Goa Assembly Elections 2022: 35 साल और गोवा के खाते में महज 2 बार पूर्ण बहुमत, क्या फिर दोहराएगा यह कीर्तिमान?

गोवा में विधानसभा चुनाव ( Goa Assembly Elections ) के लिए वोट कराए जा चुके हैं और हर किसी को 10 मार्च का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस छोट...
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गोवा में विधानसभा चुनाव (Goa Assembly Elections) के लिए वोट कराए जा चुके हैं और हर किसी को 10 मार्च का बेसब्री से इंतजार है, लेकिन इस छोटे से राज्य के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो इसका राजनीतिक अस्थिरता से भरा हुआ है. पूर्ण राज्य का दर्जा हासिल करने से पहले गोवा केंद्र शासित प्रदेश (Union Territories) था और राज्य के रूप में अस्तित्व में आने के बाद यहां पर 8 विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2022) हो चुके हैं जिसमें एक का रिजल्ट 10 मार्च (Counting) को आएगा, लेकिन पिछले 7 चुनावों के परिणाम के जरिए देखें तो यहां पर 6 बार किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला.

पुर्तगालियों से 1961 में गोवा को मुक्त कराने के बाद इसे गोवा, दमन और दीव के रूप में भारत का एक केंद्र शासित क्षेत्र बनाया गया. केंद्र शासित प्रदेश के रूप में यहां पर 6 विधानसभा चुनाव कराए गए. 30 मई 1987 में गोवा को जब एक राज्य के तौर पर मान्‍यता दी गई तो 1984 में हुए चुनाव को आगे बढ़ाया गया और कांग्रेस जो तब पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी थी, उसने ही सत्ता को आगे बरकरार रखने का मौका मिला.

पूर्ण राज्य गोवा में 1989 में हुआ पहला विधानसभा चुनाव

पूर्ण राज्य बनने के बाद गोवा में 1987 में 1989 में पहली बार नए राज्य में विधानसभा चुनाव कराया गया. साथ में विधानसभा के सदस्यों की संख्या 30 से बढ़ाकर 40 कर दी गई, लेकिन सत्तारुढ़ कांग्रेस को इस बार पूर्ण बहुमत नहीं मिला. हालांकि पार्टी महज एक सीट से ही बहुमत से दूर रह गई थी. कांग्रेस को 20 सीटें मिलीं जबकि महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के खाते में 18 सीटें गईं. उतार-चढ़ाव से भरे इस कार्यकाल में कई सरकारें बनीं और गिरी भी.

फिर 5 साल बाद जब गोवा में अगला विधानसभा चुनाव (1994) हुआ तो किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. कांग्रेस 18 सीट जीतकर फिर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी. दूसरे नंबर पर महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के खाते में 12 सीटें गईं. बीजेपी ने 4 सीटें हासिल की थीं. 1999 के चुनाव में कांग्रेस को जरुरी बहुमत हासिल हुआ. हालांकि पार्टी को महज एक सीट से ही बहुमत हासिल हुआ था. कांग्रेस ने 21, बीजेपी ने 10, महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी ने 4 सीटों पर कब्जा हासिल किया. लेकिन कांग्रेस पूर्ण रूप से शासन नहीं कर सकी और इसी कार्यकाल में बीजेपी ने गोवा की सत्ता में एंट्री भी की.

सन 2000 में पहली बार बनी बीजेपी की सरकार

बहुमत हासिल करने के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लुइजिन्हो फलेरियो के नेतृत्व में सरकार बनाई लेकिन महज 169 दिनों तक ही चल सकी क्योंकि फ्रांसिस्को सरदिन्हा ने कांग्रेस से बगावत कर दी और पार्टी को तोड़ दिया. फिर भारतीय जनता पार्टी की मदद से नव गठित पार्टी गोवा पीपुल्स कांग्रेस ने नई सरकार बनाई लेकिन यह सरकार भी महज 334 दिनों तक चल सकी.

फिर 24 अक्टूबर 2000 को, भारतीय जनता पार्टी ने मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व में गोवा में अपनी पहली सरकार बनाई, जो अगले चुनावों से पहले 1 साल और 223 दिन तक चली. 5 साल बाद 2002 में फिर से विधानसभा चुनाव हुए लेकिन इस चुनाव में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. हालांकि बीजेपी को 17 तो कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं. मनोहर पर्रिकर की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनी. लेकिन करीब 3 साल तक सत्ता में रहने के बाद यह सरकार गिर गई क्योंकि बीजेपी के नेता दिगंबर कामत ने बगावत कर दी और कांग्रेस में चले गए.

दिगंबर कामत के झटके से गिरी बीजेपी की सरकार

दिगंबर कामत के झटके से बीजेपी की सरकार गिरी तो कांग्रेस ने अपनी सरकार बना ली और प्रताप सिंह राणे फिर से मुख्यमंत्री बन गए. वहीं बागी बने दिगंबर ने उपचुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जीत हासिल कर ली. हालांकि प्रताप सिंह राणे महज 29 दिनों तक ही मुख्यमंत्री बने रह सके. इसके बाद राष्ट्रपति शासन लग गया जो 95 दिनों तक चला. राष्ट्रपति शासन के खात्म के बाद प्रताप सिंह राणे फिर से मुख्यमंत्री बने और पूरे 2 साल तक सरकार चलाते रहे. इनके शासनकाल में ही कार्यकाल पूरा हुआ और गोवा अगले चुनाव में गया.

कांग्रेस को 2007 के चुनाव (11वीं विधानसभा) में जीत हासिल हुई लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं मिला लेकिन चुनाव के बाद उसने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी और सेव गोवा फ्रंट (1 सीट) की मदद से सरकार बनाई. चुनाव में कांग्रेस को 16 तो एनसीपी को 3 सीटें मिली थीं. जबकि बीजेपी के खाते में 14 सीटें गई थीं. कांग्रेस के दिगंबर कामत मुख्यमंत्री बने और उन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया. वह पूर्ण राज्य बनने के बाद अपना कार्यकाल पूरा करने वाले गोवा के पहले मुख्यमंत्री बने.

2012 में बीजेपी को मिला पूर्ण बहुमत

पूर्ण राज्य बनने के बाद पहली बार 5 साल में महज एक सीएम देखने वाला गोवा को 2012 के चुनाव में भी यही उम्मीद थी और वह इस उम्मीद पर खरी उतरी क्योंकि बीजेपी को अकेले ही पूर्ण बहुमत मिल गया था. 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारने वाली बीजेपी को 21 सीटों पर जीत मिली और सहयोगी पार्टी महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी के खाते में 3 सीट गई. जबकि कांग्रेस 9 सीटों पर सिमट गई थी. बीजेपी ने 9 मार्च 2012 को मनोहर पर्रिकर को अगला मुख्यमंत्री बनाया लेकिन मई 2014 में केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद नवंबर 2014 में उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया और रक्षा मंत्री बन गए. उनकी जगह लक्ष्मीकांत पर्सेकर को मुख्यमंत्री बनाया गया.

फिर 2017 का चुनाव गोवा क्या देश की राजनीति के लिए मिसाल बन गया क्योंकि 40 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारुढ़ बीजेपी 13 सीटों पर सिमट गई जबकि कांग्रेस को 17 सीटें मिलीं और अभी वह सरकार बनाने की कोशिश में जुटी थी कि बीजेपी ने तत्परता दिखाते हुए बहुमत जुटा लिया और गोवा में फिर से सरकार बना ली.

इस बार के चुनाव में क्या होगा?

हालांकि उसके लिए यह राह बहुत आसान नहीं रही क्योंकि बीजेपी बहुमत से 8 सीट पीछे थी जबकि कांग्रेस महज 4 सीटों से दूर थी. 2017 के चुनाव के दौरान राज्य में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. तब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रहे मनोहर पर्रिकर को राज्य में सरकार बनाने के लिए फिर से गोवा लौटना पड़ा. पर्रिकर को वापस गोवा भेजकर पार्टी राज्य में सत्ता कायम रखने में सफल रही. पर्रिकर ने क्षेत्रीय दलों और अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों के समर्थन के साथ गोवा में सरकार बनाई.

अब 5 साल बाद फिर से चुनाव हो रहे हैं और अब सबकी नजर गोवा की राजनीति पर टिकी है क्योंकि राजनीति की दुनिया के दो नए खिलाड़ी गोवा में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि उनकी रणनीति राष्ट्रीय फलक पर अन्य राज्यों में दमखम के साथ उतरने की है. आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस की एंट्री ने मुकाबले को चतुष्कोणीय बना दिया है, अब देखना है कि यहां की जनता का मूड किस पार्टी के पक्ष में जाता है या फिर राज्य को हंग असेंबली का सामना करना पड़ता है.

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Goa Assembly Elections 2022: 35 साल और गोवा के खाते में महज 2 बार पूर्ण बहुमत, क्या फिर दोहराएगा यह कीर्तिमान?
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