस्तानी जवानों पर हमले में पिटा और जख्मी हुआ, यानी दूसरे देशों की जमीन हड़पने वाले एक सैनिक जिसके सिर पर आज भी गलवान के निशान हैं. चीन ने अपनी सेना का सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर बना दिया है. चीन के सरकारी भोंपू ग्लोबल टाइम्स में भी PLA के इस सैनिक को गलवान की हिंसक झड़प का हीरो बताया गया है. इस लेख का हेडर है Galwan Valley border clash hero becomes Beijing 2022 torch relay torch bearer

 

 

अफसोस की अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ये सब चुपचाप होते हुए देखती है और चीन बेशर्मी से गलवान के विलेन को ओलंपिक खेलों के मंच से शांतिदूत और असली नायक साबित करने की चाल चलता है. लेकिन सच यही है कि रेजिमेंटल कमांडर फबाओ का नाम आते ही गलवान और 15 जून 2020 की तारीख जुड़ जाती है. 20 महीने पहले की तस्वीर सामने आती है, जब फबाओ हिंदुस्तानी फौज पर हमले करवा रहा था. चीख चिल्ला रहा था. ये तस्वीरें बताती हैं कि चीन पर भरोसा क्यों नहीं किया जा सकता है. फबाओ की अगुवाई में जिनपिंग ब्रिगेड पूरी तैयारी और प्लानिंग के साथ गलवान में खौफनाक मंसूबों को पूरा करने के लिए उतरी थी. फबाओं कब्जे के इरादे से विवादित इलाके में आ डटे और जब भारतीय सेना ने विरोध किया, तो लड़ने पर उतारू हो गए.

भारत के जवानों ने रोका तो भीषण झड़प हुई. भारतीय सेना के 20 शूरवीर शहीद हो गए, लेकिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और प्रेसिडेंट शी जिनपिंग के लब सिल गए. गलवान का सच छिपाने में चीन ने पूरी ताकत झोंक दी. 20 महीने की गिनती के बाद भी दुनिया के डिप्टी सुपरपावर के हलक से अबतक पांच सैनिकों के नाम ही निकले हैं, जिनमें से चार गलवान की लड़ाई में में मारे गए और एक जिंदा बच निकला था. चीन के दावों की माने तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के ये पांचों जवान हैं. पीएलए की शिनजियांग सेना कमान का रेजिमेंटल कमांडर क्वी फबाओ और उसकी टुकड़ी में तैनात सिपाही चेन होंगजून, शिआओ सियून, चेन जियांगरांग, वांग झूरॉन जिनको गलवान का शूरवीर मानकर चीन ने सम्मान किया है.

लेकिन आज ड्रैगन लैंड के शासक को अपनी ये ही गिनती चार से 40 तक ले जानी होगी, क्योंकि गलवान की लड़ाई में उसका सिर्फ चार सैनिकों के मारे जाने का दावा झूठा है और चीन ये राज खोले ना खोले ऑस्ट्रेलिया की मीडिया ने ऐसा खुलासा किया है कि जो सीधे बीजिंग में जलजला ला देगा. ऑस्ट्रेलिया के न्यूजपेपर ‘द क्लैक्सन’ में एक रिपोर्ट छपी है. ‘गलवान डिकोडेड’ नाम से छपी इस रिपोर्ट को इंडिपेंडेंट सोशल मीडिया रिसर्चर्स की टीम ने तैयार किया है. इसमें कहा गया है कि झड़प के दौरान चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कई जवान गलवान नदी में बह गए थे. रिपोर्ट में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Weibo के हवाले से कहा गया है कि उस रात कम से कम 38 चीनी सैनिक डूब गए थे.

भारत के पलटवार में 45 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए

भारत के पलटवार में 45 से ज्यादा चीनी सैनिक मारे गए. चीन सरकार ने अपने शहीद सैनिकों को सम्मान नहीं दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि उस रात वास्तव में क्या हुआ था, किस वजह से झड़प हुई. इसके बारे में बहुत सारे फैक्ट बीजिंग द्वारा छिपाए गए. चीन ने दुनिया को मनगढ़ंत कहानियां सुनाईं. चीनी अधिकारियों ने कई ब्लॉग और पेज को हटा दिया. लेकिन चीन से मिले डिजिटल आर्काइव अलग ही कहानी बयां करते हैं. इस रिपोर्ट में भी फबाओ की वो तस्वीर छपी है जिसमें उसके सिर पर गंभीर चोट के निशान है. चीन ने जानबूझकर PLA के इस सैनिक को ओलंपिक खेलों की मशाल सौंपी, ताकि वो अपने देश के लोगों को गलवान की घटना के जरिए नकली राष्ट्रवाद की तरफ आकर्षित कर सके. असल में चीन के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सेना तो है, लेकिन उसके सैनिकों के पास साहस नहीं है.

आज ये जानना जरूरी है कि ओलंपिक में मशाल वाहक बनाने के क्या नियम है. इस तरह की रिले में किसे मशाल वाहक बनाया जाएगा, इसको लेकर स्पष्ट नियम नहीं है. अभी कुछ लोगों का चयन अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक आयोजन समिति करती है. कुछ नाम, उस देश के जरिए दिए जाते हैं, जहां ये खेल हो रहे हैं. कुछ लोगों का चयन, इन खेलों में हिस्सा लेने वाले देशों की ओलंपिक कमेटी करती है. ये मशाल वाहक अलग-अलग देशों के होते हैं. यानी नियम ये है कि जिस देश में ये मशाल जाएगी, वहां मशाल वाहक वो लोग होंगे, जिन्हें वहां की सरकार चुनेगी.

चीन ने इसी नियम का फायदा उठा कर गलवान के उस सैनिक को हीरो साबित करने की कोशिश की, जिसने एक कायर की तरह धोखे से भारतीय सैनिकों पर हमला किया था. अभी चीन में जो मशाल जल रही है, वो पिछले साल 18 अक्टूबर को ग्रीस में जलाई गई थी. चीन ने इस मशाल को भी भारत के खिलाफ राजनीति की मशाल बना दिया, जो अब एक सवाल बन कर जल रही है. आज दुनिया को ये भी सोचना है कि जो चीन 15 देशों की जमीन हड़पना चाहता है, जो अपनी खतरनाक विस्तारवादी नीति के तहत दूसरे देशों की जमीन पर कब्जा करता है. जो कायरता से छिपकर वार करता है, वो दुनिया के सबसे बड़े खेलों की मशाल का मशाल वाहक कैसे हो सकता है.

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देश का ऑटोमोवाइल सेक्टर जल्द ही सवसे वड़े हव के रूम में अपनी पहचान वनाएगा। यह दावा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया है। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष में भारत का ऑटोमोवाइल क्षेत्र दुनिया में पहले नंवर पर पहुंच जाएगा।
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राष्ट्रीय समाचार: गलवान घाटी में शामिल PLA कमांडर को मशाल वाहक बनाना पड़ा चीन को पड़ा महंगा, बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा नहीं लेगा भारत
गलवान घाटी में शामिल PLA कमांडर को मशाल वाहक बनाना पड़ा चीन को पड़ा महंगा, बीजिंग ओलंपिक में हिस्सा नहीं लेगा भारत
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