J&K: सियासी समीकरण सेट करने में जुटे शाह, पंडितों के रिजर्व सीट का ऐलान आज!

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की पहली सरकार बनाने के लिए सियासी समीकरण साधने में जुट गए हैं. केंद्र शासित प्रदेश के...
Amit Shah Pti 11 Jk

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर में बीजेपी की पहली सरकार बनाने के लिए सियासी समीकरण साधने में जुट गए हैं. केंद्र शासित प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे अमित शाह ने मंगलवार को राजौरी की रैली में गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ी समुदायों को जल्द ही आरक्षण देने का ऐलान किया. माना जा रहा है कि इस दांव से अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने और इसके केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद होने वाले पहले विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत से बीजेपी की सरकार बनाने की जमीन तैयार करने की कोशिश की है.

गृह मंत्री अमित शाह आज बुधवार को वो घाटी में भी लोगों के दिलों में बीजेपी के लिए जगह बनाने के मकसद से कई ऐलान कर सकते हैं. हालांकि शाह को आतंकवादियों का तरफ से कड़ी चुनौती मिल रही है. गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार से 3 दिन के जम्मू-कश्मीर दौरे पर हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने राजौरी में एक रैली को संबोधित किया. शाह ने कहा कि जल्द ही आरक्षण दिया जाएगा. इसकी तैयारी हो गई. इसे लेकर कमीशन ने अपनी सिफारिशें भेज दी हैं. शाह ने कहा कि जज शर्मा के आयोग ने सरकार को भेजी अपनी रिपोर्ट में गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ी समुदायों के लिए आरक्षण की सिफारिश की है. मोदी सरकार इन सिफारिशों को जल्द ही अमली जामा पहनाएगी.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के राजौरी, हंदवाड़ा,पुंछ और बारामूला में पहाड़ी लोगों की बड़ी आबादी है. इस समुदाय के लोग जम्मू कश्मीर के 5 जिलों की 10 विधानसभा सीटों पर प्रभाव रखते हैं. इस दांव से बीजेपी इन सभी 10 सीटों पर बेहद मजबूत स्थिति में आ सकती है. इस लिहाज से अमित शाह के इस वादे को सियासी तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे केंद्र शासित प्रदेश में पुरानी पार्टियों को नुकसान और बीजेपी को बड़ा फायदा हो सकता है.

बीजेपी जम्मू में मजबूत कश्मीर में जीरो

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के लिए कश्मीर घाटी में पकड़ होना बेहद जरूरी है. बीजेपी जम्मू-कश्मीर में चुनाव को लेकर अंदरूनी तौर पर शुरू कर चुकी है. जम्मू में उसकी पकड़ पहले से ही काफी मजबूत है. बीजेपी ने सभी सीटें जम्मू में सबसे ज्यादा सीटें जीती थी, लेकिन कश्मीर घाटी में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी. अपनी सरकार बनाने के लिए उसे अब जम्मू में पहले से ज्यादा सीटों की जरूरत है. साथ ही घाटी में भी खाता खोलने की जरूरत होगी.

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद बीजेपी जम्मू-कश्मीर में पहले हिंदू मुख्यमंत्री का भी वादा कर रही है. हालांकि पार्टी के नेताओं को यह बात पता है कि बिना मुसलमानों के वोट के यह संभव नहीं हो पाएगा. अब ऐसे में पार्टी राज्य की दूसरी पार्टी के मुस्लिम नेताओं को तोड़ने की कोशिश के अलावा किसी ऐसी पार्टी से गठबंधन की भी संभावनाएं तलाश रही है जो कि मुस्लिम बहुल सीटों पर जीत हासिल कर सके.

पिछले चुनाव में मजबूत होकर उभरी थी बीजेपी

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे मजबूत होकर उभरी थी. पिछले चुनाव में उसके राज्य की 87 सीटों में से 25 सीटें मिली थी. ये सभी सीटें उसे जम्मू में मिली थीं. सबसे ज्यादा 27 सीटें पीडीपी ने जीती थी. खास बात ये थी कि पिछले चुनाव में बीजेपी जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी थी. उसे कुल 11,07,194 वोट मिले थे. जोकि कुल वोटों का 23 प्रतिशत थे. जबकि सबसे ज्यादा सीटें जीतने वाली पीडीपी को 10,92,203 वोट मिले थे जो कि कुल वोटों का 22.7 प्रतिशत थे. नेशनल कांफ्रेंस 10,00,693 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी. उसे 20.8 प्रतिशत वोट और 15 सीटें मिली थी. कांग्रेस 12 सीटों और 18 प्रतिशत वोटों के साथ चौथे स्थान पर थी.
अगले चुनाव में बीजेपी जम्मू क्षेत्र की सभी सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा को कश्मीर घाटी में भी कुछ सीटें जीतने की रणनीति
बना रही है.

कश्मीरी पंडितों का आरक्षण एक मास्टर स्ट्रोक

जम्मू में आरक्षण के ऐलान की तरह ही कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के लिए विधानसभा में दो सीटें आरक्षित करना बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है. बुधवार को गृह मंत्री बारामूला में होने वाली अपनी रैली में इस बारें में बड़ा ऐलान कर सकते हैं. इसके जरिए बीजेपी कश्मीर घाटी में भी अपना खाता खोल सकती है. परिसीमन आयोग ने पंडितों के लिए दो सीटें आरक्षित करने की सिफारिश की है.

जम्मू-कश्मीर में अपने दम पर सरकार बनाने के लिए बीजेपी को घाटी में अपनी पकड़ बनाना बेहद जरूरी है. इस लिहाज से ये कदम बीजेपी के लिए काफी मुफीद हो सकता है. कश्मीरी पंडितों के लिए आरक्षण से जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक समीकरण हमेशा के लिए बदल सकते हैं. ये बदलाव बीजेपी के हक में होगा.

क्या है घाटी में पार जमाने की बीजेपी की रणनीति?

कश्मीर घाटी में कम से कम 10 सीटें जीतने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके लिए बीजेपी कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस के कुछ ऐसे मजबूत नेताओं पर नजर रखे हुए है जो कश्मीर में उसका खाता खुलवा सकते हैं. साथ ही उसकी कोशिश इन तीन पार्टियों के अलावा कुछ ऐसी पार्टियों पर भी है जो उसके साथ गठबंधन करके मददगार साबित हो सकता है.

वहीं उसकी नजर कुछ ऐसे लोगों पर भी है जो निर्दलीय चुनाव जीतकर बीजेपी को सरकार बनाने में मदद कर सकते हैं. बीजेपी 35 से 40 सीटें जम्मू में तो 5 से 10 सीटें कश्मीर घाटी में जीतने की रणनीति पर काम कर रही है. इस तरह वो जम्मू-कश्मीर के अगले अगले विधानसभा चुनाव में 50 पार के लक्ष्य के साथ चुनाव मैदान में उतरेगी. इसे लेकर बीजेपी काफी उत्साहित है.

परिवारवाद पर शाह का जोरदार हमला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुर्जर, बकरवाल और पहाड़ी समुदायों के लिए आरक्षण को अनुच्छेद 370 से जोड़ा. उन्होंने दावा किया कि अगर अनुच्छेद 370 और 35A नहीं हटता तो जम्मू-कश्मीर में इन समुदायों को कभी आरक्षण नहीं मिलता. शाह ने जम्मू-कश्मीर में परिवारवाद पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि आजादी के बाद 70 साल तक जम्मू-कश्मीर पर 3 परिवारों ने राज किया है. इस दौरान लोकतंत्र सिर्फ अपने परिवारों में बना दिया था.

तीन परिवारों ने लोकतंत्र और जम्हूरियत का मतलब सिर्फ पीढ़ियों तक शासन करना बना दिया था. पहले जो हक 3 परिवारों के पास था, आज वह अधिकार 30 हजार लोगों को मिला है. अमित शाह ने अपनी जनसभा में लगातार गल रहे मोदी-मोदी के नारों को उन लोगों के लिए करारा जवाब बताया जो कहते थे कि अनुच्छेद 370 हटेगा तो आग लग जाएगी और खून की नदियां बह जाएंगी.

जम्मू-कश्मीर में हालात सुधारने का दावा

अमित शाह ने दावा किया कि अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, जम्मू-कश्मीर में हालात काफी सुधरे हैं. शाह ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ मोदी सरकार की गई सख्त कार्रवाई के कारण जम्मू कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हुई है. उन्होंने कहा कि इसके फलस्वरूप इस साल जान गंवाने वाले सुरक्षाकर्मियों की संख्या प्रति वर्ष 1,200 से कम होकर 136 रह गई है.

गौरतलब है कि शाह के दौरे से पहले पहले 28 सितंबर को उधमपुर में 8 घंटे के अंतराल में बसों में दो ब्लास्ट हुए थे. पहला ब्लास्ट बुधवार रात करीब साढ़े दस बजे दोमेल चौक पर पेट्रोल पंप के पास खड़ी एक खाली बस में हुआ. इसमें 2 लोग घायल हुए थे. दूसरा ब्लास्ट
गुरुवार सुबह 6 बजे बस स्टैंड पर खड़ी एक खाली बस में हुआ. इसमें कोई घायल
नहीं हुआ था.

अमित शाह का विकास पर खार जोर

जम्मू-कश्मीर में सियासी समीकरण साधने के साथ ही मोदी सरकार विकास पर खास जोर दे रही है. अपने दोर के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दावा किया 370 हटने के बाद लोगों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिला. जबलोग बदलाव का स्वागत करते हैं तो लोकतंत्र मजबूत होता है. उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में रिकॉर्ड तोड़ 50 लाख पर्यटक जम्मू आए हैं और 22 लाख पर्यटक कश्मीर गए हैं. पर्यटन से जम्मू-कश्मीर के युवाओं को काफी फायदा होगा.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने उन युवाओं को कंप्यूटर और रोजगार दिया, जिनके हाथ में पहले पत्थर थे. पहले पथराव की घटनाएं होती थी, क्या आपने अब ऐसी कोई घटना देखी है? अब ऐसी कोई घटना नहीं है. हमें अब जो बदलाव आया है उसे समझना होगा. हमने प्रशासन में उन लोगों की पहचान की है जो आतंकवाद का समर्थन कर रहे थे और उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका है.

जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के हक में सियासी समीकरण साधने करे लिहाज से गृह मंत्री अमित शाह का ये दौरा काफी अहम माना जा रहा है. बुधवार को वो राज्यपाल के साथ जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा का हालात का जायजा लेंगे. साथ ही बारामूला की अपनी जनसभा के जरिए घाटी के लोगों को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश करेंगे. 370 हटने के बाद से बीजेपी और मोदी सरकार को लेकर सकारात्मक सोच पैदा करने में अमित शाह की बारामूला की रैली अहम भूमिका निभा सकती है.

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