बदन पर सेना की वर्दी, हाथों में खतरनाक हथियार… दुश्मनों पर प्रहार के लिए अग्निवीरों का पहला जत्था तैयार

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Agniveer: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए युवाओं में अधिकतर की सोच यह नहीं है कि उन्हें चार साल की सर्विस पूरी करनी और फिर वापस से घर लौट आना है. भारत के पहले अग्निवीरों में कई युवाओं की जोश काफी हाई देखने को मिली है. साढ़े 17 से 21 साल की आयु के भारत के पहले अग्निवीरों में कई केवल चार साल का समय काटना नहीं बल्कि देश के लिए आगे भी कुछ कर गुजरने की ईच्छा रखते हैं. ट्रेनिंग के दौरान ये युवा इसी महत्वकांक्षा के साथ अपने लक्ष्यों को पाने के लिए काम करने पर फोकस हैं. नेवी में बतौर अग्निवीर भर्ती हुए युवा ट्रेनिंग पूरी कर आईएनएस चिल्का से बाहर निकलने के लिए तैयार है. इनमें से कई लोगों से हिन्दुस्तान टाइम्स ने बातचीत की है. जिसमें यह पता चला है इन अग्निवीरों की आगे की सोच क्या है और भविष्य को लेकर इन्होंने क्या टारगेट सेट किया है, इसका पता चला है. अग्निपथ योजन के भर्ती हुई श्वेता सिंह अंतल है जिनकी उम्र 21 साल है. श्वेता कक्षा 12वी की बोर्ड परीक्षा में 96 फीसदी अंक हासिल किया था और दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज से समाजशास्त्र में बीए (ऑनर्स) पूरा किया है. अग्निपथ योजन के तहत भर्ती होने के बाद पिछले साल प्रशिक्षण के लिए आईएनएस चिल्का में शामिल हुईं.

चार साल समय नहीं काटना है, आगे के लिए कुछ सीखना है

श्वेता बताती हैं कि अग्निपथ योजना उनके लिए समय काटने जैसा नहीं है. श्वेता कहती हैं कि नौसेना या फिर बाकी अन्य दो सेवाओं में किसी एक में अधिकारी बनने की पहली सीढ़ी है. मैं इससे किसी भी चीज से कम के लिए तैयार नहीं हूं. श्वेता का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने जो कुछ भी सीखा है और बतौर अग्निवीर नौसेना में जो कुछ भी हासिल होगा वो मुझे अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा. श्वेता ने पिछले साल आर्मी ऑफिसर बनने के लिए सर्विस सिलेक्शन (SSB) की परीक्षा में शामिल हुई थीं लेकिन इंटरव्यू को पार नहीं कर पाई थीं. श्वेता के पास एनसीसी में 'सी' कैटेगिरी का सर्टिफिकेट भी है. एनसीसी वालों कई परीक्षाओं में छूट मिलती है. अग्निपक्ष का परिणाम भी उसी दिन घोषित किया गया था जिस दिन श्वेता का एसएसबी रिजल्ट घोषित किया गया था.

ट्रेनिंग के बाद क्षमता का अंदाजा

श्वेता की ही तरह दीपक चौधरी भी है जो अग्निवीर होने के साथ-साथ ऑफिसर बनने का लक्ष्य रखा है. दीपक कहते हैं कि आईएनएस चिल्का में ट्रेनिंग के दौरान मैंने एक चीज जरूर सीखी है और वो यह है कि मैं जितना सोचता हूं उससे कहीं अधिक मेरी क्षमता है. ट्रेनिंग ने मेरी सोच को और व्यापक बना दिया है इसलिए मैं बड़ा सोच रहा हूं.

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